Chatra Suspension: चतरा में तस्कर के साथ मिलकर युवक को उठाने पहुंचे थानेदार सस्पेंड, नीली बलेनो से किडनैपिंग की कोशिश का वीडियो वायरल
चतरा एसपी ने तस्कर के साथ मिलकर युवक को जबरन उठाने की कोशिश करने वाले गिद्धौर थाना प्रभारी समेत तीन को निलंबित कर दिया है। नीली बलेनो और वायरल वीडियो कांड की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
चतरा/झारखंड, 10 अप्रैल 2026 – झारखंड के चतरा जिले में पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। चतरा एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने कर्तव्यहीनता और संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में गिद्धौर थाना प्रभारी शिवा यादव, सीसीटीएनएस ऑपरेटर दिलीप कुमार और मुंशी महेश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि इन्होंने एक नामी तस्कर के साथ साठगांठ कर कानून की धज्जियां उड़ाईं और बिना किसी वारंट या कानूनी प्रक्रिया के एक निर्दोष युवक को 'किडनैप' करने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद हुई इस कार्रवाई ने पुलिस और अपराधियों के बीच छिपे 'गठबंधन' को बेनकाब कर दिया है।
सादे कपड़े, निजी कार और खौफ: क्या है पूरा 'बलेनो कांड'?
घटना राजपुर थाना क्षेत्र के बिंधानी गांव की है, जिसने पूरे चतरा पुलिस प्रशासन की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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निजी कार का इस्तेमाल: वीडियो में साफ दिख रहा है कि तीनों पुलिसकर्मी सरकारी गाड़ी छोड़कर एक नीले रंग की निजी बलेनो कार से गांव पहुंचे थे।
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जबरन उठाने की कोशिश: इन पुलिसकर्मियों ने गांव के संदीप दांगी नाम के युवक को जबरन अपनी कार में बैठाने का प्रयास किया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी 'छापेमारी' की जानकारी स्थानीय राजपुर थाना को भी नहीं दी गई थी।
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तस्कर चला रहा था स्टीयरिंग: इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिसकर्मियों की कार कोई सरकारी ड्राइवर नहीं, बल्कि बिट्टू दांगी नाम का शख्स चला रहा था। बिट्टू दांगी का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह तस्करी के मामलों में जेल भी जा चुका है।
ग्रामीणों का आक्रोश: भाग खड़े हुए 'वर्दीधारी'
जब पुलिसकर्मी संदीप दांगी को खींचकर कार में डाल रहे थे, तभी गांव वाले और परिजन वहां जुट गए।
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विरोध का सामना: ग्रामीणों ने जब पुलिसकर्मियों से पहचान पत्र और वारंट मांगा, तो वे कोई जवाब नहीं दे सके। नकाबपोश पुलिसकर्मियों (सादे लिबास में) की पहचान उजागर होते ही हंगामा बढ़ गया।
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मौके से फरार: स्थिति को अपने खिलाफ देखते हुए थाना प्रभारी और उनके साथी तस्कर के साथ कार में बैठकर मौके से भाग निकले।
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एसडीपीओ की जांच: वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने सिमरिया एसडीपीओ शुभम खंडेलवाल को जांच सौंपी। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि पुलिसकर्मियों ने कानूनी प्रोटोकॉल का पूरी तरह उल्लंघन किया था और तस्कर के साथ उनकी मिलीभगत के प्रमाण मिले।
उग्रवाद, तस्करी और 'काली कमाई' की चुनौतियां
चतरा जिला दशकों से अफीम की खेती, कोयला लेवी और उग्रवादी गतिविधियों के कारण सुरक्षा बलों के लिए एक कठिन क्षेत्र रहा है।
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तस्करी का गढ़: चतरा का भौगोलिक इलाका अफीम (Opium) तस्करी के लिए जाना जाता है। यहाँ अक्सर पुलिस और तस्करों के बीच मुठभेड़ की खबरें आती हैं, लेकिन तस्करों के साथ 'दोस्ती' के मामले पुलिस की साख को बट्टा लगाते रहे हैं।
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इतिहास की गूँज: पूर्व में भी चतरा के कई पुलिस अधिकारियों पर लेवी वसूली और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगे हैं। 2000 के दशक की शुरुआत से ही यहाँ 'खाकी' और 'खादी' पर उग्रवादियों के साथ सांठगांठ के दाग लगते रहे हैं।
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कठोर कार्रवाई का दौर: वर्तमान एसपी सुमित कुमार अग्रवाल के कार्यकाल में 'क्लीन पुलिसिंग' पर जोर दिया जा रहा है। गिद्धौर थाना प्रभारी का निलंबन इसी दिशा में एक कड़ा संदेश है कि अपराधियों के साथ दोस्ती करने वालों के लिए महकमे में कोई जगह नहीं है।
अगली कार्रवाई: विभागीय जांच और आपराधिक केस की तैयारी
निलंबन तो केवल शुरुआत है, इन पुलिसकर्मियों पर अब और भी गाज गिर सकती है।
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विभागीय जांच शुरू: सस्पेंड किए गए तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विस्तृत विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। उनके मोबाइल फोन और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है ताकि तस्कर बिट्टू दांगी के साथ उनके संबंधों की गहराई का पता चल सके।
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तस्कर की तलाश: पुलिस अब बिट्टू दांगी की तलाश में छापेमारी कर रही है। यह जांच का विषय है कि एक तस्कर को पुलिसकर्मियों के साथ घूमने और सरकारी काम में दखल देने की हिम्मत कहाँ से मिली।
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राजपुर पुलिस की भूमिका: स्थानीय राजपुर पुलिस से भी पूछताछ की जा रही है कि उनके क्षेत्र में दूसरे थाने की पुलिस बिना सूचना के कैसे सक्रिय थी।
चतरा में गिद्धौर थाना प्रभारी का यह कृत्य लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है। जब रक्षक ही भक्षक बनकर तस्करों की गाड़ी में सवार होकर लोगों को उठाने निकलें, तो जनता का विश्वास पुलिस से उठने लगता है। नीली बलेनो कार और बिट्टू दांगी का कनेक्शन यह साबित करता है कि वर्दी के पीछे कुछ 'काली भेड़ें' आज भी सक्रिय हैं। एसपी की त्वरित कार्रवाई ने भले ही आक्रोश को शांत कर दिया हो, लेकिन यह मामला चतरा पुलिस के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा। अब देखना यह है कि क्या इन पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है या यह केवल एक निलंबन तक सीमित रहता है।
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