Haridwar Devotion Surge: कार्तिक पूर्णिमा के बीच लाखों लोग गंगा स्नान के लिए उमड़े - इस दिव्य डुबकी से चूके और हमेशा पछताए!

हरिद्वार कार्तिक पूर्णिमा 2025 में गंगा स्नान की भारी भीड़ – लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे, गुरुनानक जयंती पर गुरुद्वारों में हुजूम। क्या आपका स्नान अधूरा रह जाएगा? इतिहास, रस्में और जाम की पूरी स्टोरी जानें।

Nov 5, 2025 - 10:11
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Haridwar Devotion Surge: कार्तिक पूर्णिमा के बीच लाखों लोग गंगा स्नान के लिए उमड़े - इस दिव्य डुबकी से चूके और हमेशा पछताए!
Haridwar Devotion Surge: कार्तिक पूर्णिमा के बीच लाखों लोग गंगा स्नान के लिए उमड़े - इस दिव्य डुबकी से चूके और हमेशा पछताए!

हरिद्वार/वाराणसी, 5 नवंबर 2025 (न्यूज एडिटर डेस्क): भारत की आध्यात्मिक नसों में आज एक साथ दो महान पर्वों का संचार हो रहा है – कार्तिक पूर्णिमा और गुरुनानक जयंती। गंगा के पावन घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जहां आस्था की डुबकी लगाने वालों का तांता लगा हुआ है। हरिद्वार के हर की पैड़ी से लेकर गढ़मुक्तेश्वर के अस्थाई घाटों तक, और बिहार के हाजीपुर कोनहरा घाट पर महिलाओं का सैलाब – नजारा ऐसा कि देखते ही बन रहा है। लेकिन इस दिव्य उत्साह के बीच सड़कों पर भीषण जाम ने यात्रियों को परेशान कर दिया। क्या आप भी इस पवित्र स्नान का हिस्सा बनने से चूक गए? आइए, इस ऐतिहासिक दिन की पूरी कहानी जानें, जहां भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार, शिव का त्रिपुरासुर पर विजय और गुरु नानक देव जी का जन्म एक साथ गूंज रहा है।

कार्तिक पूर्णिमा, जो हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाती है, आज 5 नवंबर को धूमधाम से उत्साहित हो रही है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि कल रात 10:36 बजे शुरू होकर आज शाम 6:48 बजे तक चलेगी। इस दिन का शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:52 से 5:44 बजे) में है, जब गंगा स्नान और दान का फल अक्षय माना जाता है। इतिहास में यह तिथि भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जुड़ी है, जब उन्होंने हयग्रीव राक्षस से वेदों को बचाया था। वहीं, शिव पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने तीन नगरों (त्रिपुर) के राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, जिसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। यह विजय देवताओं की दीपमालिका का प्रतीक बनी, जो आज देव दीपावली के रूप में मनाई जाती है। वाराणसी के घाटों पर लाखों दीये जलाकर गंगा को नमन किया जा रहा है, जहां मान्यता है कि देवता पृथ्वी पर उतरकर दीपोत्सव मनाते हैं। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है कि कार्तिक स्नान से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। तुलसी विवाह की परंपरा भी इसी दिन पूरी होती है, जहां भक्त तुलसी को पौधे के रूप में वरमाला चढ़ाते हैं।

हरिद्वार में हर की पैड़ी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ आया। ब्रह्मकुंड में आस्था की डुबकी लगाने वालों की संख्या इतनी कि घाट लबालब हो गया। गढ़मुक्तेश्वर में कार्तिक मेले का नजारा तो देखते ही बन रहा – अनुमान है कि 35 लाख से अधिक भक्त पहुंचे हैं। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से आए श्रद्धालुओं के लिए 14 अस्थाई घाट बनाए गए हैं। सुरक्षा चाक-चौबंद: ड्रोन निगरानी, मेडिकल कैंप और लाइफबोट तैनात। लेकिन भीड़ ने सड़कों पर जाम पैदा कर दिया – NH-58 पर वाहनों की लंबी कतारें। एक श्रद्धालु ने बताया, "गंगा मां की कृपा के लिए सुबह 3 बजे घर से निकले, लेकिन जाम में 4 घंटे लग गए। फिर भी आस्था जीत गई।"

बिहार के हाजीपुर में ऐतिहासिक कोनहरा घाट पर भी उत्साह चरम पर है। गंगा के इस पावन तट पर लाखों लोग स्नान के लिए पहुंचे, जिसमें महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। परिवार समेत दूर-दूर से आए भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई। कोनहरा घाट का इतिहास भक्तों के लिए प्रेरणा स्रोत है – प्राचीन काल में यह घाट साधु-संतों का प्रमुख तीर्थ था, जहां रामायण काल से जुड़ी मान्यताएं हैं। यहां स्नान से पितरों का तर्पण और मोक्ष की कामना पूरी मानी जाती है। जाम की स्थिति यहां भी बनी, लेकिन पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन से राहत दी।

कार्तिक पूर्णिमा का उत्सव सिर्फ स्नान तक सीमित नहीं। पुष्कर में ऊंट मेला, नासिक में गोदावरी स्नान और तमिलनाडु में तिरुचेंदुर में सूरासम्हारम – देशभर में विविधता। रस्में सरल लेकिन गहन: सुबह स्नान, विष्णु-शिव पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य, दान-पुण्य। शाम को दीपदान – घरों में तुलसी माला, घाटों पर दीये।

दूसरी ओर, गुरुनानक जयंती पर सिख समुदाय में भक्ति का सैलाब। यह 556वीं जयंती है, जो कार्तिक पूर्णिमा पर ही पड़ती है। गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में ननकाना साहिब (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके उपदेश – एक ओंकार सतनाम, किरत करो, वंड छको, नाम जपो – आज भी प्रासंगिक। उत्सव दो दिन पहले अखंड पाठ से शुरू: गुरु ग्रंथ साहिब का 48 घंटे निरंतर पाठ। सुबह प्रभात फेरी, कीर्तन, लंगर – जहां सभी धर्मों के लोग समान भाव से भोजन करते हैं।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में लाखों सिख जुटे, जहां शोभायात्रा निकली। दिल्ली के बंगला साहिब, पटना साहिब में भीड़ उमड़ी। लंगर में स्वयंसेवक 24 घंटे सेवा में लगे – समानता का प्रतीक। गुरुद्वारों को फूलों और लाइट्स से सजाया गया, शाम को आरती। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली में स्कूल-कॉलेज बंद।

ये पर्व भारत की सांस्कृतिक एकता दर्शाते हैं – हिंदू-सिख एक साथ। लेकिन भीड़ से जाम, सुरक्षा चुनौती। प्रशासन ने 10,000+ पुलिसकर्मी तैनात किए। एक भक्त बोले, "गंगा स्नान से पाप धुलते हैं, गुरु के उपदेश से मन शुद्ध।" क्या आपने स्नान किया? यह दिन आस्था का महोत्सव है, जो सदियों से चला आ रहा।

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Team India मैंने कई कविताएँ और लघु कथाएँ लिखी हैं। मैं पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हूं और अब संपादक की भूमिका सफलतापूर्वक निभा रहा हूं।