Giridih Crash: मातम, गिरिडीह में बेकाबू रफ्तार ने ली बुजुर्ग की जान, बीमार बच्चे को देखकर लौट रहे थे सुरेश, जैन मंदिर के पास मचा कोहराम
गिरिडीह के मुफस्सिल इलाके में आधी रात को हुए दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार सुरेश वर्मा की मौके पर ही मौत हो गई है। एक बीमार बच्चे की सलामती की दुआ कर अस्पताल से लौट रहे पिता के साथ हुई इस खौफनाक वारदात और फरार अज्ञात वाहन की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी हाईवे पर छिपे इस जानलेवा खतरे से अनजान रह जाएंगे।
गिरिडीह, 31 दिसंबर 2025 – झारखंड के गिरिडीह जिले में साल के आखिरी दिनों में रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत बराकार जैन मंदिर के पास मंगलवार की देर रात एक हृदयविदारक सड़क हादसा हुआ, जिसमें 50 वर्षीय सुरेश वर्मा की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब पूरा शहर नींद की आगोश में था, लेकिन एक अज्ञात वाहन की लापरवाही ने कुम्हरलालो निवासी एक परिवार के मुखिया को हमेशा के लिए छीन लिया। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और स्थानीय लोगों में 'हिट एंड रन' की बढ़ती घटनाओं को लेकर भारी आक्रोश है।
मदद की राह में मिली मौत: अस्पताल से लौट रहे थे सुरेश
हादसे की दास्तां जितनी दर्दनाक है, उतनी ही भावुक भी। मृतक के पुत्र सोनू कुमार ने नम आंखों से बताया कि उसके पिता एक नेक इंसान थे।
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परोपकार की सजा: मंगलवार रात सुरेश वर्मा अपने एक करीबी मित्र के बीमार बेटे का हाल जानने के लिए नवजीवन नर्सिंग होम गए थे।
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आधी रात का हादसा: रात के करीब 11 बज रहे थे जब वे अस्पताल से अपनी बाइक पर सवार होकर घर (कुम्हरलालो) लौट रहे थे।
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खौफनाक टक्कर: जैसे ही वे जैन मंदिर के समीप पहुँचे, विपरीत दिशा से आ रहे एक तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि सुरेश वर्मा सड़क पर दूर जा गिरे और उनके सिर में गंभीर चोट आने के कारण मौके पर ही दम तोड़ दिया।
फरार हुआ 'कातिल' वाहन: पुलिस की तलाश जारी
हादसे के बाद मानवता को शर्मसार करने वाली बात यह रही कि टक्कर मारने वाला चालक वाहन को रोकने के बजाय अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
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शून्य विजिबिलिटी और रफ्तार: प्रत्यक्षदर्शियों (यदि कोई हो) के अभाव में पुलिस अब आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि उस 'किलर वाहन' की पहचान की जा सके।
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सदर अस्पताल पहुँचा शव: बुधवार सुबह पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सुरेश वर्मा के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गिरिडीह भेजा।
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परिजन बेहाल: कुम्हरलालो गांव में जैसे ही सुरेश का शव पहुँचा, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।
गिरिडीह सड़क दुर्घटना: मुख्य विवरण (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| मृतक का नाम | सुरेश वर्मा (50 वर्ष) |
| स्थान | बराकार जैन मंदिर के समीप, मुफस्सिल |
| निवास | कुम्हरलालो, गिरिडीह |
| हादसे का समय | मंगलवार रात 11:00 बजे |
| वाहन की स्थिति | अज्ञात और फरार (Hit and Run) |
इतिहास और भूगोल: बराकार-जैन मंदिर मार्ग का खतरा
गिरिडीह का बराकार क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से पारसनाथ और जैन तीर्थस्थलों के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है। यहाँ की सड़कें संकरी हैं लेकिन रात के समय भारी वाहनों (ट्रकों और डंपरों) की आवाजाही बहुत अधिक रहती है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो इस रूट पर रात 10 बजे के बाद ट्रकों की रफ्तार अनियंत्रित हो जाती है, जिससे बाइक सवार सबसे ज्यादा 'सॉफ्ट टारगेट' बनते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जैन मंदिर के आसपास पर्याप्त स्ट्रीट लाइट न होने और पुलिस पेट्रोलिंग की कमी के कारण अपराधी और लापरवाह चालक बेखौफ होकर गाड़ियाँ दौड़ाते हैं। सुरेश वर्मा की मौत ने एक बार फिर हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
न्याय की मांग: सुलगते सवाल
मुफस्सिल थाना पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल वही है कि क्या वह चालक कभी पकड़ा जाएगा?
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परिजनों की गुहार: सोनू कुमार और ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मार्ग पर रात के समय सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए और तेज रफ्तार वाहनों पर नकेल कसी जाए।
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मुआवजे की अपील: गरीब परिवार से आने वाले सुरेश वर्मा ही घर के मुख्य कमाऊ सदस्य थे, ऐसे में ग्रामीणों ने सरकार से मुआवजे की भी मांग की है।
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पुलिस का आश्वासन: थाना प्रभारी ने बताया कि दुर्घटनास्थल के पास के पेट्रोल पंपों और दुकानों के कैमरों की जांच की जा रही है और जल्द ही वाहन को जब्त कर लिया जाएगा।
हाईवे पर सावधानी ही बचाव है
सुरेश वर्मा का निधन हमें याद दिलाता है कि हाईवे पर एक पल की लापरवाही या दूसरे की गलती किसी की पूरी दुनिया उजाड़ सकती है। 2025 के अंतिम दिन हुई यह घटना गिरिडीह के लिए एक चेतावनी है। हम सभी को रात के समय यात्रा करते समय हेलमेट और रिफ्लेक्टिव जैकेट का उपयोग करना चाहिए, हालांकि सुरेश जैसे नेक इंसान की मौत का दर्द केवल कड़े कानून और उनकी पालना से ही कम हो सकता है।
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