Tobacco Strike: जेब ढीली, अब ₹20 वाली सिगरेट मिलेगी ₹80 में, सरकार का नया टैक्स प्लान तैयार, तंबाकू उत्पादों पर 325% तक महंगाई

केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क बिल 2025 को मंजूरी दे दी है जिससे सिगरेट और तंबाकू उत्पादों की कीमतों में 4 गुना तक की भारी बढ़ोतरी होने वाली है। टैक्स स्लैब में ₹11,000 तक के इजाफे और पाइप तंबाकू पर 325% टैक्स की पूरी कड़वी हकीकत यहाँ दी गई है वरना आप भी इस बड़े आर्थिक झटके और बाजार में आने वाले बदलावों से बेखबर रह जाएंगे।

Dec 31, 2025 - 17:09
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Tobacco Strike: जेब ढीली, अब ₹20 वाली सिगरेट मिलेगी ₹80 में, सरकार का नया टैक्स प्लान तैयार, तंबाकू उत्पादों पर 325% तक महंगाई
Tobacco Strike: जेब ढीली, अब ₹20 वाली सिगरेट मिलेगी ₹80 में, सरकार का नया टैक्स प्लान तैयार, तंबाकू उत्पादों पर 325% तक महंगाई

नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025 – देश के करोड़ों धूम्रपान करने वालों और तंबाकू उपभोक्ताओं के लिए नए साल से पहले एक ऐसी खबर आई है जो उनके फेफड़ों से ज्यादा उनकी जेब पर असर डालने वाली है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) बिल 2025 को हरी झंडी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सिगरेट पीना महज एक शौक नहीं, बल्कि एक विलासिता (Luxury) बन जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, सिगरेट की कीमतों में चार गुना तक का उछाल आने वाला है। जो सिगरेट अब तक आप ₹20 में खरीदते थे, उसकी कीमत जल्द ही ₹80 तक पहुँच सकती है। सरकार के इस सख्त कदम का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है, बल्कि देश के युवाओं को नशे की लत से दूर रखना भी है।

टैक्स का गणित: ₹200 से सीधे ₹11,000 की छलांग

संशोधित उत्पाद शुल्क की दरें इतनी ज्यादा हैं कि तंबाकू उद्योग में खलबली मच गई है।

  • भारी इजाफा: अब तक सिगरेट पर लगने वाला उत्पाद शुल्क प्रति 1000 स्टिक ₹200 से ₹735 के बीच था। नए बिल के तहत इसे बढ़ाकर ₹2,700 से ₹11,000 तक किया जा सकता है।

  • सस्ते विकल्प खत्म: इस बदलाव का सीधा मतलब है कि बाजार से 'सस्ती सिगरेट' का कॉन्सेप्ट पूरी तरह खत्म हो जाएगा। निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए सिगरेट खरीदना अब उनके बजट से बाहर होने वाला है।

सिर्फ सिगरेट नहीं, पूरा तंबाकू बाजार होगा महंगा

सरकार ने केवल सिगरेट ही नहीं, बल्कि तंबाकू के हर रूप पर टैक्स की कैंची चलाई है:

  1. चबाने वाला तंबाकू: इस पर टैक्स 25% से बढ़ाकर सीधे 100% कर दिया गया है।

  2. पाइप और स्मोकिंग मिक्सचर: यहाँ सबसे बड़ा झटका लगा है, जहाँ टैक्स 60% से बढ़ाकर रिकॉर्ड 325% प्रस्तावित है।

  3. हुक्का और अन्य: हुक्का तंबाकू पर भी टैक्स 25% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है।

तंबाकू पर नया टैक्स ढांचा: एक नजर (New Tax Slab 2025)

उत्पाद पुराना टैक्स (%) नया प्रस्तावित टैक्स (%)
सिगरेट (प्रति 1000 स्टिक) ₹200 - ₹735 ₹2,700 - ₹11,000
चबाने वाला तंबाकू 25% 100%
हुक्का तंबाकू 25% 40%
पाइप/स्मोकिंग मिक्सचर 60% 325%

इतिहास और उद्देश्य: टैक्स बढ़ाकर 'कैंसर' पर लगाम?

भारत में तंबाकू पर टैक्स बढ़ाने का इतिहास काफी पुराना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 'तंबाकू नियंत्रण फ्रेमवर्क' के तहत यह माना जाता है कि अगर किसी उत्पाद की कीमत 10% बढ़ती है, तो उसकी खपत में करीब 4% की कमी आती है। भारत सरकार ने इसी फार्मूले को आधार बनाकर 'सिन टैक्स' (Sin Tax) की नीति अपनाई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऊँची कीमतें युवाओं को पहली बार सिगरेट उठाने से रोकेंगी। ऐतिहासिक रूप से देखें तो भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ तंबाकू से होने वाली बीमारियों (जैसे कैंसर और हृदय रोग) पर सरकार को सालाना अरबों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह नया बिल उसी स्वास्थ्य बजट के बोझ को कम करने की एक कोशिश है।

उद्योग की चिंता: क्या बढ़ेगी अवैध तस्करी?

जहाँ स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस कदम की सराहना कर रहे हैं, वहीं तंबाकू उद्योग और उपभोक्ताओं का एक वर्ग आशंकित है।

  • ब्लैक मार्केटिंग का डर: विशेषज्ञों का तर्क है कि जब कानूनी सिगरेट इतनी महंगी हो जाएगी, तो पड़ोसी देशों (जैसे म्यांमार और बांग्लादेश) से आने वाली अवैध और बिना टैक्स वाली सिगरेट का बाजार गर्म हो जाएगा।

  • रोजगार पर असर: तंबाकू की खेती और व्यापार से जुड़े लाखों लोगों को डर है कि मांग घटने से उनकी आजीविका पर संकट आ सकता है।

  • जेब पर भारी: एक औसत धूम्रपान करने वाले के लिए महीने का बजट 300% तक बढ़ सकता है, जिससे अन्य घरेलू खर्चों पर असर पड़ना तय है।

सेहत या जेब?

केंद्र सरकार का यह फैसला साफ संदेश देता है कि अब सिगरेट पीना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि आर्थिक रूप से भी आत्मघाती साबित होगा। सरकार का 'उत्पाद शुल्क संशोधन बिल 2025' देश में एक बड़े सामाजिक बदलाव की नींव रख सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह महंगाई वाकई लोगों को तंबाकू छोड़ने पर मजबूर करती है या फिर यह केवल अवैध व्यापार को बढ़ावा देने का माध्यम बनती है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।