Ghatshila Illegal Mining: प्रशासन की नाक के नीचे हाईवे पर धड़ल्ले से दौड़ रहे अवैध पत्थर लदे वाहन!

गालूडीह थाना क्षेत्र में प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद हाईवे पर अवैध पत्थर लदे हाइवा का संचालन धड़ल्ले से जारी है। सरकार को राजस्व की क्षति, पर्यावरण पर संकट और अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल!

Feb 27, 2025 - 19:46
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Ghatshila Illegal Mining: प्रशासन की नाक के नीचे हाईवे पर धड़ल्ले से दौड़ रहे अवैध पत्थर लदे वाहन!
Ghatshila Illegal Mining: प्रशासन की नाक के नीचे हाईवे पर धड़ल्ले से दौड़ रहे अवैध पत्थर लदे वाहन!

गालूडीह थाना क्षेत्र में प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद अवैध पत्थर लदे हाइवा बेखौफ होकर हाईवे पर दौड़ रहे हैं। दिन के उजाले में ही अवैध खनन के पत्थर क्रशरों तक बेरोकटोक पहुंचाए जा रहे हैं और प्रशासनिक अधिकारी सबकुछ जानते हुए भी चुप्पी साधे बैठे हैं!

कैसे चल रहा है यह अवैध कारोबार?
सरकार को हो रहा करोड़ों का नुकसान, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या इसमें प्रशासन की मिलीभगत है?

अवैध खनन से कैसे हो रहा बड़ा नुकसान?

झारखंड में खनिज संपदा का अंधाधुंध दोहन कोई नई बात नहीं है। लेकिन जिस तरह गालूडीह हाईवे पर प्रशासन की नाक के नीचे अवैध खनन का खेल चल रहा है, वह बेहद चौंकाने वाला है।

राजस्व को भारी नुकसान: अवैध खनन से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है।
पर्यावरण पर खतरा: पहाड़ों को लगातार काटे जाने से आसपास के इलाकों का पर्यावरण असंतुलित हो रहा है।
पेड़-पौधे हो रहे नष्ट: पत्थरों के उत्खनन से वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता खतरे में है।
सड़क दुर्घटनाओं का खतरा: बिना किसी निगरानी के दौड़ते ये ओवरलोडेड हाइवा सड़क पर बड़े हादसों को न्योता दे रहे हैं।

इतिहास में झारखंड का अवैध खनन

झारखंड में खनिज संपदा का अवैध दोहन कोई नई बात नहीं है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में कोयला, लौह अयस्क और पत्थरों का अवैध खनन लंबे समय से माफियाओं के कब्जे में रहा है।

2017 में भी कोडरमा और गिरिडीह में अवैध माइका खनन का बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें प्रशासन की संलिप्तता पाई गई थी।
2019 में साहेबगंज में गंगा नदी से अवैध बालू खनन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ था।
2023 में धनबाद में कोयले की अवैध ढुलाई के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद यह कारोबार आज भी जारी है।

प्रशासनिक मिलीभगत या लापरवाही?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हाईवे पर दिनदहाड़े अवैध पत्थरों से लदे वाहन दौड़ रहे हैं, तो प्रशासन की नजर से यह कैसे बच सकता है?

क्या अधिकारी इस खेल में शामिल हैं?
क्या बड़े खनन माफिया को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है?
क्या कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होगी?

अब क्या होगा?

गालूडीह में चल रहे इस खनन माफिया के गोरखधंधे को लेकर स्थानीय लोगों में भी रोष बढ़ता जा रहा है। अगर जल्द ही प्रशासन सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो यह मामला बड़ा आंदोलन बन सकता है।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस अवैध कारोबार पर कब तक आंखें मूंदे बैठी रहती है या फिर कोई ठोस कार्रवाई होती है?

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Nihal Ravidas निहाल रविदास, जिन्होंने बी.कॉम की पढ़ाई की है, तकनीकी विशेषज्ञता, समसामयिक मुद्दों और रचनात्मक लेखन में माहिर हैं।