Jharkhand Fraud: शिक्षक भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, 9 साल से मुन्ना भाई सरकारी नौकरी पर!
झारखंड के सरायकेला जिले में फर्जी डिग्री के सहारे 9 साल से नौकरी कर रहे एक शिक्षक का पर्दाफाश हुआ है। शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर, क्या होगी कार्रवाई? पढ़ें पूरी खबर।

झारखंड का शिक्षा विभाग अक्सर अपनी अजीबो-गरीब कार्यशैली के कारण सुर्खियों में रहता है। इस बार मामला सरायकेला जिले के राजनगर प्रखंड का है, जहां एक फर्जी डिग्रीधारी मुन्ना भाई पूरे 9 साल से सरकारी शिक्षक की नौकरी कर रहा है, और शिक्षा विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी!
2016 में शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान इस शख्स ने अपना नाम बदलकर सरकारी नौकरी हथिया ली और तब से लेकर अब तक तनख्वाह भी डकारता रहा। इससे भी बड़ी बात यह है कि इस मुन्ना भाई का रसूख इतना तगड़ा है कि नीचे से ऊपर तक के अधिकारी इसकी पहुंच में हैं।
कैसे पकड़ा गया फर्जी शिक्षक?
यह मामला तब सामने आया जब हमारी टीम जांच के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय पहुंची। पहले तो अधिकारियों को कुछ पता ही नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे सच्चाई सामने आई, सभी सन्न रह गए।
नाम बदला, खेल शुरू!
2005 से 2015 तक इस शख्स ने बाउरी बंधु महतो के नाम से प्रखंड संसाधन सेवी के रूप में काम किया।
2016 में शिक्षक बहाली हुई और बाउरी बंधु महतो का कोई अता-पता नहीं चला।
अब वही शख्स प्रशांत कुमार महतो के नाम से उत्क्रमित मध्य विद्यालय बनकाटी में सहायक शिक्षक बनकर काम कर रहा है।
यानी 9 साल से इस मुन्ना भाई ने शिक्षा विभाग को बेवकूफ बना रखा है!
फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क?
जांच में यह भी सामने आया कि प्रशांत कुमार महतो सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि पूरा एजुकेशन माफिया है। उसके पास हर सरकारी विभाग की सील और लेटरपेड उपलब्ध हैं। वह न केवल फर्जी डिग्री बनाता है, बल्कि मैट्रिक और इंटर पास कराने का भी दावा करता है।
अधिकारियों की मिलीभगत?
सवाल उठता है कि 9 साल तक यह गड़बड़ी शिक्षा विभाग से छिपी कैसे रही?
क्या जिला शिक्षा अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी?
क्या यह पूरा खेल किसी बड़े गिरोह के संरक्षण में हो रहा था?
अब तक इस शिक्षक को वेतन कैसे मिलता रहा?
अब क्या होगा?
जिला शिक्षा अधीक्षक कैलाश मिश्रा ने पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की बात कही है। लेकिन सवाल यही है – क्या सिर्फ जांच के नाम पर फाइल दबा दी जाएगी या इस मुन्ना भाई पर सख्त एक्शन लिया जाएगा?
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है!
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