Ghatshila Byelection : घाटशिला उपचुनाव के लिए 'वोटिंग मशीन' का रहस्य, 390 CU और 420 VVPAT का बंटवारा, ईवीएम सेकंड रेंडमाइजेशन में क्या बड़ा हुआ
घाटशिला विधानसभा उपचुनाव 2025 के लिए ईवीएम का द्वितीय रेंडमाइजेशन क्यों किया गया? क्या आप जानते हैं कि 300 मतदान केंद्रों के लिए 390 कंट्रोल यूनिट और 420 वीवीपैट क्यों आवंटित किए गए? सामान्य प्रेक्षक श्रीमती राखी विश्वास और जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री कर्ण सत्यार्थी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को कौन सी प्रक्रिया समझाई? झारखंड में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह कदम क्यों जरूरी है? पूरी जानकारी पढ़ें!
जमशेदपुर, 30 अक्टूबर 2025 – घाटशिला (अजजा) विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजर आज पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे 11 नवंबर 2025 को होने वाले मतदान की निष्पक्षता पूरी तरह से सुनिश्चित हो जाएगी। सामान्य प्रेक्षक श्रीमती राखी विश्वास और जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री कर्ण सत्यार्थी द्वारा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ईवीएम (EVM) का द्वितीय रेंडमाइजेशन किया गया। यह प्रक्रिया केवल मशीनों का बंटवारा नहीं थी, बल्कि यह झारखंड में चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता की कड़ी का एक अहम हिस्सा है।
द्वितीय रेंडमाइजेशन का रहस्य: क्यों जरूरी था यह कदम
द्वितीय रेंडमाइजेशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कौन सी वोटिंग मशीन किस मतदान केंद्र पर जाएगी, इसकी जानकारी किसी को पहले से न हो। इससे चुनावी धांधली की किसी भी आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
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पारदर्शिता बढ़ी: समाहरणालय सभागार में रेंडमाइजेशन से पूर्व सभी राजनीतिक दलों को इसकी पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाकर विश्वास में लिया गया। यह पारदर्शिता ही भारतीय चुनाव प्रणाली की सबसे बड़ी शक्ति है।
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बूथवार आवंटन: इस चरण में घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के कुल 300 मतदान केंद्रों की संख्या के अनुसार बूथवार ईवीएम का आवंटन किया गया।
झारखंड सहित पूरे देश में ईवीएम और वीवीपैट का उपयोग चुनावों को अधिक निष्पक्ष बनाने के लिए किया जाता है। ईवीएम के रेंडमाइजेशन का इतिहास यह दिखाता है कि यह किसी भी मशीन के गलत इस्तेमाल की आशंका को खत्म करने के लिए एक कुशल तकनीकी उपाय है।
300 केंद्रों के लिए 390 CU और 420 VVPAT: इतनी ज्यादा मशीनें क्यों?
रेंडमाइजेशन के दौरान आवंटित मशीनों की संख्या भी कई सवाल खड़े करती है, जिसका जवाब चुनाव आयोग की तैयारियों में छिपा है।
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अतिरिक्त आरक्षण: कुल 300 मतदान केंद्रों के लिए आरक्षित मशीनों को मिलाकर 390 बैलट यूनिट (BU), 390 कंट्रोल यूनिट (CU) एवं 420 वीवीपैट (VVPAT) का आवंटन किया गया है।
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तैयारी का स्तर: यह अतिरिक्त मशीनें (आरक्षित) किसी भी मतदान केंद्र पर तकनीकी खराबी आने पर तुरंत ईवीएम को बदलने के लिए रखी गई हैं। विशेषकर वीवीपैट की संख्या सबसे अधिक (420) रखी गई है, क्योंकि यह सबसे संवेदनशील इकाई होती है।
वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद: सफल आयोजन का प्रयास
इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जो निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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उपस्थित अधिकारी: निर्वाची पदाधिकारी सह एसडीओ घाटशिला श्री सुनील चंद्र, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती प्रियंका सिंह समेत ईवीएम कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी मो. मोजाहिद अंसारी आदि उपस्थित थे।
अब इन आवंटित ईवीएम को मतदान से पहले सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा और फिर 11 नवंबर 2025 को मतदान केंद्रों पर भेजा जाएगा। यह द्वितीय रेंडमाइजेशन यह भरोसा दिलाता है कि घाटशिला उपचुनाव पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र माहौल में संपन्न होगा।
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