Finance Appointment: Tuhin Kanta Pandey बने SEBI के नए प्रमुख, सरकार ने फिर ब्यूरोक्रेसी पर जताया भरोसा!
भारत सरकार ने वित्त सचिव तुहिन कांता पांडे को SEBI का नया अध्यक्ष नियुक्त किया। जानिए, उनके कार्यकाल से भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा और क्या SEBI में बड़े बदलाव होने वाले हैं?

नई दिल्ली: भारत सरकार ने वित्त सचिव तुहिन कांता पांडे को Securities and Exchange Board of India (SEBI) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तीन वर्षों के लिए होगी, जो भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। SEBI प्रमुख का पदभार ग्रहण करने वाले पांडे नौकरशाही से आने वाले दूसरे बड़े अधिकारी हैं, जो यह दर्शाता है कि सरकार अब भी ब्यूरोक्रेसी पर ज्यादा भरोसा कर रही है।
लेकिन सवाल यह है कि –
सरकार ने प्राइवेट सेक्टर से किसी को क्यों नहीं चुना?
पांडे की नियुक्ति से SEBI और भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
माधबी पुरी बुच के कार्यकाल में उठे विवादों के बाद यह नियुक्ति कितना अहम है?
आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं।
तुहिन कांता पांडे: कौन हैं SEBI के नए मुखिया?
तुहिन कांता पांडे एक 1987 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं, जो ओडिशा कैडर से आते हैं। उन्होंने सितंबर 2024 में वित्त सचिव का पदभार संभाला था। इससे पहले, वे DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) के सचिव रह चुके हैं और एयर इंडिया की बिक्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
शिक्षा:
पांडे ने अर्थशास्त्र (Economics) में मास्टर डिग्री और MBA किया है।
उन्हें आर्थिक नीतियों और सरकारी वित्त प्रबंधन का गहरा अनुभव है।
महत्वपूर्ण भूमिका:
उन्होंने बजट 2025 से पहले राजस्व सचिव के रूप में भी कार्य किया था, जहां उन्होंने आयकर राहत उपायों और नए टैक्स बिल की रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
क्यों खास है SEBI प्रमुख की यह नियुक्ति?
SEBI प्रमुख की नियुक्ति Financial Sector Regulatory Appointments Search Committee (FSRASC) की सिफारिश पर की जाती है। इस बार भी सरकार ने एक IAS अधिकारी को नियुक्त करके नौकरशाही पर अपना भरोसा बनाए रखा है।
पिछले SEBI प्रमुख कौन थे?
माधबी पुरी बुच, जो SEBI की पहली महिला प्रमुख थीं, का कार्यकाल 2 मार्च 2022 को शुरू हुआ था और उनका तीन साल का कार्यकाल 28 फरवरी 2025 को समाप्त हो रहा है। वे पहली ऐसी व्यक्ति थीं जो प्राइवेट सेक्टर से SEBI प्रमुख बनी थीं।
क्या हुआ प्राइवेट सेक्टर के उम्मीदवारों का?
SEBI प्रमुख पद के लिए प्राइवेट सेक्टर के उम्मीदवारों पर भी विचार किया गया था, लेकिन अंततः IAS अधिकारी को ही चुना गया।
SEBI का नया चेहरा, भारतीय बाजार पर क्या असर?
तुहिन कांता पांडे की नियुक्ति से संकेत मिलता है कि सरकार भारतीय पूंजी बाजार को नियंत्रित करने के लिए अनुभवशील और विश्वसनीय प्रशासकों को ही तवज्जो दे रही है।
माधबी पुरी बुच: उनके कार्यकाल में क्या हुआ?
माधबी पुरी बुच के तीन साल के कार्यकाल में SEBI ने बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई बड़े फैसले लिए।
उनके अहम फैसले:
इक्विटी इंडेक्स डेरिवेटिव फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए 6 बड़े सुधार किए।
"फिनफ्लुएंसर्स" (Finfluencers) पर सख्त कार्रवाई की।
नए एसेट क्लास (asset class) की शुरुआत की।
हालांकि, उनके कार्यकाल में कुछ विवाद भी उठे।
अगस्त 2024 में अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की सिंगापुर स्थित कंपनियों के जरिए अदाणी समूह से संबंध थे।
हालांकि, बुच दंपति ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया था।
क्या तुहिन कांता पांडे के सामने चुनौतियां होंगी?
बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
"फिनफ्लुएंसर्स" और गैर-विनियमित गतिविधियों पर सख्ती बरकरार रखना।
भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाना।
निष्कर्ष: ब्यूरोक्रेसी की जीत या नई शुरुआत?
SEBI प्रमुख के रूप में तुहिन कांता पांडे की नियुक्ति यह दिखाती है कि सरकार भारतीय पूंजी बाजार को नियंत्रित करने के लिए नौकरशाही के अनुभव पर भरोसा कर रही है।
क्या प्राइवेट सेक्टर को नजरअंदाज किया गया?
क्या पांडे बुच की बनाई नीतियों को जारी रखेंगे या कुछ नया करेंगे?
क्या SEBI में और बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे?
ये सवाल अब भारतीय बाजार से जुड़े हर निवेशक के दिमाग में हैं। तुहिन कांता पांडे के फैसले यह तय करेंगे कि SEBI भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में कितना सफल होता है।
What's Your Reaction?






