Dhanbad Exam Scam: SSC CGL में ऑटोमेटिक आंसर टिक होने का खुलासा, पटना कनेक्शन से हड़कंप
धनबाद SSC CGL परीक्षा में नकल का हाई-टेक तरीका पकड़ा गया। माउस हाथ में था लेकिन कंप्यूटर खुद-ब-खुद जवाब टिक कर रहा था। पुलिस ने आरोपी को जेल भेजा और पटना नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
झारखंड के धनबाद में आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (SSC CGL 2025) में जो खुलासा हुआ है, उसने परीक्षा प्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। तीसरी पाली की परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी को नकल करते रंगे हाथ पकड़ा गया। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसके हाथ में माउस था और कंप्यूटर पर उत्तर अपने आप टिक हो रहे थे।
कैसे पकड़ा गया नकल का खेल
26 सितंबर को बरवाअड्डा थाना क्षेत्र स्थित गोल्डन कैंप, कुर्मीडीह सेंटर में परीक्षा चल रही थी। ड्यूटी पर मौजूद दंडाधिकारी महादेव गोराई ने देखा कि 24 वर्षीय अभ्यर्थी आइके गुजराल, निवासी पटना, संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त है। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और आरोपी को पकड़ लिया गया।
पटना से जुड़ा बड़ा नेटवर्क
पूछताछ में आरोपी ने जो राज खोला, उसने पूरे मामले का रुख बदल दिया। उसने बताया कि यह खेल पटना में बैठकर रचा गया था। इसमें रौशन कुमार, सचिन कुमार (राजेंद्र नगर, पटना निवासी) और एजुकीटी करियर टेक्नोलॉजीज कंपनी का नाम सामने आया। कंपनी का कर्मचारी राक्सन रहमान तकनीकी हैकिंग में शामिल था।
यानी, यह सिर्फ एक छात्र की हरकत नहीं थी, बल्कि एक संगठित गैंग की साजिश थी जो अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर सरकारी परीक्षाओं में धांधली कराता है।
पुलिस की जांच और एजेंसियों की नजर
बरवाअड्डा थाना ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया है। अब जांच की जिम्मेदारी मुख्यालय डीएसपी शंकर कामती को दी गई है। पुलिस आरोपी की कॉल डिटेल्स, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेस खंगाल रही है।
इसी के साथ, जिस इन्फिनिटी डिजिटल जोन में परीक्षा हुई, उसके रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि सिस्टम को तकनीकी तरीके से हैक कर ऑटो-टिकिंग की व्यवस्था की गई थी।
एसपी सिटी ऋत्विक श्रीवास्तव ने बताया कि इस केस की जानकारी केंद्रीय एजेंसियों और SSC तक पहुंचा दी गई है।
शिक्षा माफिया का इतिहास
भारत में सरकारी परीक्षाओं में धांधली का लंबा इतिहास रहा है।
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2013 का व्यापम घोटाला आज भी लोगों की यादों में ताजा है।
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बिहार और झारखंड में पहले भी परीक्षा माफिया सक्रिय रहे हैं, जो तकनीकी और नेटवर्किंग के जरिये छात्रों से लाखों रुपये वसूलते हैं।
यह ताजा मामला भी उसी पैटर्न का हिस्सा लगता है, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल कर नकल को हाई-टेक बनाया गया है।
पूरे नेटवर्क का खुलासा जल्द
पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस गिरोह के तार पटना ही नहीं, बल्कि अन्य शहरों तक फैले हो सकते हैं। यह नेटवर्क अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देता है।
पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस गैंग का पूरा भंडाफोड़ होगा और कई बड़े चेहरे सामने आएंगे।
धनबाद SSC CGL परीक्षा में हुआ यह नकल कांड सिर्फ एक परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गहरी चोट है।
अब सवाल यह है कि जब परीक्षा केंद्र में कंप्यूटर तक को हैक किया जा सकता है, तो छात्रों की मेहनत और देश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाएं कितनी सुरक्षित हैं?
पुलिस और एजेंसियों के लिए यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा माफिया नेटवर्क को बेनकाब करने की चुनौती है।
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