Chandil Elephant Attack: गजराज ने किया शहर में कोहराम, मंदिर से घर तक मचाया तांडव!
चांडिल में दलमा सेंचुरी से भटककर आए एक विशाल हाथी ने मंदिर और घरों में मचाया कोहराम। मुख्यमंत्री के मामा के घर में घुसकर तोड़ा दरवाजा, अनाज खा गया और कार भी तोड़ डाली। पढ़ें पूरी खबर!

चांडिल: भोजन की तलाश में भटकता एक विशालकाय हाथी मंगलवार सुबह चांडिल के शहरी इलाके में घुस आया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी के गज परियोजना से अलग होकर यह हाथी पहले चांडिल बाजार पहुंचा और फिर सीधे दुर्गा मंदिर में घुस गया। यहां उसने मंदिर के गेट और चहारदीवारी को तहस-नहस कर दिया। यही नहीं, इस गजराज ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मामा गुरुचरण किस्कू के घर पर भी हमला बोल दिया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
गजराज का तांडव: मंदिर के बाद घर में मचाई तबाही
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार सुबह हाथी पहले चांडिल बाजार में देखा गया। इसके बाद यह दुर्गा मंदिर के परिसर में घुस गया और मंदिर के मुख्य द्वार और चहारदीवारी को तोड़ डाला। जब तक लोग कुछ समझ पाते, गजराज वहां से निकलकर गुरुचरण किस्कू के घर पहुंच गया। वहां उसने कमरे का दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसकर जन वितरण प्रणाली का अनाज चट कर गया। यही नहीं, घर में रखे अन्य सामानों को भी इधर-उधर बिखेर दिया।
हाथी के तांडव से घर का पूरा सामान तहस-नहस हो गया। इस दौरान बाहर खड़ी एक मारुति वैन भी इसकी चपेट में आ गई और क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है, क्योंकि हाल के दिनों में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है।
गजों का बढ़ता आतंक: क्यों बढ़ रही ऐसी घटनाएं?
झारखंड के जंगलों में हाथियों की बढ़ती गतिविधियां चिंता का विषय बन गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन और पानी की तलाश में हाथी अक्सर जंगल छोड़कर गांव और शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी, जहां यह हाथी रहता था, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में फैली हुई है। यह सेंचुरी हाथियों के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है, लेकिन मानव अतिक्रमण और वन क्षेत्रों के सिमटने के कारण गजराज अब इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं।
वन विभाग की कार्रवाई और स्थानीय लोगों में डर
गुरुचरण किस्कू ने मंगलवार सुबह इस घटना की जानकारी चांडिल वन क्षेत्र पदाधिकारी को दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि हाथी को जंगल की ओर वापस भेजने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। हालांकि, हाल के दिनों में ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में हाथियों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे स्थानीय लोग दहशत में हैं।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में हाथियों के हमले बढ़े हैं। 2017 में भी इसी तरह की एक घटना में एक जंगली हाथी ने रांची के आसपास कई घरों को नुकसान पहुंचाया था। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में भोजन की कमी, जल स्रोतों का सूखना और इंसानी दखल के कारण हाथी अब शहरों की ओर बढ़ रहे हैं।
क्या है समाधान?
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में बनाए रखने के लिए जंगलों में पर्याप्त भोजन और जल स्रोतों की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा, इंसानी बस्तियों और जंगलों के बीच बफर जोन बनाए जाने की जरूरत है ताकि हाथी और इंसानों के बीच टकराव को रोका जा सके।
चांडिल में हाथी के इस तांडव ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इंसानी दखल के कारण वन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास खत्म हो रहे हैं? जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक इंसानों और हाथियों के बीच इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी।
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