Chakradharpur Tragedy: दर्दनाक हादसा, नकटी डैम में पलटी डीजे गाड़ी, खाई में दबकर इकलौते बेटे की मौत, पिकनिक की खुशियां मातम में बदलीं
चक्रधरपुर के नकटी डैम में पिकनिक मनाकर लौट रहे युवकों की डीजे गाड़ी खाई में पलटने से 16 साल के श्रवण सिंह की जान चली गई है। परिवार के इकलौते चिराग के बुझने और जर्जर सड़क के उस जानलेवा मोड़ की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी पिकनिक स्पॉट पर छिपे इस 'खूनी रास्ते' के खतरे से अनजान रह जाएंगे।
चक्रधरपुर/कराइकेला, 5 जनवरी 2026 – साल की शुरुआत में जहाँ पूरा शहर जश्न में डूबा है, वहीं चक्रधरपुर के दंदासाई मोहल्ले में एक ऐसी खबर आई जिसने हर आँख नम कर दी। सोमवार की शाम नकटी डैम पिकनिक मनाने गए लड़कों के एक समूह के लिए 'काल' बनकर आई। पिकनिक से लौटते वक्त डीजे साउंड लदी एक गाड़ी ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर अनियंत्रित होकर गहरी खाई में पलट गई। इस खौफनाक हादसे में 16 वर्षीय किशोर श्रवण सिंह उर्फ लाला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वह गाड़ी के नीचे इस कदर दब गया था कि उसे बाहर निकालने में ही चीख-पुकार मच गई। यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गरीब मां के बुझते हुए आखिरी चिराग की दास्तां है।
खूनी मोड़: जर्जर सड़क ने ली मासूम की जान
हादसा कराइकेला थाना क्षेत्र के नकटी डैम के पास उस संकरे और खराब रास्ते पर हुआ, जहाँ अक्सर गाड़ियों का संतुलन बिगड़ जाता है।
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अनियंत्रित हुई गाड़ी: चश्मदीदों के अनुसार, चक्रधरपुर के वार्ड-5, दंदासाई से लड़कों का समूह डीजे गाड़ी के साथ पिकनिक मनाकर लौट रहा था। सड़क इतनी खराब थी कि भारी-भरकम डीजे साउंड का भार गाड़ी संभाल नहीं पाई और वह सीधे खाई में जा गिरी।
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मदद की गुहार: हादसे के वक्त श्रवण सिंह गाड़ी के पिछले हिस्से में बैठा था। जैसे ही गाड़ी पलटी, वह भारी मशीनों और लोहे के चेसिस के बीच दब गया। दोस्तों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला।
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अस्पताल में मातम: कराइकेला पुलिस ने अपनी गाड़ी से घायल श्रवण को अनुमंडल अस्पताल पहुँचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इतिहास का क्रूर मजाक: 5 साल पहले पिता, अब इकलौता बेटा
श्रवण सिंह के परिवार की कहानी रूह कंपा देने वाली है। इस परिवार पर दुखों का पहाड़ पहले भी टूट चुका है।
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पिता की यादें: करीब पांच साल पहले श्रवण के पिता दिलीप सिंह की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी।
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गरीबी और संघर्ष: पति की मौत के बाद श्रवण की मां दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर और काम करके अपने इकलौते बेटे को पाल रही थी। उसे उम्मीद थी कि श्रवण बड़ा होकर परिवार का सहारा बनेगा।
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उजड़ गया संसार: श्रवण की मौत के साथ ही उस मां का एकमात्र सहारा और जीने की वजह भी खत्म हो गई। दंदासाई मोहल्ले में आज चूल्हा तक नहीं जला है।
नकटी डैम सड़क हादसा: मुख्य विवरण (Tragedy Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| मृतक का नाम | श्रवण सिंह उर्फ लाला (16 वर्ष) |
| निवासी | दंदासाई, वार्ड संख्या-5, चक्रधरपुर |
| स्थान | नकटी डैम के पास, कराइकेला थाना |
| कारण | ऊबड़-खाबड़ सड़क और डीजे गाड़ी का असंतुलन |
| वर्तमान स्थिति | शव चक्रधरपुर रेल अस्पताल के शीतगृह में |
नकटी डैम का 'खूनी' इतिहास और खराब सड़कों का जाल
पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर का नकटी डैम एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। सर्दियों में यहाँ हजारों की संख्या में लोग पिकनिक मनाने पहुँचते हैं। लेकिन ऐतिहासिक रूप से, इस डैम तक पहुँचने वाले रास्ते हमेशा से उपेक्षित रहे हैं। यहाँ की सड़कें पथरीली और संकरी हैं, जिस पर लोडेड वाहन (खासकर डीजे वैन) ले जाना आत्महत्या के समान है। पिछले 3 वर्षों में इस रूट पर कम से कम 5 बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक सड़कों की मरम्मत या साइन बोर्ड लगाने की जहमत नहीं उठाई। श्रवण की मौत ने एक बार फिर उन 'डेथ ट्रैप' वाली सड़कों पर सवाल खड़ा कर दिया है जो खुशियां मनाने जाने वालों को कफन ओढ़ा रही हैं।
दंदासाई में मातम: मंगलवार को होगा अंतिम संस्कार
कराइकेला पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली है।
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पोस्टमार्टम: शव को फिलहाल चक्रधरपुर रेल अस्पताल के शीतगृह (Cold Storage) में रखा गया है। मंगलवार की सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
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प्रशासनिक लापरवाही: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पिकनिक सीजन में इन खतरनाक मोड़ों पर पुलिस बल या सुरक्षा निर्देश होते, तो शायद आज श्रवण अपने घर में होता।
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मुआवजे की मांग: मोहल्ले वासियों ने जिला प्रशासन से पीड़ित मां के लिए उचित मुआवजे की मांग की है, क्योंकि अब उसके पास भरण-पोषण का कोई रास्ता नहीं बचा है।
पिकनिक का शोर और मौत का सन्नाटा
श्रवण सिंह की मौत ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या मनोरंजन की चाहत में हम अपनी सुरक्षा को ताक पर रख रहे हैं? जर्जर सड़कें और नियमों के खिलाफ डीजे लदी गाड़ियां मौत का सामान बन रही हैं। दंदासाई का यह 'लाला' तो चला गया, लेकिन नकटी डैम का वो खूनी मोड़ अब भी अगले शिकार का इंतजार कर रहा है।
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