Baharagora Accident: एनएच-49 पर बेकाबू ट्रेलर ने बाइक सवारों को रौंदा, उछलकर सड़क पर गिरे बिक्रम और तारक, ओडिशा के बारीपदा रेफर
बहरागोड़ा के नेशनल हाईवे-49 पर बेकाबू ट्रेलर ने बाइक सवार बिक्रम और तारक मुंडा को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी है। लहूलुहान स्थिति में ओडिशा के बारीपदा रेफर किए जाने और एनएच पर मचे कोहराम की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
बहरागोड़ा/चाकुलिया, 7 अप्रैल 2026 – झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली लाइफलाइन नेशनल हाईवे-49 (NH-49) एक बार फिर खून से लाल हो गई है। मंगलवार की शाम बहरागोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत ‘बाला एंड संस’ कंपनी के समीप एक अनियंत्रित ट्रेलर ने बाइक सवार दो युवकों को पीछे से ऐसी टक्कर मारी कि दोनों सड़क पर करीब 15 फीट दूर जाकर गिरे। इस भीषण हादसे में बरसोल के दो युवक मौत से जंग लड़ रहे हैं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और नेशनल हाईवे पर घंटों तक चीख-पुकार मची रही। प्रशासन और रफ़्तार के इस जानलेवा गठजोड़ ने एक बार फिर बहरागोड़ा के लोगों को दहशत में डाल दिया है।
घर वापसी और मौत का साया: ट्रेलर ने पीछे से मारी टक्कर
मंगलवार की शाम जब ट्रैफिक का दबाव सबसे ज्यादा था, तभी यह खौफनाक हादसा हुआ।
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सफर का अंत: बरसोल थाना क्षेत्र के गुरूसाई गांव निवासी बिक्रम मुंडा (25) और तारक मुंडा (38) बहरागोड़ा बाजार से काम निपटाकर अपने गांव लौट रहे थे।
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बेकाबू रफ़्तार: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एनएच-49 पर पीछे से आ रहे एक भारी-भरकम ट्रेलर ने बिना ब्रेक लगाए बाइक को अपनी चपेट में ले लिया।
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लहूलुहान मंजर: टक्कर के बाद बिक्रम और तारक सड़क के बीचो-बीच गिरकर तड़पने लगे। सिर और हाथ-पैर में गंभीर चोटों के कारण सड़क पर खून का सैलाब उमड़ पड़ा।
बहरागोड़ा से ओडिशा तक: सांसों की जद्दोजहद
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश की और बचाव कार्य शुरू किया।
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सीएचसी में इलाज: घायलों को तत्काल एम्बुलेंस से बहरागोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लाया गया। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा।
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हालत चिंताजनक: प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने स्पष्ट कर दिया कि दोनों की अंदरूनी चोटें काफी गहरी हैं। बहरागोड़ा में पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण उनकी स्थिति बिगड़ती जा रही थी।
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बारीपदा रेफर: बेहतर न्यूरो और ट्रॉमा केयर के लिए बिक्रम और तारक को पड़ोसी राज्य ओडिशा के पीआरएम मेडिकल कॉलेज, बारीपदा रेफर कर दिया गया है। फिलहाल दोनों की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
भारी वाहनों का दबाव और असुरक्षित सफर
बहरागोड़ा का एनएच-49 ऐतिहासिक रूप से दक्षिण-पूर्वी भारत के व्यापार का मुख्य केंद्र रहा है, लेकिन अब यह 'डेथ ज़ोन' बनता जा रहा है।
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ट्रेलर और ट्रक का हब: टाटा-खड़गपुर और उड़ीसा को जोड़ने वाला यह मार्ग 24 घंटे भारी वाहनों से भरा रहता है। 'बाला एंड संस' कंपनी के समीप का यह इलाका अक्सर तेज रफ़्तार ट्रेलर चालकों की लापरवाही का गवाह बनता है।
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डिवाइडर और लाइटिंग की कमी: स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के बाद भी इस मार्ग पर पर्याप्त लाइटिंग और संकेतों की कमी है, जिससे रात के समय बाइक सवारों के लिए सफर करना मौत को दावत देने जैसा है।
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बहरागोड़ा का भौगोलिक महत्व: बहरागोड़ा झारखंड का अंतिम छोर है, जहाँ से इलाज के लिए अक्सर जमशेदपुर की तुलना में ओडिशा का बारीपदा करीब पड़ता है। यही कारण है कि गंभीर हादसों के बाद मरीजों को दूसरे राज्य भेजने की मजबूरी यहाँ का कड़वा सच है।
पुलिस की कार्रवाई: ट्रेलर और चालक की तलाश
घटना की सूचना मिलते ही बहरागोड़ा और बरसोल पुलिस की टीम मौके पर पहुँची।
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ट्रेलर हुआ फरार: हादसे के बाद चालक ट्रेलर लेकर भागने में सफल रहा। पुलिस ने आसपास के ढाबों और टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं ताकि वाहन की पहचान की जा सके।
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आक्रोशित ग्रामीण: हादसे से गुस्साए ग्रामीणों ने मांग की है कि इस ब्लैक स्पॉट पर गति अवरोधक और पुलिस पिकेट की व्यवस्था की जाए।
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पारिवारिक संकट: गुरूसाई गांव में बिक्रम और तारक के परिवारों में मातम छाया हुआ है। गांव के लोग उनके जल्द स्वस्थ होकर लौटने की दुआएं मांग रहे हैं।
बहरागोड़ा में हुई यह वारदात रफ़्तार और प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा है। एनएच-49 पर बाइक चलाना अब सुरक्षित नहीं रह गया है। बिक्रम और तारक मुंडा की जान फिलहाल बारीपदा के डॉक्टरों के हाथों में है, लेकिन यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि कब तक भारी वाहनों की रफ़्तार मासूमों का खून बहाती रहेगी। पुलिस की जांच जारी है, लेकिन हाईवे का खौफ बरकरार है।
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