Baharagora Lightning: तालाब में नहाने के दौरान बिजली गिरने से राजमिस्त्री की मौत
बहरागोड़ा की मानुषमुड़िया पंचायत में तालाब में नहाने गए बुजुर्ग राजमिस्त्री सापू इस्लाम पर आसमानी बिजली गिरने से मौत हो गई है। 15 वर्षों से यहाँ रह रहे परिवार में मचे कोहराम की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
बहरागोड़ा/जमशेदपुर, 16 मई 2026 – झारखंड में इन दिनों मौसम का मिजाज जानलेवा बना हुआ है। राँची मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी किए गए भारी वज्रपात के अलर्ट के बीच पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मानुषमुड़िया पंचायत के कालाबांध तालाब में बीते शुक्रवार की शाम एक बुजुर्ग राजमिस्त्री पर आसमानी आफत (ठनका) काल बनकर टूटी। इस दर्दनाक हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है।
वारदात की दास्तां: काम खत्म कर नहाने गए थे तालाब, अचानक गिरा ठनका
यह हृदय विदारक घटना शुक्रवार की देर शाम घटित हुई, जब आसमान में अचानक काले बादलों ने डेरा डाल दिया था।
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शाम का वो आखिरी वक्त: 58 वर्षीय सापू इस्लाम रोज की तरह दिन भर मेहनत-मजदूरी और राजमिस्त्री का काम खत्म कर शाम को घर लौटे थे। इसके बाद वे हाथ-पैर धोने और नहाने के लिए गांव के ही कालाबांध तालाब गए।
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पलक झपकते ही सब खत्म: सापू इस्लाम अभी तालाब में नहा ही रहे थे कि अचानक तेज गर्जना के साथ आसमानी बिजली सीधे उन पर आ गिरी। वज्रपात का झटका इतना जोरदार था कि उन्हें संभलने का एक पल भी नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी सांसें थम गईं।
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मातम में बदला घर: जब काफी देर तक वह घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने तलाश शुरू की। तालाब के पास उनका शव मिलते ही चीख-पुकार मच गई।
पलायन का दर्द: 15 साल पुराना आशियाना उजड़ा, पैतृक गांव रवाना हुआ शव
सापू इस्लाम की मौत केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि एक पूरे प्रवासी परिवार के संघर्ष का अंत है।
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मुर्शिदाबाद से नाता: सापू इस्लाम मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले थे।
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आजीविका का सफर: बेहतर जिंदगी और काम की तलाश में वह करीब 15 साल पहले बहरागोड़ा के मानुषमुड़िया आए थे। अपनी ईमानदारी और हुनर के दम पर उन्होंने यहाँ राजमिस्त्री (Mason) के रूप में अच्छी पहचान बनाई थी।
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अंतिम यात्रा: शनिवार को अत्यंत गमगीन और भावुक माहौल में मृतक के परिजन उनके पार्थिव शरीर को लेकर पैतृक गांव मुर्शिदाबाद के लिए रवाना हो गए। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों की आंखें भी नम थीं, क्योंकि सापू पिछले डेढ़ दशक से इसी समाज का हिस्सा बन चुके थे।
चेतावनी के बावजूद सुरक्षा के इंतजाम अधूरे
सापू इस्लाम का जाना हमें एक बार फिर सचेत करता है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को हल्के में लेना कितना भारी पड़ सकता है। वर्तमान में पूरा कोल्हान और झारखंड चक्रवातीय हवाओं और लो-प्रेशर की चपेट में है। ऐसे में प्रशासन लगातार अपील कर रहा है कि बादलों की गड़गड़ाहट सुनते ही सुरक्षित स्थानों (पक्के मकानों) में शरण लें और जलाशयों से तुरंत दूर हट जाएं। सापू इस्लाम के परिजनों के लिए यह एक ऐसा घाव है जो कभी नहीं भरेगा, क्योंकि घर चलाने वाला मुखिया अब इस दुनिया में नहीं है।
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