Baharagora Attack: हाथी के कहर से गांव में हड़कंप, जंगल में छिपा मौत का खतरा!

बहरागोड़ा में हाथी के हमले से एक ग्रामीण की दर्दनाक मौत। गांव में दहशत का माहौल, वन विभाग पर मुआवजे और हाथी को हटाने का दबाव। जानें पूरी खबर!

Mar 3, 2025 - 15:22
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Baharagora Attack: हाथी के कहर से गांव में हड़कंप, जंगल में छिपा मौत का खतरा!
Baharagora Attack: हाथी के कहर से गांव में हड़कंप, जंगल में छिपा मौत का खतरा!

बहरागोड़ा: झारखंड के बहरागोड़ा प्रखंड में हाथी का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को पाथरी पंचायत के बामनडीह और गोहालडीह गांव के बीच एक जंगली हाथी ने अचानक हमला कर दिया, जिससे जेनाडाही गांव निवासी मंगलू नायक की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

घटनास्थल पर पसरा सन्नाटा, दहशत में ग्रामीण

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलू नायक खेतों की ओर गए थे, तभी जंगल से निकले गजराज ने उन पर हमला कर दिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, तब तक हाथी ने उन्हें कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम छा गया। स्थानीय मुखिया तड़ित मुंडा ने जानकारी दी कि वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मृतक का शव घटनास्थल पर ही पड़ा हुआ था।

गांव के पास ही छिपा है हाथी, दहशत बरकरार

गांव के नजदीक जंगल में हाथी के छिपे होने की खबर ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर वन विभाग जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो यह हाथी किसी और के लिए भी खतरा बन सकता है। लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और खेती-किसानी का काम भी प्रभावित हो रहा है।

मुआवजे की मांग और प्रशासन की सुस्ती

ग्रामीणों ने वन विभाग से मृतक के परिवार को जल्द से जल्द मुआवजा देने और हाथी को गांव से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर भेजने की मांग की है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी अब तक कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रहे हैं।

झारखंड में हाथियों का आतंक क्यों बढ़ रहा है?

झारखंड और आसपास के इलाकों में हाथियों का आतंक कोई नई बात नहीं है। जंगलों की कटाई, इंसानी बस्तियों के विस्तार और भोजन-पानी की कमी के कारण हाथी अक्सर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में हर साल 50 से ज्यादा लोग हाथियों के हमले में जान गंवाते हैं।

अब आगे क्या?

ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग जल्द कार्रवाई करे और प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा मिले। प्रशासन को चाहिए कि हाथियों के हमलों को रोकने के लिए फॉरेस्ट सर्विलांस टीम तैनात करे और जंगलों में हाथियों के लिए पर्याप्त भोजन-पानी की व्यवस्था करे, ताकि ऐसे हमलों पर काबू पाया जा सके।

बहरागोड़ा में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर इंसान और वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। प्रशासन की लापरवाही के चलते ग्रामीण अब भी खौफ के साये में जी रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और वन विभाग कब तक नींद से जागते हैं और इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं।

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Nihal Ravidas निहाल रविदास, जिन्होंने बी.कॉम की पढ़ाई की है, तकनीकी विशेषज्ञता, समसामयिक मुद्दों और रचनात्मक लेखन में माहिर हैं।