Baharagoda Innovation: टीपीएस डीएवी स्कूल में 'बैगलेस डे' की अनोखी पहल, बच्चों के चेहरे पर खुशी की लहर!
टीपीएस डीएवी पब्लिक स्कूल, बहरागोड़ा में ‘बैगलेस डे’ की अनोखी शुरुआत! जानिए कैसे बच्चों को मिल रही है किताबों के बोझ से आज़ादी और सीखने को मिल रही हैं नई चीजें।

बहरागोड़ा: शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए टीपीएस डीएवी पब्लिक स्कूल, बहरागोड़ा ने ‘बैगलेस डे’ की शुरुआत की है। इस पहल का मकसद छात्रों को किताबों और भारी बैग के बोझ से कुछ दिनों के लिए आज़ादी देना और उन्हें खेल-कूद, कला, विज्ञान और योग जैसी गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ना है। यह आयोजन 27 मार्च 2025 तक चलेगा, जिसमें छात्र कई रोचक गतिविधियों में भाग लेकर अपने कौशल को निखारेंगे।
क्या है ‘बैगलेस डे’? बच्चों के लिए क्यों है यह खास?
‘बैगलेस डे’ एक अनूठी पहल है, जिसमें छात्रों को पारंपरिक कक्षाओं से हटकर एक अलग अनुभव दिया जाता है। इस दौरान बच्चे किताबों और होमवर्क के बजाय खेल, नृत्य, योग, कला, विज्ञान और आत्मरक्षा जैसे कौशल सीखते हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के मानसिक और शारीरिक विकास को संतुलित करना और उनकी रचनात्मकता व आत्मविश्वास को बढ़ाना है।
कैसे होती है ‘बैगलेस डे’ की शुरुआत?
टीपीएस डीएवी पब्लिक स्कूल में हर दिन की शुरुआत गीता पाठ और योगासन से होती है। इसके बाद छात्रों को विभिन्न गतिविधियों में शामिल किया जाता है, जिसमें प्रमुख रूप से कराटे, नृत्य, चित्रकला और विज्ञान से जुड़ी प्रयोगशालाएं शामिल हैं। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, यह गतिविधियां न केवल छात्रों को तनावमुक्त करती हैं, बल्कि उनके आत्मनिर्भरता और समस्या समाधान कौशल को भी बढ़ावा देती हैं।
शिक्षकों और प्राचार्य का संदेश, क्यों जरूरी है यह पहल?
स्कूल के प्राचार्य मुकेश कुमार ने ‘बैगलेस डे’ की शुरुआत पर छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा:
"आज के दौर में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखना सही नहीं है। हमें उन्हें व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ना होगा। इस आयोजन के जरिए बच्चे अपनी रचनात्मकता को समझेंगे और अपने अंदर छिपी प्रतिभा को पहचान सकेंगे। मैं सभी छात्रों से अपील करता हूं कि वे अधिक से अधिक गतिविधियों में भाग लें और इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं।"
बैग के बोझ से आज़ादी! बच्चों के चेहरे पर खुशी की लहर
आमतौर पर, बच्चे भारी-भरकम स्कूल बैग और पढ़ाई के दबाव से परेशान रहते हैं, लेकिन ‘बैगलेस डे’ के दौरान उनके चेहरे पर अलग ही खुशी देखने को मिली। बच्चे पूरे उत्साह के साथ कराटे सीख रहे हैं, कुछ विज्ञान प्रयोगों में रुचि दिखा रहे हैं तो कुछ नृत्य और चित्रकला में अपनी प्रतिभा उभार रहे हैं।
छात्र रवि कुमार ने कहा:
"हर दिन किताबों और होमवर्क का बोझ उठाने के बाद यह दिन बहुत खास लगता है। हमें कुछ नया सीखने और अपने पसंदीदा गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिल रहा है।"
छात्रा नेहा वर्मा ने भी अपनी राय दी:
"बैग के बिना स्कूल आना और नई चीजें सीखना बहुत मजेदार है। हमें खेल-कूद और आर्ट जैसी चीजों पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिल रहा है, जो आमतौर पर क्लास में संभव नहीं होता।"
क्या भारत में बढ़ेगा ‘बैगलेस डे’ का चलन?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बैगलेस डे’ जैसी पहल भारत के अन्य स्कूलों में भी अपनाई जानी चाहिए। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुसार, छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ना जरूरी है। कई विकसित देशों में भी प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग और हैंड्स-ऑन एक्टिविटीज को प्राथमिकता दी जा रही है।
टीपीएस डीएवी पब्लिक स्कूल की यह पहल बाकी स्कूलों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। अगर देशभर के स्कूल इस तरह की व्यवस्था लागू करें, तो बच्चों में सीखने की रुचि और कौशल दोनों विकसित किए जा सकते हैं।
‘बैगलेस डे’ न सिर्फ छात्रों के लिए राहत भरा दिन है, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए भी बेहद जरूरी पहल है। यह बच्चों को नई चीजें सीखने, अपनी रचनात्मकता को निखारने और शिक्षा को एक नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देता है। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पहल और अधिक स्कूलों में लागू होगी, जिससे छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जा सकेगा।
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