Saranda Strike: नक्सली मददगार, सारंडा के तेताई गांव में पुलिस की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, दबोचे गए दो शातिर सप्लायर
पश्चिमी सिंहभूम के जराइकेला में पुलिस ने नक्सलियों के रसद नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए मतियश तोपनो और आशीष जाते को गिरफ्तार कर लिया है। सारंडा के जंगलों में छिपे नक्सलियों तक राशन और आईईडी बनाने का सामान पहुँचाने वाले इन चेहरों की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ दी गई है वरना आप भी नक्सलियों के इस 'स्लीपर सेल' नेटवर्क की हकीकत से अनजान रह जाएंगे।
चाईबासा/जराइकेला, 3 जनवरी 2026 – झारखंड के 'अबूझमाड़' कहे जाने वाले सारंडा के घने जंगलों में नक्सलियों की कमर तोड़ने के लिए पश्चिमी सिंहभूम पुलिस ने एक और बड़ा दांव खेला है। एसपी अमित रेनू के निर्देश पर जराइकेला थाना पुलिस ने तेताई गांव में आधी रात को छापेमारी कर नक्सलियों के दो मुख्य मददगारों को दबोच लिया है। यह गिरफ्तारी केवल दो व्यक्तियों की नहीं है, बल्कि नक्सलियों के उस 'लाइफलाइन' नेटवर्क पर प्रहार है, जो उन्हें जंगलों के भीतर रसद और आईईडी (IED) जैसे घातक विस्फोटक बनाने का सामान पहुँचा रहा था। गिरफ्तार मतियश तोपनो और आशीष जाते के पास से पुलिस को कुछ ऐसे सामान मिले हैं, जो सारंडा में होने वाली बड़ी साजिशों की ओर इशारा करते हैं।
तेताई गांव में आधी रात का 'घेरा': जब नींद में दबोचे गए मददगार
पुलिस को काफी समय से सूचना मिल रही थी कि सारंडा के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों के लिए तेताई गांव से रसद (Logistics) की सप्लाई की जा रही है।
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गुप्त सूचना और जाल: जराइकेला थाना प्रभारी अमित पासवान को पक्की जानकारी मिली कि नक्सलियों के दो खास गुर्गे गांव में मौजूद हैं।
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सटीक ऑपरेशन: पुलिस टीम ने गुरुवार की देर रात पूरे गांव की घेराबंदी की। मतियश और आशीष को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे पुलिस की गिरफ्त में आ गए।
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बरामदगी ने उड़ाए होश: पकड़े गए आरोपियों के पास से न केवल नक्सलियों के लिए रखा राशन मिला, बल्कि आईईडी ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाले बिजली के तार और अन्य उपकरण भी बरामद हुए।
सारंडा की 'लाइफलाइन' पर चोट: मतियश और आशीष का कच्चा चिट्ठा
नक्सली समर्थक मतियश तोपनो और आशीष जाते लंबे समय से पुलिस की रडार पर थे। पुलिस जांच में कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
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रसद सप्लाई मास्टरमाइंड: ये दोनों गांव के सामान्य जीवन की आड़ में नक्सलियों के लिए चावल, दाल, दवाइयां और जूते जैसे जरूरी सामान जुटाते थे।
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आईईडी नेटवर्क: बरामद तारों से साफ है कि ये लोग नक्सलियों को विस्फोटक प्लांट करने के लिए तकनीकी सामान भी मुहैया करा रहे थे।
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न्यायिक हिरासत: कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस ने शुक्रवार को दोनों को कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
नक्सली समर्थक गिरफ्तारी: मुख्य विवरण (Action Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| गिरफ्तार मददगार | मतियश तोपनो और आशीष जाते |
| छापेमारी स्थल | तेताई गांव, जराइकेला थाना क्षेत्र |
| बरामद सामान | खाद्य सामग्री और IED के लिए इस्तेमाल होने वाले तार |
| मुख्य अधिकारी | अमित रेनू (SP), अमित पासवान (थाना प्रभारी) |
| कार्रवाई का क्षेत्र | सारंडा वन क्षेत्र (West Singhbhum) |
इतिहास और संघर्ष: सारंडा का सात पहाड़ियों वाला दुर्ग
पश्चिमी सिंहभूम का सारंडा वन क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से एशिया के सबसे घने साल के जंगलों के लिए जाना जाता है। 'सात सौ पहाड़ियों की भूमि' कहा जाने वाला यह इलाका दशकों से माओवादियों का गढ़ रहा है। 2010-11 के 'ऑपरेशन एनाकोंडा' से लेकर आज तक, पुलिस ने यहाँ नक्सलियों की जड़ें कमजोर करने के लिए कई बड़े अभियान चलाए हैं। नक्सलियों की रणनीति हमेशा से 'गांव के मददगारों' पर टिकी रही है, जो उनके लिए आंख और कान का काम करते हैं। तेताई जैसे सुदूर गांवों से मिलने वाली रसद ही उन्हें महीनों तक जंगलों में छिपने की ताकत देती है। मतियश और आशीष की गिरफ्तारी सारंडा में नक्सलियों के इसी सामरिक नेटवर्क (Logistics Backbone) को तोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
सर्च ऑपरेशन तेज: अब 'बड़े चेहरों' की बारी
पुलिस को अंदेशा है कि तेताई गांव में इन दोनों के अलावा और भी लोग नक्सलियों के स्लीपर सेल के रूप में काम कर रहे हैं।
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पूछताछ से मिले सुराग: मतियश और आशीष ने पूछताछ में सारंडा के भीतर छिपे कुछ बड़े नक्सली कमांडरों की लोकेशन और उनके सप्लाई रूट के बारे में जानकारी दी है।
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आगे की जांच: पुलिस की टीम अब उन दुकानदारों और स्रोतों की पहचान कर रही है, जहाँ से इतनी बड़ी मात्रा में रसद और आईईडी का तार खरीदा गया था।
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सुरक्षा बलों की तैनाती: जराइकेला और आसपास के संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि नक्सली किसी भी तरह के जवाबी हमले की कोशिश न कर सकें।
नक्सलियों के अंतिम गढ़ में पुलिस का प्रहार
जराइकेला पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब सारंडा के भीतर नक्सलियों के लिए छिपना और रसद जुटाना नामुमकिन होने वाला है। मतियश और आशीष का जेल जाना उन तमाम लोगों के लिए चेतावनी है जो कानून की नजरों से छिपकर देश विरोधी ताकतों की मदद कर रहे हैं।
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