Poet Remembrance : वीर रस और राष्ट्रचेतना के अमर कवि पं. श्याम नारायण पाण्डेय

वीर रस के महान कवि पंडित श्याम नारायण पाण्डेय की पुण्यतिथि पर उनकी कालजयी रचनाओं और उनके संघर्षपूर्ण जीवन की पूरी गाथा यहाँ मौजूद है। 'हल्दीघाटी' के रचयिता के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय और पाठ्यपुस्तकों से उनकी कविताओं को हटाए जाने का पूरा कड़वा सच विस्तार से पढ़िए वरना आप राष्ट्रचेतना के इस महानायक की यादों से चूक जाएंगे।

Jan 29, 2026 - 17:24
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Poet Remembrance : वीर रस और राष्ट्रचेतना के अमर कवि पं. श्याम नारायण पाण्डेय
Poet Remembrance : वीर रस और राष्ट्रचेतना के अमर कवि पं. श्याम नारायण पाण्डेय

नई दिल्ली/आजमगढ़, 29 जनवरी 2026 – हिंदी साहित्य के आकाश में जब भी शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रस्वाभिमान की बात होगी, पंडित श्याम नारायण पाण्डेय का नाम स्वर्ण अक्षरों में चमकता रहेगा। आज उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर में साहित्य प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। लेकिन इस स्मरण के साथ ही एक टीस भी उभरी है—क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को उस ओजस्वी स्वर से दूर कर रहे हैं जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सोए हुए भारत को जगाया था? 'हल्दीघाटी' और 'जौहर' जैसी रचनाओं के माध्यम से महाराणा प्रताप और रानी पद्मिनी के बलिदान को जीवंत करने वाले इस महाकवि की स्मृतियां आज भी हर देशभक्त के दिल में धड़क रही हैं।

आजमगढ़ से काशी तक: संघर्षों से तपा व्यक्तित्व

1910 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के डुमरांव गांव में जन्मे श्याम नारायण पाण्डेय का जीवन किसी महाकाव्य से कम नहीं रहा।

  • पितृ शोक और साधना: बचपन में ही पिता के साये से महरूम होने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने संस्कृत और हिंदी साहित्य का गहन अध्ययन किया।

  • आचार्य की उपाधि: अपनी विद्वत्ता के बल पर वे काशी के प्रतिष्ठित माधव संस्कृत महाविद्यालय में आचार्य पद पर आसीन हुए।

  • साहित्यिक ओज: उनकी लेखनी में वह ताकत थी कि जब वे मंच से कविता पढ़ते थे, तो श्रोताओं के रोंगटे खड़े हो जाते थे। उनके शब्द केवल शब्द नहीं, बल्कि युद्धभूमि में चलते हुए 'शस्त्र' प्रतीत होते थे।

हल्दीघाटी: वो कविता जिसने इतिहास रच दिया

1939 में जब पंडित जी ने ‘हल्दीघाटी’ की रचना की, तो मानों हिंदी साहित्य को उसका 'महाभारत' मिल गया।

  1. स्वतंत्रता का मंत्र: गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारत के लिए महाराणा प्रताप का शौर्य एक संजीवनी बनकर आया।

  2. युवाओं के प्रेरणास्रोत: स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों से लेकर सीमा पर खड़े सैनिकों तक, 'हल्दीघाटी' की पंक्तियां राष्ट्रचेतना का सबसे बड़ा हथियार बनीं।

  3. सजीव चित्रण: युद्धभूमि का ऐसा सजीव वर्णन शायद ही किसी अन्य आधुनिक कवि की लेखनी में मिलता हो।

पंडित श्याम नारायण पाण्डेय: साहित्य की अमर धरोहर (Literary Works)

काव्यग्रंथ विषय / रस महत्ता
हल्दीघाटी महाराणा प्रताप का शौर्य स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक
जौहर रानी पद्मिनी का बलिदान नारी शक्ति और स्वाभिमान
जय हनुमान भक्ति और शक्ति का संगम सांस्कृतिक गौरव
शिवाजी छत्रपति का पराक्रम राष्ट्रवाद की गूँज
आरती भक्ति और दर्शन आध्यात्मिक चेतना

इतिहास का पन्ना: जब कवि की निर्भीकता ने सत्ता को आईना दिखाया

पंडित श्याम नारायण पाण्डेय केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक युगदृष्टा थे। इतिहास गवाह है कि उन्होंने कभी भी सत्ता की चापलूसी (Sycophancy) नहीं की। उनके लिए वीरों के बलिदान स्थल ही सबसे बड़े तीर्थ थे। 1930 और 40 के दशक में जब कई साहित्यकार दरबारी संस्कृति की ओर झुक रहे थे, तब पाण्डेय जी ने आर्थिक अभावों को गले लगाना बेहतर समझा लेकिन अपनी लेखनी से समझौता नहीं किया। विडंबना देखिए कि जिस महाकवि ने 'तुमुल', 'माधव' और 'रिमझिम' जैसी कालजयी कृतियां दीं, उनका निधन 27 जनवरी 1989 को घोर अभावों के बीच हुआ।

आज के दौर में एक और कड़वा सच यह है कि समय के साथ उनकी कई ओजस्वी रचनाओं को पाठ्यपुस्तकों (Textbooks) से हटा दिया गया। आलोचकों का मानना है कि यह उस विचारधारा को कमजोर करने की कोशिश है जो राष्ट्रवाद और आत्मगौरव की बात करती है। बावजूद इसके, आज भी किसी भी देशभक्ति कार्यक्रम की शुरुआत उनकी पंक्तियों के बिना अधूरी मानी जाती है।

अमिट है पाण्डेय जी का स्थान

भले ही पाठ्यक्रम बदल जाएं या सत्ताएं महापुरुषों को भुला दें, लेकिन जनमानस के हृदय में श्याम नारायण पाण्डेय का स्थान अटल है। उनकी कविताएं आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस रखते हैं।

राष्ट्रप्रेम की मशाल

पंडित श्याम नारायण पाण्डेय की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस राष्ट्रचेतना को फिर से जीवित करना है जिसे उन्होंने अपनी स्याही से सींचा था। उनकी लेखनी आज भी हमें याद दिलाती है कि 'स्वदेश' और 'स्वाभिमान' से बढ़कर कुछ नहीं।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।