Lalu Relief: लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू परिवार को कोर्ट से बड़ी राहत, व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट

लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से लालू यादव, तेजस्वी और राबड़ी देवी को मिली बड़ी राहत की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। कोर्ट की 'संगठित साजिश' वाली सख्त टिप्पणी और 9 मार्च से शुरू होने वाले नियमित ट्रायल का पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप इस हाई-प्रोफाइल केस के सबसे बड़े मोड़ को जानने से चूक जाएंगे।

Jan 29, 2026 - 17:50
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Lalu Relief: लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू परिवार को कोर्ट से बड़ी राहत, व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट
Lalu Relief: लैंड फॉर जॉब स्कैम में लालू परिवार को कोर्ट से बड़ी राहत, व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 – देश के सबसे चर्चित 'लैंड फॉर जॉब' (जमीन के बदले नौकरी) घोटाला मामले में आज दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट से लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए राहत और आफत, दोनों की खबरें एक साथ आईं। स्पेशल जज वि विशाल गोग्ने की अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी और तेजप्रताप यादव को 1 से 25 फरवरी के बीच होने वाली अदालती कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से बड़ी छूट दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने इस पूरे मामले को एक 'संगठित आपराधिक साजिश' करार देकर यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में लालू परिवार की कानूनी मुश्किलें कम नहीं होने वाली हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिरी और मीसा-हेमा के कड़े तेवर

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम का नजारा काफी गहमागहमी भरा रहा।

  • लालू-तेजस्वी की वर्चुअल एंट्री: लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े, जबकि मीसा भारती और हेमा यादव ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कोर्ट के सामने अपनी दलीलें रखीं।

  • आरोपों को नकारा: मीसा और हेमा यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को बेगुनाह बताया।

  • ट्रायल की तारीख: अदालत ने अब इस मामले की नियमित सुनवाई के लिए 9 मार्च 2026 की तारीख मुकर्रर की है, जहाँ से गवाहों और सबूतों का सिलसिला शुरू होगा।

स्पेशल जज की सख्त टिप्पणी: 'नौकरी को बनाया हथियार'

भले ही परिवार को पेशी से छूट मिल गई हो, लेकिन स्पेशल जज विशाल गोग्ने की टिप्पणियों ने बचाव पक्ष को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

  1. आपराधिक साजिश: कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने सरकारी नौकरियों को परिवार के लिए अचल संपत्तियां (जमीन) बटोरने का जरिया बनाया।

  2. गंभीर लेन-देन: जज ने स्पष्ट किया कि यह केवल नियुक्तियों की गड़बड़ी नहीं है, बल्कि इसमें जमीन का ट्रांसफर और कौड़ियों के दाम पर कीमती प्लॉट करीबियों के नाम करने का एक गहरा जाल बुना गया है।

  3. 41 बनाम 52: याद रहे कि 9 जनवरी को कोर्ट ने लालू परिवार समेत 41 लोगों पर आरोप तय किए थे, जबकि सबूतों के अभाव में 52 अन्य को बरी कर दिया गया था।

लैंड फॉर जॉब केस: कानूनी स्टेटस (Legal File 2026)

विवरण प्रमुख जानकारी (Key Details)
मुख्य आरोपी लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी, मीसा भारती व अन्य
राहत का प्रकार 1-25 फरवरी तक व्यक्तिगत पेशी से छूट
कोर्ट की टिप्पणी "संगठित आपराधिक साजिश" (Organized Conspiracy)
ट्रायल की शुरुआत 09 मार्च 2026 से नियमित सुनवाई
सीबीआई की भूमिका सबूतों और साक्ष्यों का भौतिक सत्यापन जारी

इतिहास का पन्ना: 2004 से 2026 तक जमीन और नौकरी का यह खेल

यह मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। इतिहास गवाह है कि भारतीय रेलवे के इतिहास में लालू के दौर को अक्सर 'प्रॉफिट मेकिंग' दौर कहा जाता था, लेकिन उसी दौर की परतों के पीछे 'लैंड फॉर जॉब' की पटकथा लिखी जा रही थी। आरोप है कि रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर नियुक्ति के बदले पटना और अन्य इलाकों में कीमती जमीनें लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर गिफ्ट या ट्रांसफर की गईं। 2022-23 में जब सीबीआई और ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की, तो बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया। आज 2026 में ट्रायल का शुरू होना भारतीय न्यायिक इतिहास के उन चंद मामलों में से एक है जहाँ एक पूरे राजनीतिक परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप तय हुए हैं।

बचाव पक्ष के पास क्या है मौका?

अदालत ने यह साफ कर दिया है कि 'आरोप तय होना' (Framing of Charges) किसी की दोषसिद्धि (Conviction) नहीं है। लालू परिवार के पास अब 9 मार्च से शुरू होने वाले ट्रायल में सीबीआई के दस्तावेजों को चुनौती देने का पूरा मौका होगा। उनके वकील अब इस बात पर जोर देंगे कि जमीन का ट्रांसफर वैध कारोबारी लेन-देन था और इसका नौकरियों से कोई सीधा संबंध नहीं है।

9 मार्च पर टिकी निगाहें

लालू यादव के लिए यह राहत की सांस तो है, लेकिन ट्रायल की तलवार अभी भी लटकी हुई है। क्या सीबीआई पुख्ता सबूत पेश कर पाएगी या लालू परिवार इस चक्रव्यूह से बाहर निकल जाएगा?

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।