Ranchi Fraud: रांची में व्हाट्सऐप निवेश स्कीम से 1.53 करोड़ की ठगी, तेलंगाना से आरोपी गिरफ्तार
रांची में साइबर अपराधियों ने व्हाट्सऐप के जरिए निवेश का झांसा देकर एक व्यक्ति से 1.53 करोड़ रुपए ठग लिए। झारखंड पुलिस ने तेलंगाना से आरोपी को दबोचा, मामले में कई राज्यों से जुड़ी शिकायतें भी सामने आईं।
रांची: व्हाट्सऐप पर निवेश का झांसा, लाखों गुना मुनाफे का सपना और फिर खाता खाली! राजधानी रांची में ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने एक व्यक्ति से 1.53 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी कर ली। इस हाई-प्रोफाइल मामले में झारखंड सीआईडी के साइबर क्राइम थाने ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।
कैसे फंसा शिकार?
झारखंड पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पीड़ित से अपराधियों ने सबसे पहले व्हाट्सऐप पर संपर्क किया। उसे बड़े मुनाफे का लालच दिया गया कि उसका निवेश 5 से 10 गुना तक बढ़ सकता है। इसके लिए उसे कुछ लिंक भेजे गए और उन्हीं लिंक्स के जरिए पैसे लगाने को कहा गया। शुरुआत में छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन कराए गए और धीरे-धीरे पीड़ित को बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
परिणाम यह हुआ कि अलग-अलग बैंक खातों के जरिए अपराधियों ने कुल ₹1,53,83,118 रुपए की ठगी कर ली।
बैंक खाते से खुला बड़ा राज़
जांच में यह भी सामने आया कि इस साइबर गिरोह ने आईडीआईबीआई फर्स्ट बैंक (खाता संख्या - 89394896628) का इस्तेमाल किया। हैरानी की बात यह है कि सिर्फ दो दिनों के भीतर इस खाते में ₹58 लाख जमा हुए थे।
यही नहीं, गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के अनुसार, इसी खाते से जुड़ी शिकायतें देशभर के कई राज्यों से मिली हैं। इनमें कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्य शामिल हैं। कुल मिलाकर इस खाते के खिलाफ 11 अलग-अलग शिकायतें दर्ज हैं।
गिरफ्तारी की बड़ी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में अब तक दो आरोपियों को दबोचा है। पहला आरोपी मोहम्मद आसिफ हापुड़ (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार हुआ था। उसे पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। अब इस कड़ी में पुलिस ने तेलंगाना के करीमनगर से ऐरा लक्ष्मी रेड्डी को गिरफ्तार किया है। माना जा रहा है कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर देशभर में ठगी का नेटवर्क चला रहा था।
साइबर अपराध का बढ़ता जाल
रांची ही नहीं, बल्कि पूरा झारखंड लंबे समय से साइबर अपराध का गढ़ माना जाता रहा है। यहां से हर साल करोड़ों रुपए की ठगी की घटनाएं सामने आती हैं। झारखंड पुलिस लगातार ऐसे मामलों पर सख्ती बरत रही है, लेकिन साइबर अपराधियों की चालाकी और तकनीकी ट्रिक्स से आम लोग अक्सर शिकार बन जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए निवेश ठगी अब तेजी से फैल रही है। इसमें अपराधी पहले भरोसा जीतते हैं, शुरुआती निवेश पर छोटा-सा मुनाफा दिखाते हैं और फिर बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं।
पुलिस की अपील
झारखंड पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की निवेश योजना या लिंक पर आंख बंद करके भरोसा न करें। खासतौर पर अगर कोई अनजान नंबर से व्हाट्सऐप पर संदेश भेजे और लाखों गुना मुनाफे का दावा करे, तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।
इतिहास और ट्रेंड
अगर इतिहास पर नजर डालें, तो बीते 10 सालों में झारखंड के कई जिलों से साइबर अपराधियों ने बड़े-बड़े बैंकिंग फ्रॉड किए हैं। जामताड़ा, गिरिडीह और देवघर जैसे जिले तो ‘फ्रॉड हब’ के नाम से चर्चित हो चुके हैं। Netflix की वेबसीरीज़ Jamtara ने इस काले कारोबार को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया था।
अब इस ठगी का तरीका बदल चुका है। पहले अपराधी फोन कॉल और OTP के जरिए खाते साफ करते थे, जबकि अब निवेश स्कीम्स और डिजिटल लिंक उनके नए हथियार बन चुके हैं।
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