Ranchi Rats: गजब कांड, रांची पुलिस की कस्टडी से 1 करोड़ का गांजा गायब, चूहों ने खाया 200 किलो माल, अदालत भी हैरान, आरोपी बरी
रांची के ओरमांझी थाने के मालखाने में रखा 200 किलो गांजा चूहों के खाने की थ्योरी ने सबको चौंका दिया है। 1 करोड़ रुपये की कीमत वाले इस नशे के गायब होने और पुलिस की लापरवाही के कारण आरोपी के बरी होने की यह पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें वरना आप भी कानून के इस सबसे अजीबोगरीब वाकये से अनजान रह जाएंगे।
रांची, 29 दिसंबर 2025 – झारखंड की राजधानी रांची से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर कानून के जानकारों से लेकर आम जनता तक अपनी उंगलियां दांतों तले दबा रही है। आपने इंसानों को नशा करते तो सुना होगा, लेकिन क्या कभी सुना है कि चूहे करोड़ों का नशा डकार गए? रांची के ओरमांझी थाने में पुलिस की कड़ी निगरानी और मालखाने के तालों के पीछे रखा करीब 200 किलो गांजा चूहों ने खा लिया। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि खुद पुलिस ने अदालत में हलफनामा देकर यह दलील पेश की है। पुलिस की इस विचित्र लापरवाही और सबूतों के अभाव का नतीजा यह हुआ कि 1 करोड़ के गांजे के साथ पकड़ा गया मुख्य आरोपी बाइज्जत बरी हो गया।
बोलेरो से बरामदगी: 17 जनवरी 2022 की वो रात
इस हाई-प्रोफाइल केस की शुरुआत करीब तीन साल पहले हुई थी।
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छापेमारी: 17 जनवरी 2022 को ओरमांझी पुलिस को सूचना मिली थी कि सफेद रंग की बोलेरो में भारी मात्रा में नशा तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है।
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बैरिकेडिंग और गिरफ्तारी: एनएच-20 पर पुलिस ने घेराबंदी की। गाड़ी रुकते ही तीन लोग भागने लगे, जिनमें से वैशाली (बिहार) निवासी इंद्रजीत राय को पुलिस ने धर दबोचा।
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जब्ती: गाड़ी की तलाशी लेने पर पुलिस को 200 किलो गांजा मिला, जिसकी बाजार में कीमत 1 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
चूहे बने 'विलेन': मालखाने से गायब हुआ सबूत
मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने जब्त किए गए गांजे को पेश करने का आदेश दिया, तो पुलिस की दलील ने अदालत को सन्न कर दिया।
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पुलिस का दावा: पुलिस ने अदालत को बताया कि ओरमांझी थाना के मालखाने में सुरक्षित रखा गया सारा गांजा चूहों ने खा लिया है।
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लापरवाही पर सवाल: वर्ष 2024 में पुलिस ने इस संबंध में एक सनहा (डायरी एंट्री) भी दर्ज की थी। लेकिन अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही करार दिया।
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विरोधाभास: गवाहों के बयानों में इतने छेद थे कि कोई यह नहीं बता पाया कि आरोपी को पकड़ा किसने या तलाशी कितनी देर चली। यहाँ तक कि जिस बोलेरो से गांजा मिला, उसके इंजन और चेसिस नंबर तक पुलिस स्पष्ट नहीं कर सकी।
ओरमांझी गांजा केस: घटनाक्रम का सफरनामा (Case Timeline)
| तारीख | प्रमुख गतिविधि |
| 17 जनवरी 2022 | एनएच-20 पर छापेमारी और 200 किलो गांजा बरामद |
| 13 मार्च 2022 | आरोपी इंद्रजीत राय पर चार्जशीट दाखिल |
| 01 जून 2022 | अदालत द्वारा केस में चार्ज फ्रेम किया गया |
| वर्ष 2024 | पुलिस ने सनहा दर्ज किया कि चूहे गांजा खा गए |
| 19 दिसंबर 2025 | अदालत ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी किया |
इतिहास की झलक: जब-जब चूहों ने 'पुलिस' को बचाया
यह पहली बार नहीं है जब पुलिसिया तंत्र में चूहे 'संकटमोचन' बनकर उभरे हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक, कई बार शराब की हजारों बोतलें और मादक पदार्थ चूहों के पेट में जाने की खबरें आती रही हैं। कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि 'NDPS एक्ट' (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) में जब्ती और नमूनाकरण (Sampling) की प्रक्रिया का पालन न करना पुलिस की साख पर सवाल उठाता है। क्या सचमुच चूहे 200 किलो गांजा खा सकते हैं या यह मालखाने के भीतर से नशे के सौदागरों के साथ मिलीभगत की कोई नई कहानी है?
एक करोड़ का चूना: आखिर कौन है जिम्मेदार?
आरपीएफ और नारकोटिक्स विभाग के मानकों के अनुसार, 1 किलो गांजे की कीमत करीब 50 हजार रुपये होती है। इस लिहाज से 200 किलो गांजा 1 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति थी।
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अदालत की फटकार: कोर्ट ने कहा कि जब्ती की प्रक्रिया इतनी कमजोर थी कि उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
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सुरक्षा पर सवाल: इतने बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की सुरक्षा के लिए आखिर क्या इंतजाम थे? क्या पुलिस के पास चूहों से मालखाने को बचाने का कोई तंत्र नहीं था?
सिस्टम की हार
19 दिसंबर 2025 को आया यह फैसला पुलिस के लिए किसी तमाचे से कम नहीं है। एक बड़ा अपराधी केवल इसलिए बरी हो गया क्योंकि पुलिस अपना 'माल' सुरक्षित नहीं रख पाई। अब यह जांच का विषय है कि क्या ओरमांझी थाने के चूहों को नशे की लत लग गई है या फिर चूहों के नाम पर गांजे की 'बंदरबांट' की गई है।
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