Ranchi Suicide : नामकुम थाने की हाजत में कातिल ने लगाई फांसी, 12 साल के बच्चे को मारकर दफनाया था, पुलिस कस्टडी में मौत से हड़कंप
रांची के नामकुम थाने में 12 वर्षीय बच्चे की हत्या के आरोपी जगय मुंडा ने हाजत के भीतर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। आरोपी ने अवैध संबंधों के विवाद में मासूम को मौत के घाट उतारकर रामगढ़ में दफना दिया था। पुलिस सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/नामकुम, 5 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची से सटे नामकुम थाना परिसर में बुधवार की देर रात एक ऐसी घटना घटी जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। एक 12 वर्षीय मासूम बच्चे के अपहरण और बेरहमी से हत्या के आरोपी जगय मुंडा ने थाना हाजत के भीतर ही फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पुलिस अभिरक्षा (Custody) में हुई इस मौत ने सुरक्षा व्यवस्था और हाजत की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार सुबह पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स (RIMS) भेज दिया है।
प्रतिशोध की आग: मासूम रमेश बना शिकार
इस पूरे मामले की जड़ें एक अवैध संबंध और आपसी विवाद से जुड़ी हैं। मृतक आरोपी जगय मुंडा, मूल रूप से खूंटी जिले के साइको थाना क्षेत्र का रहने वाला था, लेकिन वह नामकुम में एक महिला के साथ रह रहा था।
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विवाद और अपहरण: रविवार को जगय का उस महिला के साथ किसी बात को लेकर तीखा झगड़ा हुआ। गुस्से में अंधे होकर उसने महिला के 12 वर्षीय बेटे रमेश हजाम का अपहरण कर लिया।
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रामगढ़ में कत्ल: आरोपी बच्चे को लेकर रामगढ़ जिले के घाटो इलाके में पहुँचा। वहां उसने मासूम की हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए शव को जमीन में दफना दिया।
हाजत में आत्महत्या: जब दहल गया थाना परिसर
बच्चे के गायब होने के बाद पुलिस ने जगय मुंडा को शक के आधार पर दबोचा था। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया और उसकी निशानदेही पर रामगढ़ से बच्चे का शव भी बरामद कर लिया गया।
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रात का सन्नाटा: बुधवार रात जब पुलिस उसे कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर रही थी, तब उसे हाजत में रखा गया था।
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फांसी का फंदा: देर रात जगय ने हाजत के भीतर ही उपलब्ध संसाधनों से फंदा बनाया और लटक गया। जब संतरी की नजर उस पर पड़ी, तो आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कस्टोडियल डेथ और मानवाधिकार का इतिहास
भारत में कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) हमेशा से एक संवेदनशील और कानूनी बहस का विषय रहा है।
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ऐतिहासिक संदर्भ: 1997 के ऐतिहासिक डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और हिरासत के दौरान अभियुक्तों के अधिकारों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे।
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मानवाधिकार आयोग (NHRC): नियमानुसार, किसी भी थाने या जेल में होने वाली मौत की मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य होती है। नामकुम की यह घटना पुलिस की 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) की विफलता को दर्शाती है, जहाँ एक हाई-प्रोफाइल मर्डर केस का आरोपी खुदकुशी करने में सफल रहा।
सुरक्षा में चूक: अब क्या करेगी पुलिस?
नामकुम थाने की इस घटना ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। हाजत में संतरी की तैनाती होने के बावजूद आरोपी को फांसी लगाने का समय और सामान कैसे मिला?
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जांच के दायरे में पुलिसकर्मी: ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है। लापरवाही बरतने वालों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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पोस्टमार्टम और वीडियोग्राफी: रिम्स में शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जा रहा है, जिसकी पूरी वीडियोग्राफी कराई जा रही है ताकि मानवाधिकार आयोग के मानकों का पालन हो सके।
वारदात का विवरण: एक नजर में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| मृतक आरोपी | जगय मुंडा (निवासी खूंटी) |
| पीड़ित बच्चा | रमेश हजाम (12 वर्ष) |
| हत्या का स्थान | घाटो, रामगढ़ (जमीन में दफनाया था) |
| मौत की वजह | थाना हाजत में फांसी लगाकर आत्महत्या |
| थाना क्षेत्र | नामकुम पुलिस स्टेशन, रांची |
न्याय की आस और अधूरा सच
रमेश हजाम की हत्या के बाद लोग आरोपी को कड़ी सजा मिलते देखना चाहते थे, लेकिन जगय की मौत ने इस कानूनी प्रक्रिया को बीच में ही खत्म कर दिया। हालांकि पुलिस का कहना है कि वे तकनीकी साक्ष्यों के जरिए बच्चे की हत्या की फाइल को पूरा करेंगे, लेकिन कस्टडी में हुई इस मौत ने रांची पुलिस की कार्यप्रणाली पर जो दाग लगाया है, उसे धोना आसान नहीं होगा।
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