Palamu Murder: खूनी साजिश, पलामू में बेटे-पोते ने ही रची हत्या की सुपारी, 40 हजार में अपनों का सौदा, अंधविश्वास ने उजाड़ा घर
पलामू के लेस्लीगंज में एक बेटे और पोते ने मिलकर अपने ही बुजुर्ग की गला रेतकर हत्या करवा दी है। 40 हजार की सुपारी, ओझा-गुणी का शक और कातिलों द्वारा बनाया गया हत्या का खौफनाक वीडियो—इस सनसनीखेज वारदात की पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी रिश्तों के इस काले सच से अनजान रह जाएंगे।
पलामू, 29 दिसंबर 2025 – झारखंड के पलामू जिले से रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी डरावनी दास्तां सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के नावाडीह-तेनार में एक बेटे और पोते ने मिलकर अपने ही पिता और दादा, पच्चू मोची (65), की हत्या की खूनी पटकथा लिखी। पुलिस ने इस अंधे कत्ल का खुलासा करते हुए बताया कि यह पूरी वारदात महज 40 हजार रुपये की सुपारी और गहरे अंधविश्वास का परिणाम थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्यारों ने कत्ल के बाद खून से सने चाकू के साथ एक वीडियो भी बनाया, जो अब पुलिस के हाथ लग चुका है।
जंगल में मिला था शव: 22 दिसंबर की वो काली रात
घटना की शुरुआत 22 दिसंबर को हुई थी, जब पच्चू मोची मवेशी चराने के लिए डबरा जंगल गए थे।
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गायब हुए बुजुर्ग: शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो तलाश शुरू हुई। दो दिन बाद 24 दिसंबर को जंगल के भीतर उनका क्षत-विक्षत शव मिला।
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गला रेता गया: पच्चू मोची की हत्या गला रेतकर की गई थी।
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चौकीदार की मुस्तैदी: हैरान करने वाली बात यह थी कि सगे परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई, जिसके बाद स्थानीय चौकीदार रविन्द्र पासवान के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस को यहीं से परिवार पर शक होने लगा था।
अंधविश्वास की आग: 4500 रुपये और 'नाराज देवता'
पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस हत्या के पीछे की वजह बेहद अजीब और अंधविश्वास से भरी है।
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ओझा-गुणी का शक: पच्चू मोची ओझा-गुणी का काम करते थे। तीन महीने पहले उनके 4500 रुपये चोरी हो गए थे।
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देवता का अपमान: गुस्से में आकर पच्चू मोची ने घर के 'कुल देवता' को कबाड़ में फेंक दिया था।
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मौत का डर: इसके बाद परिवार में कुछ लोग बीमार हुए और कुछ की मौत हुई। बेटे बबलू मोची और पोते धन्नजय रविदास को लगा कि यह सब पच्चू मोची के 'जादू-टोने' और देवता को अपमानित करने की वजह से हो रहा है।
पलामू सुपारी किलिंग: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| मृतक | पच्चू मोची (65 वर्ष) |
| मुख्य साजिशकर्ता | बेटा (बबलू मोची) और पोता (धन्नजय) |
| सुपारी की रकम | ₹40,000 (10 हजार एडवांस) |
| हत्या का हथियार | खून लगा चाकू (बरामद) |
| डिजिटल सबूत | हत्या के बाद बनाया गया वीडियो |
इतिहास और अंधविश्वास: पलामू का 'डार्क' साइड
झारखंड के पलामू, गढ़वा और लातेहार जैसे जिलों में 'डायन-बिसाही' और ओझा-गुणी के शक में हत्याओं का एक काला इतिहास रहा है। 21वीं सदी में भी यहाँ कई परिवार स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज डॉक्टरों के बजाय 'तंत्र-मंत्र' में ढूंढते हैं। पच्चू मोची की हत्या इसी आदिम सोच का नतीजा है, जहाँ आधुनिक तकनीक (Phone-Pe) का इस्तेमाल सुपारी देने के लिए किया गया, लेकिन मानसिकता अभी भी सैकड़ों साल पुरानी रही। यह मामला दिखाता है कि कैसे अंधविश्वास एक सगे बेटे को अपने ही पिता का कसाई बना सकता है।
Phone-Pe से सुपारी और 'किलर वीडियो'
पुलिस की जांच में तकनीक ने अहम भूमिका निभाई।
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डिजिटल ट्रेल: आरोपी बेटे बबलू ने बाहर से Phone-Pe के जरिए पैसे भेजे थे, जिसका इस्तेमाल भाड़े के हत्यारों को सुपारी देने के लिए किया गया।
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सबूत का वीडियो: हत्यारों ने कत्ल को अंजाम देने के बाद चाकू के साथ एक वीडियो बनाया, ताकि वे सुपारी देने वालों को 'काम पूरा होने' का सबूत दे सकें। यही वीडियो आरोपियों के मोबाइल से बरामद हुआ, जिसने उनकी गर्दन फंसा दी।
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गिरफ्तारी: पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य शिकारी अभी भी फरार हैं।
रिश्तों का अंत
लेस्लीगंज की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वे खून के रिश्तों को भी नहीं पहचानतीं। पच्चू मोची की हत्या ने यह साबित कर दिया है कि जब तक जागरूकता नहीं आएगी, तब तक निर्दोष लोग ओझा-गुणी के नाम पर अपनों के ही हाथों बलि चढ़ते रहेंगे। एसपी रीष्मा रमेशन ने साफ किया है कि फरार आरोपियों को भी जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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