Ranchi Raid: रांची के नामकुम में अवैध शराब के 7 अड्डों पर चला बुलडोजर, 9200 किलो जावा महुआ नष्ट, माफियाओं में मची खलबली

रांची के नामकुम स्थित हेसा पीढ़ी गांव में उत्पाद विभाग ने छापेमारी कर 9200 किलो जावा महुआ और 7 अवैध भट्टियों को ध्वस्त कर दिया है। उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में हुई इस बड़ी कार्रवाई और फरार 7 मुख्य आरोपियों की तलाश की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Apr 6, 2026 - 21:15
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Ranchi Raid:  रांची के नामकुम में अवैध शराब के 7 अड्डों पर चला बुलडोजर, 9200 किलो जावा महुआ नष्ट, माफियाओं में मची खलबली
Ranchi Raid: रांची के नामकुम में अवैध शराब के 7 अड्डों पर चला बुलडोजर, 9200 किलो जावा महुआ नष्ट, माफियाओं में मची खलबली

रांची/नामकुम, 6 अप्रैल 2026 – झारखंड की राजधानी रांची में अवैध शराब के सौदागरों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' को अंजाम दिया है। सोमवार को नामकुम थाना क्षेत्र के हेसा पीढ़ी गांव में उत्पाद विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर धावा बोलकर अवैध शराब निर्माण के एक विशाल नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका। सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने शराब माफियाओं के हौसले पस्त कर दिए हैं। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के बीच छिपे इन ठिकानों पर जब पुलिस पहुँची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।

हेसा पीढ़ी में महा-छापेमारी: 9200 किलो 'जहर' का ढेर

सोमवार की सुबह जब उत्पाद विभाग की विशेष टीम हेसा पीढ़ी गांव की ओर बढ़ी, तो माफियाओं को भनक तक नहीं लगी।

  • भारी मात्रा में विनाश: टीम ने छापेमारी के दौरान ड्रमों में भिगोकर रखे गए करीब 9,200 किलोग्राम जावा महुआ को मौके पर ही बहाकर नष्ट कर दिया। यह महुआ किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया में था, जिससे हजारों लीटर शराब तैयार होनी थी।

  • चुलाई शराब जब्त: जावा महुआ के अलावा, पुलिस ने लगभग 400 लीटर तैयार चुलाई शराब भी जब्त की है, जिसे प्लास्टिक के गैलन में भरकर बाजार भेजने की तैयारी थी।

  • भट्टियां ध्वस्त: कार्रवाई के दौरान इलाके में धधक रही 7 अवैध भट्टियों को हथौड़ों और बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया गया। ये भट्टियां लंबे समय से इस काले कारोबार का मुख्य केंद्र बनी हुई थीं।

7 माफिया रडार पर: भनक लगते ही जंगल में हुए ओझल

पुलिस की गाड़ी को देखते ही शराब माफिया और उनके गुर्गे मौके का फायदा उठाकर घने जंगलों की ओर भाग निकले।

  1. मुख्य आरोपियों की पहचान: उत्पाद विभाग ने अपनी खुफिया जानकारी और स्थानीय इनपुट के आधार पर 7 मुख्य आरोपियों की पहचान कर ली है। ये लोग इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे थे।

  2. कानूनी शिकंजा: सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

  3. राजस्व को चपत: यह नेटवर्क न केवल लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा था, बल्कि सरकार को भी लाखों के राजस्व का नुकसान पहुँचा रहा था।

नामकुम का भूगोल: अवैध शराब का 'सुरक्षित' गढ़ और इतिहास

रांची का नामकुम इलाका अपनी भौगोलिक बनावट के कारण अवैध गतिविधियों के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' रहा है।

  • जंगलों का फायदा: हेसा पीढ़ी जैसे गांव पहाड़ियों और जंगलों से घिरे हैं, जहाँ पुलिस की गाड़ियों का पहुँचना मुश्किल होता है। माफिया इसी दुर्गमता का फायदा उठाकर यहाँ बड़ी-बड़ी भट्टियां स्थापित करते हैं।

  • पुरानी परंपरा बनाम अपराध: झारखंड के ग्रामीण अंचलों में महुआ का सांस्कृतिक महत्व रहा है, लेकिन माफियाओं ने इसे व्यापारिक रूप देकर 'जहरीली शराब' के कारखाने में बदल दिया है। पहले यहाँ केवल घरेलू खपत के लिए शराब बनती थी, लेकिन अब यह एक संगठित अपराध बन चुका है।

  • प्रशासनिक सतर्कता: सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान महज एक शुरुआत है। आने वाले दिनों में रांची के अन्य संवेदनशील इलाकों जैसे तुपुदाना और रातू में भी ऐसी ही कार्रवाई की जाएगी।

बड़ी सफलता: माफियाओं के नेटवर्क पर करारा प्रहार

प्रशासन ने इस कार्रवाई को 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बताया है।

  • विशेष रणनीति: इस बार टीम ने सीधे उत्पादन के स्रोत (Manufacturing points) पर हमला किया है। 9200 किलो जावा महुआ का नष्ट होना माफियाओं के लिए बड़ा आर्थिक झटका है।

  • सख्ती का संकेत: अधिकारियों ने साफ कहा है कि अवैध शराब के कारोबार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।

  • ग्रामीणों से अपील: पुलिस ने ग्रामीणों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे अवैध अड्डों की जानकारी गोपनीय रूप से साझा करें ताकि समय रहते इन्हें नष्ट किया जा सके।

नामकुम के हेसा पीढ़ी में हुई यह कार्रवाई रांची पुलिस और उत्पाद विभाग की एक बड़ी जीत है। 9200 किलो जावा महुआ और 7 भट्टियों का खात्मा यह बताता है कि अगर प्रशासन ठान ले, तो माफियाओं के किले को ढहाया जा सकता है। हालांकि, 7 आरोपियों का फरार होना एक चुनौती है, लेकिन उनकी पहचान हो जाना जल्द गिरफ्तारी का संकेत है। शराब माफियाओं के लिए यह 'अल्टीमेटम' है कि अब उनके काले धंधे का अंत नजदीक है। फिलहाल, इलाके में शांति है और उत्पाद विभाग की पैनी नजर हर संदिग्ध गतिविधि पर टिकी है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।