Hatia Ganja-Seizure: हटिया रेलवे स्टेशन पर 8.45 लाख का गांजा जब्त, ऑपरेशन नारकोस के तहत आरपीएफ ने युवक को दबोचा, अंगुल से जुड़े हैं तार
रांची के हटिया स्टेशन पर आरपीएफ ने 'ऑपरेशन नारकोस' के तहत 16.9 किलो गांजा बरामद किया है। अंगुल से लाए जा रहे 8.45 लाख के इस नशीले खेप और गिरफ्तार युवक की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/हटिया, 9 अप्रैल 2026 – झारखंड की राजधानी रांची में नशा माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन नारकोस' को एक और बड़ी सफलता मिली है। हटिया रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सीआईबी (CIB) की संयुक्त टीम ने एक शातिर नशा तस्कर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला गांजा बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 8.45 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस की इस कार्रवाई ने ओडिशा से रांची तक फैले तस्करी के एक बड़े रूट का पर्दाफाश कर दिया है।
ट्रॉली बैग में 'नशा': प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर आरपीएफ की दबिश
8 अप्रैल की दोपहर जब हटिया स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ थी, तब आरपीएफ की सतर्क नजरों ने एक संदिग्ध को भांप लिया।
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संदिग्ध की पहचान: प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर फुट ओवर ब्रिज के नीचे एक युवक दो ट्रॉली बैग के साथ बेहद घबराया हुआ बैठा था। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम विशाल पुरकायत (25), निवासी जगन्नाथपुर, रांची बताया।
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तलाशी में खुलासा: जब पुलिस ने उसके बैग की तलाशी ली, तो कपड़ों के नीचे छिपाए गए तीन बड़े पैकेट मिले। पैकेट खोलते ही टीम के होश उड़ गए, क्योंकि उनमें 16.9 किलोग्राम गांजा ठूस-ठूस कर भरा गया था।
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वैध दस्तावेज नदारद: आरोपी के पास इस मादक पदार्थ से संबंधित कोई भी मेडिकल या कानूनी दस्तावेज नहीं था, जिसके बाद उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
पूछताछ में सनसनीखेज कबूलनामा: अंगुल से रांची का कनेक्शन
गिरफ्तारी के बाद विशाल ने तस्करी के जिस 'मोडस ऑपेरंडी' का खुलासा किया है, वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है।
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मास्टरमाइंड की तलाश: विशाल ने बताया कि वह धुर्वा के किसी व्यक्ति के इशारे पर काम कर रहा था। उसी ने उसे गांजा लाने के लिए ओडिशा के अंगुल भेजा था।
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ट्रेन का सफर: वह ट्रेन संख्या 18403 एक्सप्रेस से नशीले पदार्थों की खेप लेकर हटिया पहुँचा था। उसे निर्देश दिया गया था कि स्टेशन से बाहर निकलने के बाद यह माल किसी और को हैंडओवर करना है।
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एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई: आरपीएफ ने जब्त माल के साथ विशाल को जीआरपीएस (GRPS) हटिया को सौंप दिया है। पुलिस अब धुर्वा के उस शख्स की तलाश में छापेमारी कर रही है जिसने विशाल को कूरियर के तौर पर इस्तेमाल किया।
हटिया स्टेशन का सामरिक महत्व: तस्करों के लिए क्यों बना है 'सेफ रूट'?
हटिया रेलवे स्टेशन न केवल रांची का एक प्रमुख टर्मिनल है, बल्कि यह दक्षिण भारत और ओडिशा को जोड़ने वाली ट्रेनों का मुख्य पड़ाव भी है।
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ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: हटिया स्टेशन का निर्माण भारी मशीनरी और औद्योगिक विकास के लिए किया गया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह ओडिशा के 'गांजा बेल्ट' से आने वाली ट्रेनों के लिए एक संवेदनशील पॉइंट बन गया है।
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नारकोटिक कॉरिडोर: ओडिशा के अंगुल, संबलपुर और कोरापुट जैसे इलाकों से गांजा लाकर झारखंड और बिहार के बाजारों में खपाना तस्करों का पुराना तरीका रहा है।
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ऑपरेशन नारकोस का असर: रेलवे सुरक्षा बल ने हाल के दिनों में अपने सूचना तंत्र को काफी मजबूत किया है। स्टेशन परिसर में लगातार चेकिंग और संदिग्धों की निगरानी के कारण अब तस्करों के लिए यहाँ से निकलना मुश्किल हो गया है।
अगली कार्रवाई: रडार पर हैं धुर्वा के 'ड्रग पेडलर्स'
विशाल की गिरफ्तारी तो महज एक शुरुआत है, पुलिस की असली चुनौती उस सिंडिकेट को तोड़ना है जो पर्दे के पीछे से काम कर रहा है।
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मोबाइल कॉल रिकॉर्ड: पुलिस अब विशाल के फोन की कॉल डिटेल्स खंगाल रही है ताकि अंगुल के सप्लायर और रांची के रिसीवर का पता लगाया जा सके।
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सुरक्षा टीम की सराहना: इस सफल ऑपरेशन में LSI रीता कुमारी, ASI अनिल कुमार, कांस्टेबल अमरेश, आरके सिंह और अरविंद कुमार यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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जनता से अपील: रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि अगर वे स्टेशन या ट्रेन में किसी को संदिग्ध बैग के साथ देखें, तो तुरंत टोल-फ्री नंबर 139 पर सूचना दें।
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