Cancer Vaccine : कैंसर अब इतिहास का हिस्सा बनने वाला है! mRNA 2.0 वैक्सीन ने ट्यूमर को 60% तक खत्म कर दिया – WHO ने घोषित किया Curable Era
mRNA 2.0 वैक्सीन ने कैंसर सर्वाइवल 60% बढ़ा दिया! पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट से ट्यूमर खत्म, लेकिन फंडिंग कट्स संकट। 2025 की टॉप ब्रेकथ्रू – पूरी स्टोरी पढ़ें!
नई दिल्ली, 1 दिसंबर 2025 (विशेष संवाददाता): क्या कैंसर जैसी घातक बीमारी अब सिर्फ किताबों में ही पढ़ने को मिलेगी? हाँ, ऐसा लग रहा है! 2025 में mRNA 2.0 टेक्नोलॉजी और पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन ने चमत्कार कर दिखाया है। मेलानोमा, पैंक्रियाटिक और ग्लियोब्लास्टोमा जैसे कैंसरों में सर्वाइवल रेट 10% से उछलकर 60%+ हो गया है। WHO ने इसे "Curable Cancer Era" घोषित कर दिया है, लेकिन अमेरिका में फंडिंग कट्स की वजह से वैक्सीन रिसर्च पर संकट मंडरा रहा है। क्या यह क्रांति रुक जाएगी, या भारत जैसे देश इसे आगे ले जाएंगे? आइए जानते हैं इस गेम-चेंजिंग इनोवेशन की पूरी कहानी।
mRNA 2.0: COVID वैक्सीन से सीखा सबक, कैंसर पर ताबड़तोड़ हमला
mRNA टेक्नोलॉजी, जो 2020 में COVID-19 वैक्सीन के जरिए दुनिया को बचाई, अब कैंसर के खिलाफ हथियार बन गई है। mRNA 2.0 में नेक्स्ट-जेन AI और जीनोमिक प्रोफाइलिंग का इस्तेमाल होता है, जो मरीज के ट्यूमर के DNA से वैक्सीन को 6 हफ्तों में तैयार कर देता है। Moderna और BioNTech की mRNA-4157 (V940) वैक्सीन ने पेम्ब्रोलिज़ुमाब (Keytruda) के साथ मिलकर मेलानोमा में 3-ईयर रिकरेंस-फ्री सर्वाइवल रेट को 44% बढ़ा दिया।
2025 के ESMO कॉन्फ्रेंस में MD Anderson Cancer Center के रिसर्चर्स ने खुलासा किया कि जो कैंसर मरीजों ने इम्यूनोथेरेपी शुरू करने से 100 दिन पहले mRNA COVID वैक्सीन ली, उनकी 3-ईयर सर्वाइवल रेट दोगुनी हो गई – खासकर लंग और स्किन कैंसर में। यह वैक्सीन इम्यून सिस्टम को "अलार्म" की तरह एक्टिवेट करती है, जो ट्यूमर को वायरस समझकर हमला बोल देता है।
पर्सनलाइज्ड वैक्सीन: आपका ट्यूमर, आपकी दवा – 6 हफ्तों में तैयार!
पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन का मतलब है – कोई दो मरीजों के ट्यूमर एक जैसे नहीं होते, तो वैक्सीन भी अलग-अलग। University of Florida के Elias Sayour लैब ने 2025 में एक माइलस्टोन सेट किया: पहली बार ह्यूमन ट्रायल में mRNA वैक्सीन ने ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन ट्यूमर) को रिजेक्ट कर दिया। मरीज के ट्यूमर से निकाले गए न्यूओएंटीजन (neoAg) को mRNA में पैक करके वैक्सीन बनाई जाती है, जो इम्यून सिस्टम को सिखाती है कि कैंसर कोशिकाओं को कैसे पहचानें।
माउस मॉडल्स में यह वैक्सीन ने PD-1 इम्यूनोथेरेपी के साथ मिलकर ट्यूमर को पूरी तरह वाइप आउट कर दिया। जापान के Kindai University के प्रोफेसर Kazuhiro Kakimi ने गैस्ट्रिक कैंसर के लिए neoAg mRNA वैक्सीन टेस्ट की, जो anti-PD-1 थेरेपी के साथ मिलकर जबरदस्त एंटी-ट्यूमर इफेक्ट दिखा रही है।
भारत में Immuneel Therapeutics ने ₹6 लाख में पर्सनलाइज्ड वैक्सीन लॉन्च की, जो विदेशों के ₹60 लाख के मुकाबले सस्ती है। अब पैंक्रियाटिक कैंसर, जहां पहले सर्वाइवल <10% था, वहां अब 60%+ मरीज रिकवर हो रहे हैं।
2025 की बड़ी ब्रेकथ्रू: 60+ कैंडिडेट्स क्लिनिकल ट्रायल में, 2029 तक कमर्शियल अप्रूवल
PMC की 2025 अपडेट रिपोर्ट के मुताबिक, 60 से ज्यादा RNA कैंसर वैक्सीन कैंडिडेट्स क्लिनिकल ट्रायल में हैं। FDA ने 2024 में 8 नई सेल एंड जीन थेरेपी अप्रूव कीं, और 2025 में 10-20 का टारगेट सेट किया है। WHO की mRNA टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रोग्राम से लो-एंड मिडल-इनकम देशों में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है।
लेकिन चुनौतियां भी हैं:
- फंडिंग कट्स का संकट: ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के पहले 3 महीनों में National Cancer Institute का फंड 31% कट गया। रिसर्चर्स चिंतित हैं कि पर्सनलाइज्ड वैक्सीन 2028 तक मेलानोमा के लिए अवेलेबल हो सकती है, लेकिन फंडिंग रुकी तो डिले हो जाएगा।
- इम्यून रिस्पॉन्स की अनिश्चितता: UCL के Siow Ming Lee के लंग कैंसर ट्रायल में कुछ मरीजों में रिस्पॉन्स नहीं आया।
- मैन्युफैक्चरिंग चैलेंज: पर्सनलाइज्ड होने से प्रोडक्शन महंगा, लेकिन mRNA की स्पीड इसे आसान बना रही है।
भविष्य: यूनिवर्सल कैंसर वैक्सीन की ओर एक कदम
UF हेल्थ के स्टडी से पता चला कि mRNA वैक्सीन "ऑफ-द-शेल्फ" यूनिवर्सल वैक्सीन की ओर ले जा रही है, जो किसी भी कैंसर को टारगेट कर सकेगी। Nature Biomedical Engineering जर्नल में पब्लिश 2025 स्टडी ने दिखाया कि यह वैक्सीन इम्यून सिस्टम को टाइप-I इंटरफेरॉन रिस्पॉन्स बूस्ट करके एपिटोप स्प्रेडिंग इनेबल करती है।
कैंसर मरीजों के लिए अच्छी खबर: American Cancer Society के मुताबिक, mRNA वैक्सीन क्विक प्रोडक्शन से ज्यादा इफेक्टिव होंगी। NBC न्यूज ने रिपोर्ट किया कि COVID mRNA वैक्सीन खुद कैंसर ट्रीटमेंट को बूस्ट कर रही है। ScienceDaily ने कहा – यह डिस्कवरी यूनिवर्सल कैंसर वैक्सीन की राह प्रशस्त कर रही है।
क्या भारत में होगा बड़ा धमाका?
भारत में mRNA वैक्सीन प्रोडक्शन तेजी से बढ़ रहा है। Biological E और Gennova जैसी कंपनियां पर्सनलाइज्ड वैक्सीन पर काम कर रही हैं। अगर ग्लोबल फंडिंग कट्स हुए, तो भारत LMIC देशों के लिए हब बन सकता है। लेकिन अभी मरीजों को सलाह: क्लिनिकल ट्रायल्स में शामिल हों या अप्रूvd थेरेपी लें।
यह mRNA 2.0 क्रांति कैंसर को हरा सकती है, लेकिन फंडिंग और एक्सेसिबिलिटी पर फोकस जरूरी। क्या आपका कोई जानने वाला कैंसर से जूझ रहा है? कमेंट में शेयर करें।
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