Saraikela Rage: सरायकेला बंद से कोल्हान में भूचाल! आदिवासियों पर लाठीचार्ज का वो काला सच क्या है? पुलिस ने गर्भवती महिला को क्यों थाने में बैठाया?
चाईबासा में हुए आदिवासियों पर लाठीचार्ज के विरोध में कोल्हान बंद का माहौल क्यों गर्माया? सरायकेला में भाजपा नेताओं ने सड़क पर उतरकर दुकानें क्यों बंद कराईं? क्या आप जानते हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर रात 10 बजे आंसू गैस के गोले क्यों दागे गए? सरकार पर आदिवासी विरोधी होने के आरोप क्यों लग रहे हैं? स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफा क्यों मांगा गया? तुरंत जानें सबसे बड़ी खबर!
सरायकेला, 29 अक्टूबर 2025 – झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। चाईबासा में आदिवासी ग्रामीणों पर हुए बेरहम लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा द्वारा आहूत 'कोल्हान बंद' ने बुधवार को सरायकेला को भी पूरी तरह प्रभावित किया। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर दुकानें बंद कराईं और राज्य सरकार पर 'दमनकारी' होने का गंभीर आरोप लगाया।
भाजपा नेत्री मीरा मुंडा और जिला अध्यक्ष उदय सिंहदेव के नेतृत्व में कार्यकर्ता गैरेज चौक और संजय चौक पर एकजुट हुए। मीरा मुंडा ने सीधे तौर पर राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह सरकार पूरी तरह दमनकारी है और आवाज उठाने वाले आदिवासी समाज का अपमान किया गया है।
लाठीचार्ज का वो काला सच: रात 10 बजे क्या हुआ?
भाजपा जिला अध्यक्ष उदय सिंहदेव ने चाईबासा की घटना का पूरा ब्यौरा देते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण सड़क सुरक्षा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
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शांतिपूर्ण प्रदर्शन: ग्रामीण लंबे समय से 'नो इंट्री' की मांग कर रहे थे, क्योंकि इस सड़क पर एक साल में 150 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है।
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मंत्री से मिलने से रोका: जब प्रदर्शनकारी तांबे चौक पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया और मंत्री दीपक बिरुआ से मिलने नहीं दिया।
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आधी रात की बर्बरता: सिंहदेव ने दावा किया कि रात के करीब 10 बजे जब प्रदर्शनकारी भोजन कर रहे थे, तभी पुलिस ने अचानक उन पर लाठीचार्ज कर दिया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।
यह घटना झारखंड के उस ऐतिहासिक संघर्ष को याद दिलाती है, जहां आदिवासी हमेशा जल, जंगल और जमीन के अधिकार के लिए शांतिपूर्ण लड़ाई लड़ते रहे हैं, लेकिन अक्सर उन्हें दमन का सामना करना पड़ा है।
गर्भवती महिला थाने में, हत्या का मामला दर्ज करने की मांग
उदय सिंहदेव ने सरकार पर आदिवासी विरोधी होने का गंभीरतम आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और एक गर्भवती महिला को भी दो दिनों से थाने में बैठा कर रखा गया है, जो बेहद निंदनीय है।
यही नहीं, उदय सिंहदेव ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
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एचआईवी संक्रमित रक्त: उन्होंने हाल ही में सामने आए एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले को विभाग की घोर लापरवाही बताया।
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हत्या का केस: उदय सिंहदेव ने मांग की कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर 'हत्या का मामला' दर्ज होना चाहिए।
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मंत्री का इस्तीफा: उन्होंने सीधे स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से इस्तीफे की मांग की, यह आरोप लगाते हुए कि उनके कार्यकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है।
कोल्हान बंद से स्पष्ट है कि यह मामला अब सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं की मांग तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सीधे राज्य की कानून व्यवस्था, आदिवासी सुरक्षा और भ्रष्ट स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है। आने वाले दिनों में यह विवाद झारखंड की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला सकता है।
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