Kharsawan Mystery: खौफनाक पहेली, पुणे से घर जा रहे युवक की खरसावां में संदिग्ध मौत, पेड़ से लटका मिला शव, हत्या या आत्महत्या?
आज़ाद हिंद एक्सप्रेस से गुवाहाटी जा रहे असम के युवक कैलाश नाथ का शव खरसावां के कुदासिंगी गांव में पेड़ से झूलता मिलने से हड़कंप मच गया है। जमीन से सटे पैर और ट्रेन में हुई कहासुनी के बीच छिपे इस रोंगटे खड़े कर देने वाले रहस्य की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इस 'ट्रेन यात्रा' के खूनी मोड़ से हमेशा अनजान रह जाएंगे।
सरायकेला/खरसावां, 14 जनवरी 2026 – सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां थाना क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने रेल यात्रियों की सुरक्षा और मानवीय रिश्तों पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। पुणे से अपने घर गुवाहाटी जाने के लिए निकले 30 वर्षीय कैलाश नाथ की यात्रा का अंत खरसावां के कुदासिंगी गांव के पास एक पेड़ पर झूलती लाश के रूप में हुआ। मंगलवार को जब ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक से महज 100 फीट की दूरी पर एक युवक का शव देखा, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक के पैर जमीन से सटे हुए थे, जो इस पूरे मामले को सामान्य आत्महत्या के बजाय एक सोची-समझी हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। आखिर आज़ाद हिंद एक्सप्रेस में ऐसा क्या हुआ कि एक हंसता-खेलता युवक मौत के फंदे तक पहुँच गया?
सफर, संघर्ष और सस्पेंस: ट्रेन की वो आखिरी रात
असम के सोनितपुर जिला निवासी कैलाश नाथ पुणे से गुवाहाटी के लिए आज़ाद हिंद एक्सप्रेस में सवार हुए थे।
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ट्रेन में नोकझोंक: जांच में यह बात सामने आई है कि राउरकेला स्टेशन के पास कैलाश की किसी अज्ञात युवक से तीखी बहस हुई थी।
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बीच रास्ते में उतरना: गुवाहाटी जाने वाले कैलाश आखिर खरसावां जैसे छोटे स्टेशन पर क्यों उतरे, यह सबसे बड़ा सवाल है। क्या उन्हें जबरन उतारा गया या वे किसी के डर से वहां उतरे?
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संदिग्ध हालात: कुदासिंगी गांव के पास जिस पेड़ से शव लटका मिला, वहां की स्थिति काफी संदिग्ध है। जमीन से पैर सटे होना इस बात का पुख्ता संकेत है कि यह सुसाइड नहीं, बल्कि 'क्राइम सीन' को सुसाइड का रूप देने की कोशिश हो सकती है।
पुलिस की तफ्तीश: हर एंगल पर पैनी नजर
घटना की सूचना मिलते ही आमदा ओपी प्रभारी रामरेखा पासवान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और शव को अपने कब्जे में लिया।
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पोस्टमार्टम की रिपोर्ट: पुलिस ने शव को सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया है। डॉक्टरों की रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि मौत दम घुटने से हुई या फंदे पर लटकाने से पहले उसे मारा गया था।
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परिजन अलर्ट: असम में रहने वाले कैलाश के परिवार को सूचित कर दिया गया है। उनके आने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि कैलाश का पुणे में किसी से कोई विवाद था या नहीं।
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ट्रेन के सहयात्री: पुलिस अब रेलवे पुलिस (GRP) की मदद से उन सहयात्रियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिन्होंने राउरकेला के पास हुई उस 'नोकझोंक' को देखा था।
खरसावां संदिग्ध मौत: मुख्य विवरण (Mystery Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| मृतक का नाम | कैलाश नाथ (30 वर्ष), निवासी: सोनितपुर, असम |
| ट्रेन का नाम | आज़ाद हिंद एक्सप्रेस (पुणे से गुवाहाटी) |
| घटनास्थल | कुदासिंगी गांव, खरसावां (रेलवे ट्रैक के पास) |
| संदिग्ध बिंदु | पैर जमीन से सटे हुए थे, ट्रेन में विवाद हुआ था |
| जांच अधिकारी | रामरेखा पासवान (ओपी प्रभारी, आमदा) |
इतिहास का पन्ना: खरसावां रेलवे सेक्शन और 'अनसुलझी मौतों' का रिकॉर्ड
खरसावां और टाटानगर के बीच का यह रेलवे खंड ऐतिहासिक रूप से झारखंड के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक रहा है। 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल-नागपुर रेलवे के समय से ही यह मार्ग दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ता आया है। इतिहास गवाह है कि दुर्गम झाड़ियों और सुनसान ट्रैक के कारण यह क्षेत्र अपराधियों के लिए 'डंपिंग ग्राउंड' के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। साल 2014 और 2021 में भी आज़ाद हिंद और हावड़ा-मुंबई रूट की ट्रेनों से यात्रियों के गायब होने और बाद में इसी तरह संदिग्ध हालात में शव मिलने के मामले सामने आए थे। कैलाश नाथ की मौत उसी डरावने इतिहास की पुनरावृत्ति लग रही है, जहाँ चलती ट्रेन में होने वाले छोटे विवाद अक्सर खूनी रंजिश में तब्दील हो जाते हैं।
ग्रामीणों की गवाही: हत्या की प्रबल आशंका
कुदासिंगी गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने सुबह जब शव देखा, तो फंदा गले में बहुत ढीला था और शरीर का पूरा वजन जमीन पर टिके पैरों पर था।
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साक्ष्य मिटाने की कोशिश: आमतौर पर ऐसी स्थिति तब होती है जब व्यक्ति की हत्या कहीं और कर दी जाए और फिर उसे पेड़ से लटका दिया जाए।
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पुलिस का दावा: पुलिस का कहना है कि वे आत्महत्या के पहलू को भी पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं, क्योंकि कभी-कभी मानसिक तनाव में व्यक्ति इस तरह के कदम उठाता है।
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सीसीटीवी फुटेज: खरसावां और राउरकेला स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि देखा जा सके कि कैलाश के साथ कोई और भी ट्रेन से उतरा था या नहीं।
न्याय की पुकार
असम का एक बेटा अपने घर की दहलीज तक पहुँचने से पहले ही काल के गाल में समा गया। यह घटना न केवल पुलिस के लिए चुनौती है, बल्कि उन हजारों रेल यात्रियों के लिए भी चेतावनी है जो सफर में अनजान लोगों से उलझ बैठते हैं।
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