Weather Alert : झारखंड में कुदरत का कहर, चतरा में बिजली गिरने से 3 महिलाओं की मौत, 20 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी
झारखंड में बंगाल की खाड़ी से उठे साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने तबाही मचा दी है। चतरा में वज्रपात से तीन महिलाओं की मौत और कई जिलों में भारी ओलावृष्टि के बाद मौसम विभाग ने 70 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले 48 घंटों की इस बड़ी चेतावनी की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
रांची/झारखंड, 21 मार्च 2026 – झारखंड में कुदरत ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय हुए साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने पूरे राज्य के मौसम को पलक झपकते ही बदल दिया है। शुक्रवार शाम को कोडरमा, गिरिडीह और चतरा में आए भीषण तूफान ने जान-माल की भारी क्षति पहुँचाई है। सबसे हृदयविदारक खबर चतरा जिले से आई है, जहाँ आसमानी बिजली (वज्रपात) ने तीन जिंदगियां लील लीं। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे झारखंड के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है।
चतरा में मातम: वज्रपात ने छीनी तीन जिंदगियां
शुक्रवार की शाम चतरा के पत्थलगड़ा प्रखंड के लिए काली साबित हुई।
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सिंघानी और जेहरा का हादसा: अचानक शुरू हुई कड़क के साथ बिजली सीधे खेतों और घरों के पास गिरी। इसकी चपेट में आने से तीन महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई।
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झुलसे लोग: इस घटना में दो अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इलाके में इस प्राकृतिक आपदा के बाद से दहशत और शोक का माहौल है।
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इतिहास गवाह है: झारखंड का छोटा नागपुर पठार अपनी भौगोलिक संरचना के कारण देश के सबसे ज्यादा 'लाइटनिंग प्रोन' (वज्रपात संभावित) क्षेत्रों में से एक रहा है। हर साल प्री-मानसून सीजन में यहाँ बिजली गिरने से दर्जनों मौतें होती हैं।
60 से 70 किमी की रफ्तार: इन जिलों में 'हाई अलर्ट'
मौसम केंद्र रांची के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटे राज्य के लिए बेहद संवेदनशील हैं।
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भीषण आंधी का क्षेत्र: रांची, धनबाद, दुमका, देवघर, बोकारो और हजारीबाग सहित उत्तर-पूर्वी जिलों में 60 से 70 किमी/घंटा की रफ्तार से विनाशकारी हवाएं चल सकती हैं।
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ओलावृष्टि का खतरा: धनबाद और बोकारो में पहले ही ओले गिर चुके हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि ओलावृष्टि से कच्चे मकानों और वाहनों को नुकसान पहुँच सकता है।
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सिंहभूम और पलामू: खूँटी, सरायकेला, पलामू और लातेहार जैसे क्षेत्रों में भी 50-60 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।
किसानों के लिए 'ब्लैक डे': फसलों पर संकट
खेतों में लहलहाती फसलों के लिए यह मौसम किसी दुश्मन से कम नहीं है।
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ओलावृष्टि की मार: ओले गिरने से रबी की बची हुई फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका है।
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विशेष सलाह: मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को सख्त हिदायत दी है कि वे खराब मौसम के दौरान खेतों में न जाएं और ऊंचे पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण बिल्कुल न लें।
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तापमान का खेल: अगले तीन दिनों में पारे में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी, जिससे अचानक ठंडक का एहसास होगा, लेकिन इसके ठीक बाद गर्मी दोबारा वापसी करेगी।
पिछले 24 घंटे का रिपोर्ट कार्ड: कहाँ कितनी बारिश?
झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम का अलग-अलग मिजाज दिखा।
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सर्वाधिक बारिश: बोकारो के नावाडीह में सबसे ज्यादा 43.0 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
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गर्मी का टॉर्चर: डाल्टेनगंज में पारा 37.8 डिग्री तक पहुँचा, जबकि लातेहार में न्यूनतम तापमान 17.6 डिग्री रहा।
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धनबाद में ओले: धनबाद के कई इलाकों में बड़े आकार के ओले गिरे, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
राहत की खबर: कब मिलेगा छुटकारा?
लगातार जारी इस कुदरती कहर के बीच राहत की बात यह है कि यह सिस्टम ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 22 मार्च से बादल छंटने शुरू हो जाएंगे। इसके बाद मौसम शुष्क होगा और आसमान साफ होने के साथ तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। यानी 22 मार्च के बाद ही लोग बेफिक्र होकर बाहर निकल सकेंगे।
झारखंड में मौसम का यह मिजाज केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि सुरक्षा के प्रति सजग रहने का संदेश है। चतरा की घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने हम कितने बेबस हैं। ऑरेंज अलर्ट का मतलब है कि खतरा टला नहीं है। ऐसे में प्रशासन की सलाह मानें, सुरक्षित रहें और ओलावृष्टि व बिजली की चमक के दौरान पक्के घरों के भीतर ही रहें।
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