Sundernagar Accident: सुंदरनगर फाटक के पास पैसेंजर ट्रेन से टकराए मवेशी, बछड़े की मौत और दो घायल
जमशेदपुर के सुंदरनगर फाटक के पास पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आने से एक बछड़े की मौत हो गई और दो मवेशी घायल हैं। आधे घंटे तक ट्रेन रुकने, यात्रियों की परेशानी और स्थानीय लोगों की सुरक्षा दीवार की मांग की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/सुंदरनगर, 8 अप्रैल 2026 – लौहनगरी के सुंदरनगर फाटक के पास बुधवार की सुबह एक दर्दनाक रेल हादसा सामने आया है। टाटानगर रेल खंड पर चराई के दौरान मवेशियों का एक झुंड पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आ गया। इस भीषण टक्कर में एक बछड़े की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस घटना के कारण डाउन लाइन पर ट्रेन का परिचालन करीब आधे घंटे तक बाधित रहा, जिससे सैकड़ों यात्रियों को भीषण गर्मी में असुविधा का सामना करना पड़ा। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में रेलवे प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष देखा जा रहा है।
ट्रैक पर मची चीख-पुकार: जब बेजुबानों पर काल बनकर टूटी ट्रेन
बुधवार सुबह करीब 9 बजे, जब जनजीवन अपनी रफ्तार पकड़ रहा था, तभी सुंदरनगर फाटक के पास यह हादसा हुआ।
-
चराई के दौरान हादसा: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मवेशियों का एक झुंड रेलवे ट्रैक पार कर पास के मैदान में चराई के लिए जा रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन वहां से गुजरी।
-
बछड़े की दर्दनाक मौत: ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि मवेशियों को संभलने का मौका नहीं मिला। एक छोटा बछड़ा सीधे इंजन की चपेट में आ गया और उसकी तत्काल मौत हो गई। दो अन्य मवेशी भी ट्रेन के झटके से दूर जा गिरे और लहूलुहान हो गए।
-
आधे घंटे का ब्रेक: लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए, जिसके बाद ट्रेन ट्रैक पर ही खड़ी हो गई। करीब 30 मिनट तक जांच और ट्रैक क्लियर होने के बाद ही ट्रेन आगे बढ़ सकी।
स्थानीय लोगों का आक्रोश: सुरक्षा दीवार की उठी मांग
घटना की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में रेलवे ट्रैक पर जमा हो गए। ग्रामीणों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
-
फेंसिंग का अभाव: लोगों का कहना है कि सुंदरनगर फाटक के आसपास का इलाका घनी आबादी और चरागाहों से सटा हुआ है, लेकिन यहाँ रेलवे की ओर से कोई सुरक्षा दीवार या फेंसिंग नहीं की गई है।
-
आए दिन होते हैं हादसे: ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार मवेशी और कभी-कभी इंसान भी इस असुरक्षित ट्रैक के कारण हादसों का शिकार हो चुके हैं।
-
प्रशासन को चेतावनी: स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही ट्रैक के दोनों ओर फेंसिंग का निर्माण नहीं शुरू किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।
हादसों का 'ब्लैक स्पॉट'
टाटानगर रेलवे स्टेशन से सटा सुंदरनगर का यह रेल खंड ऐतिहासिक रूप से परिचालन के लिहाज से बेहद व्यस्त माना जाता है।
-
टाटा-बादामपहाड़ और खड़गपुर रूट: यह ट्रैक दक्षिण-पूर्व रेलवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहाँ मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों का दबाव 24 घंटे रहता है।
-
शहरी विस्तार और चुनौतियां: जैसे-जैसे जमशेदपुर का विस्तार सुंदरनगर की ओर हुआ है, रेलवे ट्रैक के किनारे आबादी बढ़ती गई है। चरागाहों की कमी के कारण बेजुबान मवेशी अक्सर ट्रैक का रुख करते हैं, जो उनके लिए काल साबित होता है।
-
रेलवे के पुराने नियम: रेलवे अधिनियम के तहत ट्रैक पर मवेशियों का आना अवैध है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर घनी बस्तियों के बीच से गुजरने वाले इन ट्रैकों पर बिना बाउंड्री वॉल के हादसों को रोकना नामुमकिन है।
रेलवे और प्रशासन की जिम्मेदारी
हादसे के बाद रेलवे के अधिकारियों को सूचना दे दी गई है।
-
ट्रैक क्लियरेंस: जीआरपी और स्थानीय कर्मियों ने ट्रैक से मृत बछड़े को हटाकर स्थिति को सामान्य किया। घायल मवेशियों का स्थानीय स्तर पर उपचार कराने की कोशिश की जा रही है।
-
सुरक्षा ऑडिट की मांग: स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि रेल मंत्रालय को सुंदरनगर जैसे संवेदनशील इलाकों में 'क्रैश बैरियर' या दीवार बनाने के लिए विशेष फंड जारी करना चाहिए।
-
यात्रियों की परेशानी: ट्रेन रुकने के कारण टाटानगर जाने वाले दैनिक यात्रियों और नौकरीपेशा लोगों को काफी देरी हुई। सुबह के व्यस्त समय में हुए इस हादसे ने रेलवे के टाइम-टेबल को भी प्रभावित किया।
सुंदरनगर फाटक के पास हुआ यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि विकास और सुरक्षा के बीच एक गहरी खाई है। एक बेगुनाह बछड़े की जान जाना और ट्रेन का घंटों रुकना यह साबित करता है कि ट्रैक के किनारे सुरक्षा दीवार अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है। सुंदरनगर की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है; उन्हें कंक्रीट की वह दीवार चाहिए जो उनके मवेशियों और बच्चों की जान सुरक्षित रख सके।
What's Your Reaction?


