Dalma Picnic: क्षत्राणियों का रेला, दलमा में जमशेदपुर की 250 क्षत्रिय महिलाओं ने मचाई धूम, मरीन ड्राइव पर समाज को मजबूत करने की हुई महाचर्चा
जमशेदपुर के दलमा व्यू पॉइंट पर झारखंड क्षत्रिय महिला संघ ने वनभोज के साथ शक्ति प्रदर्शन किया है। साकची से लेकर गोविंदपुर तक की 250 महिलाओं का जमावड़ा, रोमांचक खेल और समाज को उन्नत बनाने के उन गुप्त संकल्पों की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी क्षत्रिय समाज की इस सबसे बड़ी एकजुटता को देखने से चूक जाएंगे।
जमशेदपुर, 31 दिसंबर 2025 – लौहनगरी जमशेदपुर के मरीन ड्राइव स्थित दलमा व्यू पॉइंट पर आज एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। साल के आखिरी दिन, जब पूरी दुनिया जश्न की तैयारी में डूबी है, झारखंड क्षत्रिय महिला संघ की क्षत्राणियों ने अपनी एकजुटता और शक्ति का परिचय दिया। संघ की अध्यक्ष डॉक्टर कविता परमार और मंजू सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य वनभोज (पिकनिक) में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को लेकर एक नई इबारत लिखी गई। टेल्को से लेकर आदित्यपुर तक, शहर के कोने-कोने से आईं लगभग 250 महिलाओं ने दलमा की तलहटी में समाज को उन्नत और संगठित बनाने की शपथ ली।
शौर्य और शक्ति का संगम: 11 इकाइयों का एक मंच
यह पिकनिक महज एक आउटिंग नहीं थी, बल्कि जमशेदपुर की विभिन्न इकाइयों का महामिलन था।
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इकाइयों की भागीदारी: साकची, टेल्को, बागबेड़ा, सीतारामडेरा, बिष्टुपुर, कदमा, आदित्यपुर, सिदगोड़ा, सुंदरनगर और गोविंदपुर इकाई की महिलाओं ने पारंपरिक जोश के साथ इसमें हिस्सा लिया।
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संगठन की ताकत: इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि झारखंड क्षत्रिय महिला संघ आज शहर के सबसे मजबूत और सक्रिय संगठनों में से एक है।
खेल, खिलखिलाहट और पुरस्कार: मनोरंजन का तड़का
दलमा की वादियों में हंसी के ठहाके तब गूंज उठे जब प्रीति, शिवानी, अर्चना और रीता ने खेलों का सिलसिला शुरू किया।
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रोमांचक खेल: म्यूजिकल चेयर, पासिंग बॉल और 'होजी' जैसे खेलों ने सभी का बचपन ताजा कर दिया।
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जीत का जज्बा: प्रत्येक खेल में कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहाँ प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली विजेताओं को विशेष पुरस्कारों से नवाजा गया।
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परिचय सत्र: खेल के बाद एक परिचय सत्र का आयोजन हुआ, जिसने अलग-अलग बस्तियों से आईं क्षत्राणियों को एक-दूसरे के करीब ला दिया।
झारखंड क्षत्रिय महिला संघ वनभोज: मुख्य विवरण (Event Snapshot)
| विवरण | जानकारी |
| आयोजन स्थल | दलमा व्यू पॉइंट, मरीन ड्राइव (जमशेदपुर) |
| नेतृत्व | डॉ. कविता परमार एवं मंजू सिंह |
| कुल भागीदारी | लगभग 250 महिलाएं |
| मुख्य चर्चा | समाज को उन्नत और मजबूत बनाने की रणनीति |
| विशेष अतिथि | देविका सिंह, मंजू रानी सिंह, सत्या सिंह, प्रतिमा सिंह |
इतिहास और विरासत: क्षत्रिय समाज का गौरवशाली सफर
क्षत्रिय समाज का इतिहास हमेशा से समाज की रक्षा और नेतृत्व का रहा है। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में झारखंड क्षत्रिय महिला संघ ने दशकों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। वनभोज की यह परंपरा जिसे पूर्व में 'पारिवारिक मिलन' कहा जाता था, अब एक सशक्त मंच बन चुकी है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो क्षत्रिय समाज ने झारखंड के विकास और सामाजिक सुधारों में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। आज के इस आयोजन में भी उसी पुरानी परंपरा की झलक दिखी, जहाँ 'कल' की नींव 'आज' की चर्चाओं में रखी गई।
भविष्य की रणनीति: समाज को कैसे बनाएं मजबूत?
पिकनिक के बीच एक गंभीर और सकारात्मक सत्र भी चला, जिसमें समाज के उत्थान पर विमर्श हुआ।
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सकारात्मक चर्चा: डॉ. कविता परमार ने समाज की महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।
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अनुभवी सुझाव: संघ की संरक्षिका देविका सिंह, मंजू रानी सिंह, सत्या सिंह और प्रतिमा सिंह ने अपने अनुभवों की पोटली खोली। उन्होंने सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं और समाज की मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
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इकाई अध्यक्षों का योगदान: वनभोज को सफल बनाने में सभी 11 इकाइयों की अध्यक्षों ने दिन-रात एक कर दिया था, जिसकी सराहना नेतृत्व ने खुले दिल से की।
एकजुटता का संदेश
मरीन ड्राइव के किनारे आयोजित यह वनभोज केवल खाना-पीना और खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक संदेश था कि जमशेदपुर की क्षत्राणियां अब समाज के नवनिर्माण के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रकृति की गोद में बिताए इन पलों ने सभी के मन में एक नया उत्साह भर दिया है।
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