Golmuri Suicide : जमशेदपुर के गोलमुरी में विवाहिता ने बाथरूम में की खुदकुशी, बीमारी से थी परेशान
जमशेदपुर के गोलमुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत रामदेव बागान में 30 वर्षीय राशि मन्ना ने बीमारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली है। घर के बाथरूम में चुन्नी के सहारे लगाए गए फंदे और पुलिस की शुरुआती जांच की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/लौहनगरी, 19 मार्च 2026 – औद्योगिक नगरी जमशेदपुर के गोलमुरी थाना क्षेत्र से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के रामदेव बागान (जी-32) इलाके में रहने वाली 30 वर्षीय विवाहिता राशि मन्ना ने बुधवार तड़के अपने ही घर में आत्मघाती कदम उठा लिया। राशि ने घर के बाथरूम में अपनी चुन्नी का फंदा बनाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना ने पूरे रामदेव बागान इलाके को शोक में डुबो दिया है। घटना के बाद से मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है।
बीमारी और अवसाद का घातक मेल: ऐसे हुई वारदात
घटना बुधवार सुबह की है जब घर के अन्य सदस्य अपनी दिनचर्या में व्यस्त होने की तैयारी कर रहे थे।
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खौफनाक खोज: जब राशि काफी देर तक बाथरूम से बाहर नहीं निकली, तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। दरवाजा खोलने पर अंदर का नजारा देख सबके होश उड़ गए। राशि चुन्नी के सहारे फंदे से लटकी हुई थी।
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बीमारी का तनाव: मृतका के पति राजेंद्र नाथ मन्ना ने पुलिस को बताया कि राशि पिछले कुछ दिनों से शारीरिक रूप से अस्वस्थ चल रही थी। लगातार बीमारी के कारण वह गहरे मानसिक तनाव (डिप्रेशन) में थी।
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पुलिसिया कार्रवाई: सूचना मिलते ही गोलमुरी थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लिया। गुरुवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
गोलमुरी का 'रामदेव बागान' और जमशेदपुर की सामाजिक बुनावट
जमशेदपुर का गोलमुरी इलाका ऐतिहासिक रूप से शहर के सबसे पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक रहा है।
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श्रमिक विरासत: रामदेव बागान जैसे इलाके टाटा स्टील और अन्य सहयोगी कंपनियों में काम करने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों की पहचान रहे हैं। यहाँ का सामाजिक ढांचा हमेशा से काफी मजबूत रहा है, जहाँ पड़ोसी एक-दूसरे के सुख-दुख में शरीक होते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य का ऐतिहासिक संकट: जमशेदपुर के औद्योगिक इतिहास में पिछले दो दशकों में एक चिंताजनक बदलाव देखा गया है। 90 के दशक तक जहाँ शारीरिक बीमारियां मुख्य चिंता होती थीं, वहीं 2010 के बाद 'क्रोनिक इलनेस' (लंबे समय तक चलने वाली बीमारी) से उपजा मानसिक तनाव आत्महत्याओं का एक बड़ा ऐतिहासिक कारण बनकर उभरा है।
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बदलती जीवनशैली: गोलमुरी और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते एकाकीपन और बीमारी के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण ने कई बार ऐसे दुखद अंत लिखे हैं। राशि मन्ना की यह घटना हमें याद दिलाती है कि जमशेदपुर जैसे भागदौड़ वाले शहर में 'बीमारी' केवल शरीर को नहीं, बल्कि इंसान की जीने की इच्छाशक्ति को भी तोड़ रही है। इतिहास गवाह है कि जमशेदपुर में इस तरह के 'साइलेंट सुसाइड' के मामले अक्सर उन घरों से सामने आते हैं जहाँ बाहर से सब सामान्य दिखता है, लेकिन भीतर कोई लंबे समय से अपनी सेहत से जंग लड़ रहा होता है।
पुलिस की जांच: हर पहलू पर पैनी नजर
गोलमुरी पुलिस इस मामले को केवल बीमारी से जोड़कर नहीं देख रही है, बल्कि सभी संभावित एंगल से जांच कर रही है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पुलिस को पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है ताकि मौत के सटीक समय और परिस्थितियों की पुष्टि हो सके।
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पारिवारिक बयान: राजेंद्र नाथ मन्ना और अन्य रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या राशि का कहीं मानसिक उपचार चल रहा था।
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प्रथम दृष्टया साक्ष्य: शुरुआती जांच में मामला बीमारी से उत्पन्न मानसिक अवसाद का ही लग रहा है, क्योंकि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
गोलमुरी की यह घटना एक बार फिर समाज को झकझोरने के लिए काफी है। 30 साल की युवा उम्र में राशि मन्ना का इस तरह जाना केवल एक मौत नहीं, बल्कि बीमारी और अकेलेपन की त्रासदी है। रामदेव बागान की गलियों में आज सन्नाटा है, लेकिन यह सन्नाटा सवाल कर रहा है कि क्या हम अपने अपनों के शारीरिक दर्द के पीछे छिपे मानसिक घावों को देख पा रहे हैं? गोलमुरी पुलिस मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी है, लेकिन राशि की कमी उसके परिवार को हमेशा खलेगी।
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