Jamshedpur Demolition Uproar: भुइयांडीह में 2 दिन से जारी बवाल, दर्जनों घर तोड़े जाने पर महिलाएं सड़क पर, बिना नोटिस के घर क्यों ढहाए गए और पुनर्वास का क्या होगा? 

जमशेदपुर के भुइयांडीह में प्रशासन के खिलाफ महा-आक्रोश! सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बिना पूर्व सूचना घरों को ढहाने पर 500 से अधिक लोग सड़क पर उतरे। मशाल जुलूस के बाद विशाल रैली, पीड़ितों ने पूछा- संविधान दिवस पर ही क्यों गिराए गए घर?

Nov 29, 2025 - 14:33
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Jamshedpur Demolition Uproar: भुइयांडीह में 2 दिन से जारी बवाल, दर्जनों घर तोड़े जाने पर महिलाएं सड़क पर, बिना नोटिस के घर क्यों ढहाए गए और पुनर्वास का क्या होगा? 
Jamshedpur Demolition Uproar: भुइयांडीह में 2 दिन से जारी बवाल, दर्जनों घर तोड़े जाने पर महिलाएं सड़क पर, बिना नोटिस के घर क्यों ढहाए गए और पुनर्वास का क्या होगा? 

जमशेदपुर, 29 नवंबर 2025 जमशेदपुर (Jamshedpur) के भुइयांडीह (Bhuiyandih) इलाके में सड़क चौड़ीकरण (Road Widening) अभियान (Campaign) के दौरान दर्जनों गरीब (Poor) बस्तीवासियों (Slum Dwellers) के घरों को ढहाए (Demolished) जाने के बाद अब यह मामला (Issue) एक बड़ा राजनीतिक (Political) और सामाजिक (Social) विवाद (Controversy) बनता जा रहा है। बिना किसी पूर्व नोटिस (Prior Notice) के की गई इस अचानक (Sudden) प्रशासनिक कार्रवाई (Administrative Action) के खिलाफ स्थानीय लोग लगातार दूसरे दिन (Second Consecutive Day) सड़क पर उतर आए हैं और उनका आक्रोश (Anger) चरम पर (Peak) है। लोग सवाल (Questioning) कर रहे हैं कि क्या कानून (Law) सिर्फ गरीबों के लिए ही है?

मशाल जुलूस के बाद विशाल रैली, महिलाओं की जोरदार मांग

भुइयांडीह के बस्तीवासियों ने प्रशासन की 'मनमानी' (Arbitrariness) के खिलाफ अपना विरोध (Protest) दर्ज कराने के लिए एक चरणबद्ध (Phased) आंदोलन (Agitation) शुरू कर दिया है। शुक्रवार (Friday) देर रात, सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर मशाल जुलूस (Torchlight Procession) निकाला और प्रशासनिक अधिकारियों (Administrative Officials) के खिलाफ नारेबाजी (Sloganeering) की।

  • शनिवार का प्रदर्शन: यह विरोध शनिवार (Saturday) को और तेज हो गया, जब भुइयांडीह पूजा मैदान से जिला मुख्यालय (District Headquarters) तक एक विशाल प्रदर्शन रैली (Massive Rally) निकाली गई।

  • महिलाओं का अग्रणी (Leading) योगदान: इस रैली की खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं की उपस्थिति (Presence) खास थी। हाथों में तख्तियां (Placards) लेकर उन्होंने जोर-शोर से 'पुनर्वास' (Rehabilitation) की मांग उठाई।

संविधान दिवस पर घर ढहाए जाने पर सवाल

बस्तीवासियों का सबसे बड़ा आरोप और सवाल यह है कि प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए संविधान दिवस (Constitution Day) जैसे महत्वपूर्ण (Important) दिन को ही क्यों चुना? लोगों का कहना है कि एक तरफ देश संविधान के अधिकारों (Rights) का जश्न (Celebration) मना रहा था, वहीं दूसरी तरफ उनसे उनके सिर पर से छत (Roof) छीन ली गई।

प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई न सिर्फ अमानवीय (Inhumane) और असंवेदनशील (Insensitive) थी, बल्कि पूरी तरह से जल्दबाजी (Haste) और मनमानी (Arbitrary) से की गई थी। किसी भी प्रभावित परिवार (Affected Family) को कोई पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था (Alternative Arrangement) नहीं दी गई।

पुनर्वास नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने झारखंड राज्य सरकार (Jharkhand State Government) से इस पूरे प्रकरण (Episode) पर गंभीरता (Seriousness) से विचार करने और दोषी अधिकारियों (Guilty Officials) पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को 'उचित पुनर्वास' यानी रहने का ठिकाना (Settlement) और क्षतिपूर्ति (Compensation) नहीं मिल जाती, तब तक उनका चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।