Gumla Fire : गुमला के बाजारटांड़ में आधी रात को भीषण आग का तांडव, जिंदा जल गईं 150 मुर्गियां, कबाड़ी की दुकान जलकर हुई राख
गुमला के बाजारटांड़ में गुरुवार रात करीब 1 बजे लगी भीषण आग ने कबाड़ी और मुर्गी दुकानों को पूरी तरह स्वाहा कर दिया है। 150 मुर्गियों और 70 बत्तखों के जिंदा जलने और लाखों के नुकसान की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
गुमला, 27 मार्च 2026 – झारखंड के गुमला शहर में गुरुवार की आधी रात उस वक्त कोहराम मच गया, जब बाजारटांड़ स्थित दुकानों में अचानक भीषण आग लग गई। रात के सन्नाटे में उठी आग की गगनचुंबी लपटों ने देखते ही देखते कबाड़ी और मुर्गी की दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण अग्निकांड में लाखों रुपये की संपत्ति जलकर खाक हो गई है, वहीं बेजुबान पक्षियों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फायर ब्रिगेड के पहुँचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने मोर्चा संभाल लिया था, वरना पूरा बाजार इसकी चपेट में आ सकता था।
रात 1 बजे का 'अग्नि तांडव': जिंदा जल गए 220 बेजुबान
बाजारटांड़ में जब लोग गहरी नींद में थे, तभी अचानक दुकानों से धुएं का गुबार और लपटें उठने लगीं।
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मुर्गी दुकान में भारी नुकसान: मोहम्मद गुड्डू की मुर्गी दुकान में आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। दुकान के अंदर रखी करीब 150 मुर्गियां और 70 बत्तखें जिंदा जल गईं।
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कबाड़ी की दुकान स्वाहा: आग की चपेट में आने से पास ही स्थित सब्बू खान की कबाड़ी दुकान भी पूरी तरह नष्ट हो गई। लोहे और प्लास्टिक के सामान के बीच आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था।
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लाखों का नुकसान: शुरुआती आकलन के अनुसार, दोनों दुकानदारों को लाखों रुपये की चपत लगी है। उनकी जमा-पूँजी राख के ढेर में तब्दील हो गई है।
देवदूत बने स्थानीय लोग: प्याऊ के पानी से बुझाई आग
हादसे के वक्त प्रशासन और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, लेकिन स्थानीय युवाओं ने बहादुरी का परिचय दिया।
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प्याऊ बना सहारा: दमकल के इंतज़ार में समय गँवाने के बजाय लोगों ने पास के सरकारी प्याऊ से पानी लाना शुरू किया।
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एक घंटे का संघर्ष: करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लोगों ने आग को चारों तरफ से घेर लिया, जिससे बगल की अन्य दुकानें सुरक्षित बच गईं।
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देर से पहुँची दमकल: फायर ब्रिगेड की टीम रात करीब 2:20 बजे मौके पर पहुँची और बची-कुची आग को पूरी तरह बुझाया। तब तक मुख्य दुकानों का ढांचा ही बचा था।
गुमला के बाजारों में आगजनी का इतिहास और लापरवाही
गुमला के भीड़भाड़ वाले बाजारों में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है। यह शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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शॉर्ट सर्किट या साजिश?: हालांकि इस बार आशंका जताई जा रही है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने जलता हुआ प्लास्टिक फेंका था, लेकिन इतिहास गवाह है कि बाजारटांड़ जैसे इलाकों में बिजली के झूलते तार (Short Circuit) हमेशा से खतरा रहे हैं।
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फायर स्टेशन की दूरी: गुमला शहर के मुख्य बाजारों तक फायर ब्रिगेड के पहुँचने में अक्सर देरी होती है, जिसके कारण छोटी सी आग बड़े अग्निकांड का रूप ले लेती है।
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सुरक्षा मानकों की कमी: कबाड़ की दुकानों में ज्वलनशील पदार्थों का असुरक्षित भंडारण आग को भड़काने में घी का काम करता है।
अगला कदम: जांच, मुआवजा और भविष्य की तैयारी
घटना के बाद से ही इलाके के दुकानदारों में भारी रोष और दुख का माहौल है।
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प्रशासन से मांग: प्रभावित दुकानदार मोहम्मद गुड्डू और सब्बू खान ने जिला प्रशासन से नुकसान का उचित आकलन कर जल्द से जल्द मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
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सीसीटीवी और फॉरेंसिक जांच: पुलिस अब इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि 'जलता प्लास्टिक' फेंकने वाले संदिग्ध की पहचान की जा सके।
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बाजार का फायर ऑडिट: व्यापारियों ने मांग की है कि बाजारटांड़ इलाके में फायर हाइड्रेंट की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति में तुरंत पानी उपलब्ध हो सके।
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