Giridih Fire: कालीबाड़ी चौक पर चार मंजिला इमारत की छत धधकी, जनरेटर और स्टोर रूम जलकर खाक, गिरिडीह में मची भारी अफरा-तफरी
गिरिडीह के कालीबाड़ी चौक स्थित पशुपतिनाथ टिबड़ेवाल के चार मंजिला मकान की छत पर भीषण आग लग गई। स्टोर रूम में रखे जनरेटर और कबाड़ के साथ फैली इस आग और फायर ब्रिगेड की मशक्कत की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
गिरिडीह/नगर थाना, 2 अप्रैल 2026 – गिरिडीह शहर का व्यस्त इलाका कालीबाड़ी चौक गुरुवार को उस वक्त दहल उठा जब एक प्रतिष्ठित व्यवसायी के चार मंजिला मकान की छत से आग की ऊंची लपटें और काला धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, जिससे पूरे मुहल्ले में अफरा-तफरी मच गई। यह हादसा पशुपतिनाथ टिबड़ेवाल के आवास और दुकान वाली इमारत में हुआ। गनीमत रही कि समय रहते पड़ोसियों की सतर्कता और दमकल विभाग की मुस्तैदी से एक बड़ी अनहोनी टल गई, वरना घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में आग भयानक तबाही मचा सकती थी।
छत पर धधका 'काल': जनरेटर और शॉर्ट सर्किट की आशंका
हादसा तब हुआ जब परिवार के सदस्य नीचे के तलों पर अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे।
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पड़ोसियों ने दिया अलर्ट: पशुपतिनाथ टिबड़ेवाल ने बताया कि उनका पूरा परिवार पहली मंजिल पर रहता है और नीचे दुकान है। चौथी मंजिल की छत पर बने स्टोर रूम में अचानक आग लग गई। इसकी सूचना उन्हें पड़ोसियों ने फोन कर दी, जब उन्होंने छत से धुआं उठते देखा।
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विकराल रूप: जब तक परिवार के सदस्य ऊपर पहुँचे, आग पूरे स्टोर रूम में फैल चुकी थी। वहां दुकान और घर का पुराना कबाड़ सामान रखा हुआ था, जिसने ईंधन का काम किया।
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खतरे की घंटी: स्टोर रूम के ठीक बगल में तेल से भरा एक बड़ा जनरेटर, इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड और तारों का जाल था। अगर आग जनरेटर के तेल टैंक तक पहुँच जाती, तो एक बड़ा विस्फोट हो सकता था।
फायर ब्रिगेड की एंट्री: एक घंटे की कड़ी मशक्कत
आग की भयावहता को देखते हुए परिजनों ने पहले खुद पानी डालकर उसे बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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त्वरित सूचना: तुरंत अग्निशमन विभाग (Fire Brigade) को सूचित किया गया। नगर थाना क्षेत्र होने के कारण दमकल की टीम कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुँच गई।
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कड़ी मशक्कत: दमकल कर्मियों ने पाइप के जरिए चौथी मंजिल तक पानी पहुँचाया। करीब एक घंटे की कड़ी जद्दोजहद के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
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नुकसान का आकलन: इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, जो एक बड़ी राहत की बात है। हालांकि, स्टोर रूम में रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया है।
कालीबाड़ी चौक और गिरिडीह का इतिहास: अग्नि सुरक्षा की चुनौती
गिरिडीह का कालीबाड़ी चौक इलाका शहर के सबसे पुराने और घनी आबादी वाले व्यावसायिक केंद्रों में से एक है।
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संकरी गलियां और बहुमंजिला इमारतें: यहाँ के अधिकांश मकानों में नीचे दुकान और ऊपर रिहायश की व्यवस्था है। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे इलाकों में अग्नि सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) की अनदेखी अक्सर भारी पड़ती रही है।
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शॉर्ट सर्किट का खतरा: शुरुआती जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। गर्मियों की शुरुआत के साथ ही बिजली के तारों पर लोड बढ़ जाता है, जो पुराने वायरिंग वाले मकानों के लिए 'टाइम बम' जैसा साबित होता है।
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पुराना अनुभव: गिरिडीह के बाजारों में पहले भी शॉर्ट सर्किट के कारण कई बड़ी दुकानें खाक हो चुकी हैं। पशुपतिनाथ टिबड़ेवाल के मकान में लगी यह आग प्रशासन के लिए एक और चेतावनी है।
सावधानी ही बचाव: स्टोर रूम और जनरेटर का सही रख-रखाव
अग्निशमन विभाग ने इस घटना के बाद मकान मालिकों के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
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कबाड़ का निस्तारण: छतों या स्टोर रूम में ज्वलनशील कबाड़ (पुराना कागज, कपड़ा, प्लास्टिक) जमा न करें। ये आग को तेजी से फैलाने में मदद करते हैं।
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जनरेटर की सुरक्षा: तेल से चलने वाले जनरेटर को हमेशा खुले और हवादार स्थान पर रखें और उसके पास बिजली के खुले तार न छोड़ें।
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फायर एक्सटिंगुइशर: बहुमंजिला इमारतों में कम से कम हर फ्लोर पर अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) होना अनिवार्य है, ताकि दमकल के आने से पहले आग को नियंत्रित किया जा सके।
गिरिडीह के कालीबाड़ी चौक में हुई यह घटना एक डरावना सबक है। पशुपतिनाथ टिबड़ेवाल के परिवार की जान तो बच गई, लेकिन इस आग ने एक बार फिर हमारी सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी है। अगर यह आग रात के समय लगती या जनरेटर तक पहुँच जाती, तो परिणाम हृदयविदारक हो सकते थे। दमकल विभाग अब आग लगने के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच कर रहा है। शहर के व्यस्त बाजारों में रहने वाले लोगों को अब अपनी वायरिंग और सुरक्षा उपकरणों की जांच कर लेनी चाहिए, क्योंकि एक छोटी सी चिंगारी पल भर में सब कुछ राख करने की ताकत रखती है।
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