Bokaro Raid: बोकारो में अमन साहू गैंग के 7 गुर्गे गिरफ्तार, मुठभेड़ में अपराधी घायल, रंगदारी सिंडिकेट का हुआ भंडाफोड़

बोकारो पुलिस ने कुख्यात अमन साहू गिरोह के सात अपराधियों को हथियार और मोबाइल के साथ गिरफ्तार किया है। रंगदारी मांगने वाले इस सिंडिकेट और पुलिस मुठभेड़ में घायल प्रिंस गुप्ता की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।

Apr 2, 2026 - 13:50
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Bokaro Raid: बोकारो में अमन साहू गैंग के 7 गुर्गे गिरफ्तार, मुठभेड़ में अपराधी घायल, रंगदारी सिंडिकेट का हुआ भंडाफोड़
Bokaro Raid: बोकारो में अमन साहू गैंग के 7 गुर्गे गिरफ्तार, मुठभेड़ में अपराधी घायल, रंगदारी सिंडिकेट का हुआ भंडाफोड़

बोकारो, 2 अप्रैल 2026 – झारखंड के बोकारो जिले में संगठित अपराध और रंगदारी के नेटवर्क पर पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। कुख्यात अपराधी अमन साहू गिरोह से जुड़े सात खतरनाक गुर्गों को भारी मात्रा में हथियारों और डिजिटल साक्ष्यों के साथ दबोच लिया गया है। बोकारो एसपी हरविंदर सिंह ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में इस बड़ी कामयाबी का खुलासा किया। यह कार्रवाई तब हुई जब ये अपराधी शहर के बड़े व्यवसायियों और ठेकेदारों को फोन पर धमकाकर करोड़ों की रंगदारी वसूलने की फिराक में थे। पुलिस की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने कोयलांचल में सक्रिय अपराधी गिरोहों की कमर तोड़ दी है।

SIT का जाल और मुठभेड़: कैसे टूटी अमन साहू की 'चेन'?

बोकारो के कारोबारियों को पिछले कुछ समय से अज्ञात नंबरों से धमकियां मिल रही थीं, जिसके बाद पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया।

  • विशेष टीम का गठन: नगर डीएसपी के नेतृत्व में एक SIT (विशेष जांच दल) बनाई गई। जांच में अमन साहू, राहुल दुबे और मयंक सिंह गिरोह का सीधा कनेक्शन सामने आया।

  • रंगदारी का 'मोडस ऑपरेंडी': ये अपराधी जेल में बंद अपने आकाओं के इशारे पर प्रकाश शुक्ला के जरिए स्थानीय ठेकेदारों को टारगेट कर रहे थे।

  • फायरिंग और गिरफ्तारी: जब पुलिस टीम मुख्य आरोपी प्रिंस कुमार गुप्ता उर्फ भाटिया को पकड़ने पहुँची, तो उसने भागने के चक्कर में पुलिस पर गोलियां चला दीं। जवाबी कार्रवाई और छीना-झपटी में प्रिंस खुद ही घायल हो गया, जिसे फिलहाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हथियारों का जखीरा और 'रंगदारी' वाले मोबाइल बरामद

SIT ने बालीडीह और बीएस सिटी थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर न केवल अपराधियों को पकड़ा, बल्कि उनके पास से आतंक फैलाने का सामान भी जब्त किया।

  1. हथियार: पुलिस ने एक देसी कट्टा, एक 7.65 एमएम की पिस्टल, 10 जिंदा कारतूस, 1 मैगजीन और 2 धारदार चाकू बरामद किए हैं।

  2. डिजिटल सबूत: अपराधियों के पास से 8 मोबाइल फोन मिले हैं, जिनका इस्तेमाल रंगदारी मांगने और गिरोह के सरगनाओं से बात करने के लिए किया जा रहा था।

  3. अन्य जब्ती: इसके अलावा एक स्कूटी, 2 एटीएम कार्ड और नकदी भी बरामद की गई है।

अमन साहू गिरोह का काला इतिहास: कोयलांचल से जेल तक का खौफ

झारखंड में अमन साहू गिरोह का नाम दशकों से संगठित अपराध और 'गैंग वार' के लिए जाना जाता है।

  • वर्चस्व की लड़ाई: हजारीबाग, चतरा और बोकारो के कोयला क्षेत्रों में लेवी (रंगदारी) वसूलने के लिए यह गिरोह कुख्यात है। मयंक सिंह जैसे शूटर्स के जरिए यह गिरोह हाई-प्रोफाइल मर्डर और फायरिंग की घटनाओं को अंजाम देता रहा है।

  • जेल से ऑपरेट होता सिंडिकेट: अमन साहू के जेल में होने के बावजूद उसके गुर्गे बाहर सक्रिय रहते हैं। बोकारो पुलिस की यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पकड़े गए सात अपराधी—प्रिंस गुप्ता, श्याम सिंह, अजय सिंह, ओम प्रकाश, जैनेन्द्र, गोलू और भूपेंद्र—इस सिंडिकेट के 'लोकल हैंडलर्स' थे।

  • आपराधिक रिकॉर्ड: गिरफ्तार सभी सातों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, जिनमें लूट, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के मामले शामिल हैं।

पुलिस की खुली चेतावनी: "अभी तो यह शुरुआत है"

एसपी हरविंदर सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि बोकारो की धरती पर अपराध के लिए कोई जगह नहीं है।

  • लगातार जारी रहेगा अभियान: पुलिस अब इन अपराधियों के 'फाइनेंशियल नेटवर्क' की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि रंगदारी का पैसा किन खातों में जा रहा था और शहर में इनके और कौन से मददगार छिपे हैं।

  • व्यवसायियों को भरोसा: इस कार्रवाई के बाद बोकारो के व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। पुलिस ने सभी नागरिकों से अपील की है कि किसी भी धमकी भरे कॉल आने पर डरे नहीं, बल्कि तुरंत प्रशासन को सूचित करें।

  • थाना क्षेत्रों की एकजुटता: इस सफल ऑपरेशन में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों की पुलिस टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया, जो पुलिस की आपसी समन्वय शक्ति को दर्शाता है।

बोकारो पुलिस द्वारा अमन साहू गैंग के सात गुर्गों की गिरफ्तारी शहर में कानून का राज स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। प्रिंस गुप्ता जैसे अपराधियों का पुलिस पर हमला करना उनके दुस्साहस को दर्शाता है, लेकिन सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई ने उनके हौसले पस्त कर दिए हैं। हथियार, मोबाइल और डिजिटल सबूतों की बरामदगी से अब अदालत में इन्हें कड़ी सजा दिलाना आसान होगा। बोकारो अब संगठित अपराध के अंधेरे से बाहर निकलने की राह पर है, लेकिन पुलिस के लिए असली चुनौती जेल के भीतर बैठे उन मास्टरमाइंड्स के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।