Giridih Tragedy: गिरिडीह के गांडेय में दर्दनाक हादसा, पत्नी को बचाने कुएं में कूदा पति, दोनों की मौत से दो मासूम हुए अनाथ
गिरिडीह के गांडेय में पानी भरने के दौरान कुएं में गिरी पत्नी को बचाने के लिए पति ने भी छलांग लगा दी, लेकिन गहराई अधिक होने से दोनों की डूबकर मौत हो गई। मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठने की पूरी हृदयविदारक रिपोर्ट यहाँ देखें।
गिरिडीह/गांडेय, 27 मार्च 2026 – झारखंड के गिरिडीह जिले के गांडेय थाना क्षेत्र स्थित गोविन्दपुरा गांव से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक छोटे से हादसे ने देखते ही देखते एक हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। कुएं से पानी भरने के दौरान पैर फिसलने से गिरी पत्नी को बचाने की खातिर पति ने अपनी जान की परवाह किए बिना कुएं में छलांग लगा दी। प्यार और समर्पण की यह पराकाष्ठा अंततः एक दोहरी त्रासदी में बदल गई, क्योंकि गहरा पानी और दम घुटने के कारण पति-पत्नी दोनों की ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गोविन्दपुरा गांव में चूल्हा तक नहीं जला है और हर आँख नम है।
पानी भरने का सामान्य काम और अचानक पसरा सन्नाटा
रोजाना की तरह गुरुवार को भी पार्वती देवी घर के पास स्थित कुएं पर पानी भरने गई थीं, उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह उनका आखिरी सफर होगा।
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अचानक फिसला पैर: पानी निकालते समय पार्वती देवी का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरे कुएं में जा गिरीं। चीख सुनकर आसपास के लोग दौड़े, लेकिन सब कुछ पलक झपकते ही हो गया।
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पति का अटूट प्रेम: पत्नी को मौत के मुंह में समाते देख पति राजेंद्र मुर्मू विचलित हो उठे। बिना एक पल सोचे, उन्होंने पार्वती को बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी।
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गहराई बनी काल: कुएं में पानी का स्तर अधिक होने और गहराई ज्यादा होने के कारण राजेंद्र अपनी पत्नी तक तो पहुँचे, लेकिन दोनों ही बाहर निकलने में असमर्थ रहे और डूबने से उनकी सांसे थम गईं।
दो मासूम अनाथ: रसीका और अंशु के सिर से उठा साया
इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन दो मासूम बच्चों की है, जिन्हें शायद अभी यह भी नहीं पता कि उनके माता-पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
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मासूमों का भविष्य: राजेंद्र और पार्वती के दो छोटे बच्चे हैं— रसीका मुर्मू और अंशु मुर्मू। एक ही झटके में इन बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।
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बुजुर्ग दादा-दादी पर बोझ: अब इन अनाथ बच्चों की पूरी जिम्मेदारी दादा मखन लाल मुर्मू और बुजुर्ग दादी पर आ गई है। बूढ़ी आँखों के सामने जवान बेटे और बहू की अर्थी उठना गांव के लिए सबसे बड़ा दुख बन गया है।
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गांव का सहयोग: ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक जीवन की लौ बुझ चुकी थी।
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में कुएं और हादसों का इतिहास
गिरिडीह और संथाल परगना के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के लिए कुएं आज भी मुख्य स्रोत हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा हमेशा से चिंता का विषय रही है।
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सुरक्षा घेरे का अभाव: अक्सर गांवों में कुओं के चारों ओर ऊँची जगत (बाउंड्री) नहीं होती, जिससे बारिश या फिसलन के दौरान हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
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डूबने की घटनाएं: इतिहास गवाह है कि ग्रामीण इलाकों में कुएं में गिरने से होने वाली मौतों में 'बचाने की कोशिश' करने वाला व्यक्ति भी अक्सर अपनी जान गंवा बैठता है, क्योंकि कुएं के अंदर की गैस और पानी का दबाव संभालना मुश्किल होता है।
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प्रशासनिक लापरवाही: जल जीवन मिशन के दावों के बावजूद कई गांवों में आज भी सुरक्षित पेयजल की कमी है, जिसके कारण महिलाओं को असुरक्षित कुओं पर निर्भर रहना पड़ता है।
अगला कदम: जांच और मुआवजे की मांग
घटना की सूचना मिलते ही एसडीपीओ जीतवाहन उरांव के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुँची और वैधानिक कार्रवाई शुरू की।
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पोस्टमार्टम और पंचनामा: पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा कर सदर अस्पताल भेजा, जहाँ पोस्टमार्टम के बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया।
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एसडीपीओ का बयान: पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह पूरी तरह डूबने से हुई दुर्घटना का मामला लग रहा है।
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मुआवजे की अपील: ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अनाथ हुए बच्चों के भविष्य को देखते हुए परिवार को आपदा प्रबंधन कोष से उचित मुआवजा दिया जाए।
गिरिडीह के गांडेय में हुई यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी है। राजेंद्र मुर्मू का अपनी पत्नी को बचाने का प्रयास उनके असीम प्रेम का प्रतीक तो बना, लेकिन पीछे दो मासूमों को बेसहारा छोड़ गया। यह घटना हमें याद दिलाती है कि ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर में छोटी सी कमी कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। क्या सरकार इन अनाथ बच्चों की पढ़ाई और परवरिश की जिम्मेदारी उठाएगी? फिलहाल, पूरा गोविन्दपुरा गांव रसीका और अंशु के आंसू पोंछने की कोशिश कर रहा है।
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