Galudih Raid : गालूडीह में 1400 किलो जावा महुआ जब्त, अवैध शराब की भट्ठियां ध्वस्त, क्या उपचुनाव को प्रभावित करने की थी साजिश?
गालूडीह पुलिस ने बाघुड़िया पंचायत के कासपानी गांव के पास जंगल में छापामारी कर लगभग 1400 किलो जावा महुआ जब्त करके विनष्ट कर दिया। थाना प्रभारी अंकू कुमार ने बताया कि अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर अंकुश लगाना मकसद है, विशेषकर उपचुनाव की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के लिए यह अभियान जारी रहेगा।
पूर्वी सिंहभूम जिले के गालूडीह इलाके में अवैध शराब का धंधा करने वालों के लिए शुक्रवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। गालूडीह पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर बाघुड़िया पंचायत के कासपानी गांव के पास घने जंगल में औचक छापामारी करके एक बड़े अवैध शराब निर्माण केंद्र का पर्दाफाश किया। इस दबिश में लगभग 1400 किलो जावा महुआ जब्त करके विनष्ट कर दिया गया, जिसकी कीमत लाखों में आंकी जा रही है।
थाना प्रभारी अंकू कुमार ने बताया कि छापामारी दल ने सिर्फ महुआ ही जब्त नहीं किया, बल्कि शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले तमाम उपकरणों और भट्ठियों को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ कानून का पालन नहीं है, बल्कि एक सख्त संदेश भी है कि जंगल, पहाड़ और कस्बों में किसी भी तरह के अवैध शराब निर्माण और बिक्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उपचुनाव से जुड़ा अभियान: निष्पक्षता बनाए रखने की चुनौती
पुलिस की इस तत्काल कार्रवाई के पीछे एक महत्वपूर्ण मकसद आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया को निष्पक्ष और बाधारहित बनाए रखना है।
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राजनीतिक कनेक्शन: थाना प्रभारी अंकू कुमार ने स्पष्ट किया कि अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए यह विशेष अभियान उपचुनाव तक लगातार जारी रहेगा। दरअसल, अवैध शराब का इस्तेमाल अक्सर चुनावों में मतदाताओं को लुभाने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
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शराब माफिया पर दबाव: पुलिस की इस सख्ती से अवैध शराब बनाने वाले माफिया पर भारी दबाव बना है। 1400 किलो जावा महुआ का विनष्ट होना उनके आर्थिक तंत्र पर सीधा प्रहार है।
जन स्वास्थ्य पर खतरा: अवैध शराब का इतिहास
जावा महुआ से बनने वाली अवैध शराब न केवल राजस्व का नुकसान करती है, बल्कि यह जन स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है। झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब पीने से कई बार दर्दनाक हादसे भी हो चुके हैं। इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि जंगल में चलने वाली ये भट्ठियां उनके बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं।
पुलिस का यह अभियान चुनाव की निष्पक्षता के साथ-साथ स्थानीय कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। अब देखना यह है कि उपचुनाव की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भी क्या यह सख्ती और अभियान इसी तरह जारी रहेगा, ताकि शराब माफिया पूरी तरह से जड़ से खत्म हो सकें।
आपकी राय में, जंगलों और ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब निर्माण को पूरी तरह से रोकने और जन जागरूकता फैलाने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन को कौन से दो सबसे प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान लागू करने चाहिए?
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