Dhanbad Raid: CBI : धनबाद रेल मंडल के बड़े साहब 50 हजार घूस लेते गिरफ्तार, DRM ऑफिस में मची खलबली, 45 लाख के बिल का था खेल
धनबाद रेल मंडल में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरीय मंडल विद्युत अभियंता संजीव कुमार को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया है। संवेदक अवजीत झा की शिकायत पर हुई इस छापेमारी के बाद डीआरएम कार्यालय और आवास पर घंटों जांच चली। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
धनबाद, 7 मार्च 2026 – कोयलांचल की राजधानी और देश के सबसे कमाऊ रेल मंडलों में शुमार धनबाद रेल मंडल में शुक्रवार की शाम सीबीआई (CBI) की दस्तक से हड़कंप मच गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम ने ईस्ट सेंट्रल रेलवे के वरीय मंडल विद्युत अभियंता (Sr. DEE) संजीव कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सीधे डीआरएम (DRM) कार्यालय परिसर से हुई है, जिसने रेलवे महकमे के भीतर चल रहे 'कमीशन खेल' की पोल खोल दी है।
ट्रैप बिछा और 'साहब' फंस गए
सीबीआई की इस कार्रवाई के पीछे एक सोची-समझी रणनीति और सटीक मुखबिरी थी।
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शिकायतकर्ता की हिम्मत: रेल संवेदक अवजीत झा ने धनबाद रेल मंडल में इलेक्ट्रिकल सामग्री की आपूर्ति और इंस्टॉलेशन का काम किया था। उनका लगभग 45 लाख रुपये का बिल भुगतान के लिए लंबित था।
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रिश्वत की डिमांड: आरोप है कि इस भारी-भरकम बिल को पास करने के बदले वरीय मंडल विद्युत अभियंता संजीव कुमार लगातार पैसों की मांग कर रहे थे।
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सीबीआई का जाल: संवेदक ने घुटने टेकने के बजाय सीबीआई का रुख किया। डीएसपी विकास कुमार पाठक के नेतृत्व में टीम ने मामले का सत्यापन किया और शुक्रवार शाम को 'ट्रैप' लगा दिया। जैसे ही साहब ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये पकड़े, सादे लिबास में तैनात सीबीआई टीम ने उन्हें दबोच लिया।
DRM ऑफिस से आवास तक 'स्कैनिंग'
गिरफ्तारी महज शुरुआत थी। संजीव कुमार को हिरासत में लेने के बाद सीबीआई की टीम ने उनके प्रभाव वाले हर कोने की तलाशी ली।
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कार्यालय की जांच: घंटों तक डीआरएम ऑफिस स्थित उनके चेंबर में फाइलों को खंगाला गया।
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आवास पर रेड: देर रात तक अभियंता के सरकारी आवास पर छापेमारी जारी रही। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने वहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और प्रिंटर जब्त किए हैं।
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डिजिटल साक्ष्य: जब्त किए गए मोबाइल और लैपटॉप से सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस रिश्वतखोरी के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
धनबाद रेल मंडल: गौरवशाली इतिहास और दागदार वर्तमान
धनबाद रेल मंडल का इतिहास भारतीय रेलवे के विकास की गाथा है।
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स्थापना और महत्व: 1906 में ग्रैंड कॉर्ड लाइन के खुलने के बाद से धनबाद रेलवे का प्रमुख केंद्र रहा है। यह मंडल भारतीय रेलवे को सबसे अधिक राजस्व देने वाले मंडलों में से एक है, मुख्य रूप से कोयला ढुलाई के कारण।
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भ्रष्टाचार की छाया: जहाँ अरबों का टर्नओवर हो, वहां भ्रष्टाचार के दीमक अक्सर सक्रिय हो जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में धनबाद रेल मंडल में टेंडर और बिल भुगतान को लेकर कई बार उंगलियां उठी हैं। संजीव कुमार की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि 'ऊपरी कमाई' का यह कैंसर सिस्टम की जड़ों तक पहुँच चुका है।
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संवेदकों का डर: रेलवे में काम करने वाले कई ठेकेदारों का दबी जुबान में कहना है कि बिना 'चढ़ावे' के फाइलों का आगे बढ़ना नामुमकिन सा हो गया है।
अब आगे क्या? एफआईआर की प्रक्रिया शुरू
सीबीआई के डीएसपी विकास कुमार पाठक ने स्पष्ट किया है कि आरोपी अभियंता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा रही है।
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नेटवर्क की तलाश: सीबीआई अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जो संजीव कुमार के साथ इस लेनदेन में शामिल हो सकती हैं।
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कोर्ट में पेशी: गिरफ्तार अभियंता को शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ टीम उनकी रिमांड की मांग कर सकती है ताकि गहन पूछताछ की जा सके।
छापेमारी का विवरण: एक नजर में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| आरोपी अधिकारी | संजीव कुमार (Sr. DEE, धनबाद मंडल) |
| रिश्वत की राशि | ₹50,000 (रंगे हाथ बरामद) |
| शिकायतकर्ता | अवजीत झा (रेल संवेदक) |
| टीम का नेतृत्व | डीएसपी विकास कुमार पाठक (CBI) |
| जब्त सामान | दस्तावेज, डिजिटल एविडेंस, प्रिंटर आदि |
छोटे ठेकेदारों के लिए बड़ी राहत
सीबीआई की इस कार्रवाई ने धनबाद के रेल संवेदकों के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है। अक्सर बड़े अधिकारियों के रसूख के आगे छोटे ठेकेदार हार मान लेते हैं, लेकिन अवजीत झा की पहल और सीबीआई की मुस्तैदी ने भ्रष्ट तंत्र को करारा तमाचा जड़ा है। अब देखना यह है कि क्या यह जांच केवल 50 हजार तक सीमित रहती है या इसके पीछे छिपे करोड़ों के 'कमीशन साम्राज्य' का भी अंत होता है।
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