Giridih Minor Girl Mother : 13 साल की नाबालिग बच्ची बनी मां, गांव के युवक पर आरोप
धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 13 साल की नाबालिग बच्ची ने दिया बच्चे को जन्म। गिरिडीह की रहने वाली बच्ची परिजनों संग पहुंची थी अस्पताल। गांव के युवक पर आरोप, अस्पताल ने पुलिस और CWC को दी सूचना।
झारखंड के धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। गिरिडीह जिले की मात्र 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची बिन ब्याही मां बन गई है। मंगलवार की शाम परिजन उसे गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में देर रात डॉक्टरों ने उसका सुरक्षित प्रसव कराया।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार बच्ची और उसका नवजात शिशु दोनों फिलहाल स्वस्थ हैं और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
गांव के युवक पर लगे आरोप
परिजनों का आरोप है कि गांव के ही एक युवक ने बच्ची को गर्भवती बनाया। यही कारण है कि कम उम्र में उसे मां बनना पड़ा। परिजनों का कहना है कि युवक अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहा है और उसने नाबालिग से शादी करने की भी बात कही है।
हालांकि इस पूरे मामले में परिजनों ने अभी तक थाना में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। परिजन सामाजिक स्तर पर ही मामले को सुलझाने की बात कह रहे हैं।
अस्पताल ने दी पुलिस और CWC को सूचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने सरायढेला थाना और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सूचना दे दी है। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अब इस प्रकरण पर कानूनी कार्रवाई की संभावना है।
अस्पताल सूत्रों ने बताया कि बच्ची को मंगलवार को गिरिडीह से रेफर किया गया था। उम्र काफी कम होने की वजह से प्रसव को लेकर खतरे की आशंका बनी हुई थी, लेकिन डॉक्टरों की टीम ने सावधानी के साथ सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी कराई।
पूरे अस्पताल में बनी चर्चा का विषय
बुधवार को यह मामला धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चर्चा का सबसे बड़ा विषय रहा। मरीज से लेकर चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ तक सभी इस घटना को लेकर हैरान थे। हर कोई सोच में पड़ गया कि इतनी कम उम्र में एक बच्ची मां कैसे बन सकती है।
समाज और कानून दोनों के लिए चुनौती
यह मामला सिर्फ एक अस्पताल या परिवार की चिंता का विषय नहीं है, बल्कि पूरे समाज और कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है। कम उम्र में गर्भवती होना न केवल बच्ची के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि यह पॉक्सो कानून (POCSO Act) और बाल विवाह निषेध अधिनियम से भी जुड़ा हुआ गंभीर अपराध है।
अगर परिजन औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हैं तो आरोपी युवक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय
चिकित्सकों का कहना है कि इतनी कम उम्र में गर्भधारण करना और प्रसव कराना बच्ची की सेहत के लिए जोखिम भरा होता है। इससे भविष्य में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इसे बेहद चिंताजनक बताया है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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