Deoghar Fraud: देवघर में नया साइबर जाल! लोन लेने के 3 दिन बाद खाते से उड़ाए 1.20 लाख
देवघर में दुकान वेरिफिकेशन के नाम पर साइबर ठगी! लोन लेने के 3 दिन बाद व्यापारी के खाते से 1.20 लाख रुपये गायब। जानिए पूरी खबर!

देवघर में साइबर ठगों का नया तरीका सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को दुकान वेरिफाई करने के नाम पर लाखों की चपत लगा दी गई। पीड़ित सुनील ठाकुर ने 18 फरवरी को इंडसइंड बैंक से 1.30 लाख रुपये का लोन लिया था, लेकिन तीन दिन बाद ही उसके खाते से 1.20 लाख रुपये गायब हो गए।
जसीडीह थाना क्षेत्र के कोठिया मोड़ के पास सैलून चलाने वाले सुनील के साथ यह ठगी इतनी सफाई से हुई कि उसे तब तक कुछ समझ नहीं आया, जब तक उसका बैंक बैलेंस शून्य नहीं हो गया।
कैसे हुआ यह साइबर फ्रॉड?
पीड़ित ने बताया कि वह साधारण कीपैड मोबाइल चलाता है। लेकिन 19 फरवरी को उसे एक अज्ञात नंबर से कॉल आया और ठग ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए दुकान वेरिफिकेशन के बहाने जानकारी लेना शुरू कर दिया।
पहला जाल:
पहले ठग ने सुनील की पत्नी का नाम बताया और विश्वास दिलाया कि वह बैंक से बात कर रहा है।
दूसरा जाल:
ठग ने कहा कि लोन वेरिफाई करने के लिए व्हाट्सएप खोलना जरूरी है। सुनील ने जवाब दिया कि उसके पास स्मार्टफोन नहीं है।
तीसरा जाल:
इसके बाद ठग ने सलाह दी कि वह अपने भाई के मोबाइल में अपना सिम डालकर व्हाट्सएप इंस्टॉल करे। सुनील ने भाई के मोबाइल से व्हाट्सएप इंस्टॉल किया, और यहीं से जाल में फंस गया!
चौथा जाल:
ठग ने आधार कार्ड, एटीएम डिटेल्स, ओटीपी आदि की जानकारी मांगी और यह कहते हुए भेजने को कहा कि इससे लोन का प्रोसेस पूरा होगा।
सुनील को शक भी नहीं हुआ क्योंकि व्हाट्सएप पर ठग के प्रोफाइल में बैंक का लोगो था। लेकिन जैसे ही उसने सारी जानकारी दी, उसके खाते से 1.20 लाख रुपये उड़ गए!
ठगी का अहसास, पुलिस से गुहार!
जब सुनील ने बैंक अकाउंट चेक किया, तो उसका बैलेंस लगभग खत्म हो चुका था। घबराकर उसने साइबर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
अब साइबर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश की जा रही है।
कैसे बचें ऐसे साइबर फ्रॉड से?
भारत में साइबर क्राइम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लोग डिजिटल लेनदेन की सुविधा के कारण ऑनलाइन फ्रॉड का आसान शिकार बन जाते हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
बैंक कभी भी फोन पर निजी जानकारी नहीं मांगता। अगर कोई कॉल आए, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें।
अगर आपके पास स्मार्टफोन नहीं है, तो किसी और के मोबाइल में अपना सिम डालने से बचें।
व्हाट्सएप पर किसी अनजान नंबर से आए मैसेज या कॉल पर भरोसा न करें, भले ही उसमें बैंक का लोगो लगा हो।कभी भी ओटीपी, एटीएम डिटेल्स, आधार कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी को न दें।
अगर ठगी हो जाए, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
देवघर में साइबर क्राइम का बढ़ता खतरा!
झारखंड और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को शिकार बना रहे हैं। खासकर छोटे व्यापारियों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को लोन, केवाईसी अपडेट, बिजली बिल छूट, या नौकरी के नाम पर ठगा जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी नए तरीके से लोगों को झांसा देते हैं और व्हाट्सएप, फोन कॉल और मैसेज के जरिए बैंक से जुड़ी फर्जी जानकारी मांगते हैं।
पुलिस की सख्त चेतावनी!
देवघर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर विश्वास न करें।
अगर आपके साथ कोई साइबर ठगी होती है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें और 1930 पर कॉल करें।
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