Choti Diwali 2025: जानें नरक चतुर्दशी की पूरी कथा और यम दीपक का शुभ मुहूर्त - कैसे भगवान कृष्ण ने नरकासुर का किया था वध

क्या आप जानते हैं छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी की पूरी कहानी? जानें कैसे भगवान कृष्ण ने सत्यभामा की मदद से राक्षस नरकासुर का वध किया और क्यों मनाते हैं यह त्योहार, साथ ही जानें यम दीपक जलाने का सही समय और विधि।

Oct 19, 2025 - 17:52
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Choti Diwali 2025: जानें नरक चतुर्दशी की पूरी कथा और यम दीपक का शुभ मुहूर्त - कैसे भगवान कृष्ण ने नरकासुर का किया था वध
Choti Diwali 2025: जानें नरक चतुर्दशी की पूरी कथा और यम दीपक का शुभ मुहूर्त - कैसे भगवान कृष्ण ने नरकासुर का किया था वध

नई दिल्ली: दीपों के त्योहार दिवाली की शुरुआत आज नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली से हो रही है। 19 अक्टूबर को देशभर में यह पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन तेल स्नान, हनुमानजी की पूजा और यम दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?

इस दिन की कहानी जुड़ी है एक राक्षस नरकासुर से, जो बहुत ताकतवर और घमंडी था। पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था और 16 हजार से ज्यादा कन्याओं को बंदी बना लिया था।

नरकासुर वध की संपूर्ण कथा

प्राचीन समय में नरकासुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस था। उसने देवताओं से रत्न लूट लिए, इंद्र के कुंडल छीन लिए, और पृथ्वी की 16,100 कन्याओं को बंदी बना लिया। उसका आतंक इतना बढ़ गया था कि तीनों लोकों में हाहाकार मच गया।

नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर देवराज इंद्र ने भगवान कृष्ण से मदद मांगी। भगवान विष्णु ने कृष्ण का रूप लेकर नरकासुर को खत्म करने का निर्णय लिया। लेकिन नरकासुर को वरदान प्राप्त था कि उसे कोई स्त्री ही मार सकती है

इसलिए भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को साथ लिया। भीषण युद्ध हुआ और सत्यभामा की मदद से नरकासुर का वध हुआ। इसके बाद भगवान कृष्ण ने सभी 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया। इसी कारण यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

कैसे शुरू हुई दीप जलाने की परंपरा?

नरकासुर के अंत के बाद लोगों ने दीप जलाकर जश्न मनाया। कहा जाता है कि युद्ध के बाद भगवान कृष्ण ने तेल से स्नान किया था, इसलिए आज भी नरक चतुर्दशी पर तेल स्नान और उबटन लगाने की परंपरा निभाई जाती है।

यम दीपक जलाने का सही समय और विधि

छोटी दिवाली पर यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा भी है, जिसे यम दीपक कहा जाता है।

  • यम दीपक मुहूर्त: शाम 5:47 से 7:03 बजे तक

  • विधि: दीपक को घर की दक्षिण दिशा में रखें

  • मंत्र: "ॐ यमाय नम:" का जाप करें

मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

नरक चतुर्दशी के अन्य महत्वपूर्ण रीति-रिवाज

  • तेल स्नान: सुबह सूर्योदय से पहले तेल मालिश के साथ स्नान

  • हनुमान पूजा: इस दिन हनुमानजी की विशेष पूजा का विधान

  • दान-पुण्य: गरीबों को अन्न और वस्त्र दान करना

नरक चतुर्दशी का यह पर्व हमें सिखाता है कि अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्यंभावी है। यह दिवाली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है जो हमें आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के अंधकार से मुक्ति का संदेश देता है।

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Team India मैंने कई कविताएँ और लघु कथाएँ लिखी हैं। मैं पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हूं और अब संपादक की भूमिका सफलतापूर्वक निभा रहा हूं।