Chatra Shootout: चतरा में ट्रक मालिक पर ताबड़तोड़ फायरिंग, अशोका परियोजना में नकाबपोशों ने दागी गोलियां, रांची रिम्स रेफर
चतरा की अशोका परियोजना में 5-6 नकाबपोश अपराधियों ने ट्रक मालिक बासुदेव गंझू पर फायरिंग कर दी है। कोयला क्षेत्र में लेवी और वर्चस्व की इस खूनी लड़ाई की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
चतरा/झारखंड, 9 अप्रैल 2026 – झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र चतरा में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पिपरवार थाना क्षेत्र स्थित अशोका परियोजना गुरुवार सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट से गूँज उठी। कांटा घर के पास बाइक सवार नकाबपोश अपराधियों ने ट्रक मालिक बासुदेव गंझू को निशाना बनाते हुए सरेआम फायरिंग कर दी। इस घटना ने एक बार फिर कोयला परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते दबदबे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घायल बासुदेव को नाजुक हालत में रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल भेजा गया है, जहाँ वे मौत से जूझ रहे हैं।
नकाबपोश हमलावर: 4-5 राउंड फायरिंग से फैला सन्नाटा
गुरुवार की सुबह जब अशोका परियोजना में कोयले का उठाव और तौल का काम चल रहा था, तभी मौत ने दस्तक दी।
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अचानक हमला: दो बाइकों पर सवार होकर आए 5 से 6 नकाबपोश अपराधी अचानक कांटा घर के पास रुके। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने बासुदेव गंझू पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
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अफरा-तफरी: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 4 से 5 राउंड गोलियां चलीं। गोलीबारी होते ही वहां मौजूद मजदूरों और ट्रक ड्राइवरों में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए कोयले के ढेरों और ट्रकों के पीछे छिपने लगे।
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फरार अपराधी: वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी हथियार लहराते हुए बड़ी आसानी से मौके से फरार हो गए।
अवस्था नाजुक: रिम्स में जिंदगी-मौत के बीच जंग
बेंती तिलेटोंगरी निवासी बासुदेव गंझू को गोलियां लगने के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत अस्पताल पहुँचाया।
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प्राथमिक उपचार: स्थानीय डॉक्टरों ने शरीर से काफी खून बह जाने के कारण उनकी स्थिति को बेहद गंभीर बताया।
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रांची रेफर: बेहतर इलाज के लिए उन्हें तुरंत रिम्स, रांची रेफर कर दिया गया। फिलहाल वहां के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके शरीर में फंसी गोलियां निकालने और उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है।
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पुलिस की जांच: पिपरवार पुलिस ने घटनास्थल से खाली खोखे बरामद किए हैं। पुलिस अब इलाके के सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के हुलिए के आधार पर अपराधियों की पहचान करने में जुटी है।
चतरा का कोयला क्षेत्र: लेवी और वर्चस्व का रक्तरंजित इतिहास
चतरा का यह इलाका दशकों से कोयला खदानों और इससे जुड़े 'लेवी' (रंगदारी) के सिंडिकेट के लिए जाना जाता रहा है।
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कोयला परिवहन का विवाद: अशोका और मगध जैसी बड़ी परियोजनाओं में ट्रांसपोर्टेशन और लोडिंग को लेकर अक्सर उग्रवादी संगठनों और स्थानीय गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई होती रहती है।
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पोस्टरबाजी का कनेक्शन: गौरतलब है कि इस घटना से ठीक दो दिन पहले इलाके में संदिग्ध पोस्टरबाजी हुई थी। उग्रवादी संगठनों के नाम वाले इन पोस्टरों में अक्सर ठेकेदारों और ट्रक मालिकों को चेतावनी दी जाती है। पुलिस अब इस फायरिंग को उसी पोस्टरबाजी के 'अगले स्टेप' के रूप में देख रही है।
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लेवी वसूली का जाल: प्रारंभिक जांच में यह साफ लग रहा है कि यह मामला लेवी की मांग न पूरी होने या कोयला क्षेत्र में अपना प्रभाव जमाने का है। चतरा का इतिहास रहा है कि जब भी किसी नए संगठन या गिरोह को पैर जमाने होते हैं, तो वे ऐसे ही सॉफ्ट टारगेट्स (ट्रक मालिक या ठेकेदार) को निशाना बनाते हैं।
अगली कार्रवाई: अपराधियों की तलाश में नाकेबंदी
पिपरवार पुलिस ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है और अपराधियों के भागने वाले संभावित रास्तों पर छापेमारी की जा रही है।
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इंटेलिजेंस इनपुट: पुलिस उन गिरोहों की लिस्ट खंगाल रही है जो जेल से बाहर आए हैं या हाल के दिनों में सक्रिय हुए हैं।
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आधिकारिक बयान: पुलिस ने अभी तक किसी विशेष संगठन का नाम नहीं लिया है, लेकिन लेवी वसूली के एंगल को सबसे ऊपर रखा गया है।
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रिम्स में सुरक्षा: घायल बासुदेव गंझू के पास भी सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है ताकि उनकी स्थिति सुधरने पर उनसे बयान लिया जा सके।
चतरा की अशोका परियोजना में हुई यह फायरिंग राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिनदहाड़े एक ट्रक मालिक को गोली मारना यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म हो चुका है। पोस्टरबाजी के बाद हुई इस घटना ने स्थानीय व्यापारियों और ट्रक मालिकों में दहशत पैदा कर दी है। अब सबकी नजरें चतरा पुलिस पर हैं कि वे कब इन नकाबपोशों का नकाब हटाती हैं और उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाती हैं। फिलहाल, पूरा कोयलांचल क्षेत्र पुलिस की कड़ी निगरानी में है और बासुदेव के परिजन उनके बचने की दुआ कर रहे हैं।
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