Chaibasa Raid : चाईबासा में खपरैल घर के भीतर चल रही थी शराब की मिनी फैक्ट्री, उत्पाद विभाग ने भारी मात्रा में स्प्रिट और बोतलें की जब्त

चाईबासा के तांतनगर में एक पुराने घर में चल रही अवैध शराब की मिनी फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। 153 लीटर शराब, स्प्रिट और नकली रैपर की बरामदगी के साथ उत्पाद विभाग की इस कार्रवाई की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।

Apr 9, 2026 - 20:30
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Chaibasa Raid : चाईबासा में खपरैल घर के भीतर चल रही थी शराब की मिनी फैक्ट्री, उत्पाद विभाग ने भारी मात्रा में स्प्रिट और बोतलें की जब्त
Chaibasa Raid : चाईबासा में खपरैल घर के भीतर चल रही थी शराब की मिनी फैक्ट्री, उत्पाद विभाग ने भारी मात्रा में स्प्रिट और बोतलें की जब्त

चाईबासा/पश्चिमी सिंहभूम, 9 अप्रैल 2026 – पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर थाना क्षेत्र में मौत का सामान बनाने वाली एक मिनी फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है। उत्पाद विभाग ने गुरुवार को एक गुप्त सूचना के आधार पर छोटाकोईता गांव में छापेमारी की, जहाँ एक पुराने खपरैल घर की आड़ में चल रहे अवैध शराब के बड़े कारोबार को ध्वस्त कर दिया गया। यहाँ से न केवल तैयार शराब, बल्कि भारी मात्रा में स्प्रिट, खाली बोतलें और नामी कंपनियों के नकली रैपर बरामद किए गए हैं। चाईबासा उत्पाद निरीक्षक निर्भय सिन्हा ने बताया कि यह पूरी खेप बाजार में खपाकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने की तैयारी थी।

खपरैल घर में 'मौत की फैक्ट्री': छापेमारी में खुला राज

तांतनगर का छोटाकोईता गांव गुरुवार सुबह तक शांत था, लेकिन उत्पाद विभाग की मुस्तैदी ने वहां चल रहे काले खेल को बेनकाब कर दिया।

  • गुप्त ठिकाना: काफी खोजबीन के बाद टीम एक पुराने और जर्जर खपड़ा वाले घर तक पहुँची। बाहर से साधारण दिखने वाला यह घर अंदर से एक व्यवस्थित अवैध फैक्ट्री के रूप में काम कर रहा था।

  • भारी बरामदगी: रेड के दौरान वहां से 17 पेटी तैयार अवैध शराब, 153 लीटर कच्चा स्प्रिट, हजारों की संख्या में खाली बोतलें, ढक्कन, स्टीकर और नकली रैपर बरामद हुए।

  • जहर परोसने की तैयारी: उत्पाद निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि बरामद शराब जहरीली हो सकती थी। कम दाम के लालच में लोग इन मिलावटी शराब का सेवन करते हैं, जो सीधे तौर पर लीवर फेलियर या मौत का कारण बनती है।

फरार मालिक की तलाश: रडार पर हैं 'किंगपिन'

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे अंदेशा है कि पुलिस की भनक लगते ही आरोपी पिछले रास्ते से फरार हो गए।

  1. मालिक की पहचान: उत्पाद विभाग ने घर के मालिकाना हक और स्थानीय नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। विभाग का दावा है कि जल्द ही मुख्य संचालक को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

  2. सप्लाई चेन की जांच: विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि अवैध शराब बनाने के लिए स्प्रिट की इतनी बड़ी मात्रा कहाँ से मंगवाई गई थी और ये नकली बोतलें किन-किन बाजारों में भेजी जानी थी।

  3. मुस्तैद विभाग: निर्भय सिन्हा ने चेतावनी दी है कि जिले में किसी भी कीमत पर अवैध शराब का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।

अवैध शराब के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का संघर्ष

पश्चिमी सिंहभूम और कोल्हान का यह इलाका अपनी पारंपरिक 'हड़िया' और 'महुआ' संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में 'सिंथेटिक शराब' ने यहाँ की जड़ों को खोखला किया है।

  • पारंपरिक बनाम अवैध: ग्रामीण इलाकों में महुआ शराब का चलन पुराना है, लेकिन मुनाफे के चक्कर में अब माफिया स्प्रिट और रसायनों का इस्तेमाल कर 'नकली अंग्रेजी शराब' बनाने लगे हैं।

  • इतिहास की गूँज: चाईबासा के कई क्षेत्रों में पहले भी जहरीली शराब पीने से सामूहिक मौतों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी कड़वे इतिहास से सबक लेते हुए उत्पाद विभाग ने अपने सूचना तंत्र (Intelligence) को गांव-गांव तक फैलाया है।

  • तांतनगर की संवेदनशीलता: ओडिशा सीमा के करीब होने के कारण तांतनगर और आसपास के क्षेत्र तस्करी के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' रहे हैं। पुराने खपरैल घरों को गोदाम बनाना तस्करों की पुरानी रणनीति रही है ताकि पुलिस का ध्यान उन पर न जाए।

अगली कार्रवाई: ग्रामीणों से अपील और सघन तलाशी

उत्पाद विभाग अब पूरे तांतनगर प्रखंड में 'सर्च ऑपरेशन' चलाने की योजना बना रहा है।

  • ग्रामीणों का सहयोग: निरीक्षक ने आम ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली ऐसी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत विभाग को दें। जानकारी देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।

  • कठोर धाराएं: जब्त सामग्री को कार्यालय लाकर नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और फरार आरोपियों पर उत्पाद अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

  • बाजारों पर नजर: हाट-बाजारों और छोटी गुमटियों पर भी नजर रखी जा रही है जहाँ अक्सर ये अवैध शराब खपाई जाती है।

चाईबासा के छोटाकोईता गांव में हुई यह कार्रवाई एक बड़ी त्रासदी को रोकने जैसी है। 153 लीटर स्प्रिट का मतलब था हजारों लोगों की जान जोखिम में डालना। उत्पाद विभाग की सतर्कता ने भले ही आज 17 पेटी शराब पकड़ी हो, लेकिन असली चुनौती उस जड़ को काटने की है जो स्प्रिट की सप्लाई करती है। एक खपरैल घर के भीतर चल रहा यह 'मौत का कारखाना' प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है। अब समय है कि ग्रामीण स्वयं भी जागरूक हों और 'सस्ती शराब' के नाम पर मौत का प्याला न पिएं। फिलहाल, तांतनगर पुलिस और उत्पाद विभाग की टीमें फरार तस्करों के ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।