Bhatapara National Ramayana Mela: अयोध्या सा नजारा, भाटापारा में राष्ट्रीय रामायण मेला शुरू, देश-विदेश से जुटेंगे दिग्गज, ब्रांड एंबेसडर डॉ. 'राधे राधे' बढ़ाएंगे मान
भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ की पावन धरा भाटापारा में शुरू हो रहे 5 दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेले की भव्यता और भारत-नेपाल के ब्रांड एंबेसडर डॉ. 'राधे राधे' सहित अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों की मौजूदगी का पूरा विवरण यहाँ दिया गया है वरना आप भी इस 'मिनी अयोध्या' के दिव्य समागम को जानने से चूक जाएंगे।
भाटापारा (छत्तीसगढ़), 14 जनवरी 2026 – भगवान श्रीराम के ननिहाल और भक्ति की पावन धरा छत्तीसगढ़ में आज से एक ऐसी आध्यात्मिक अलख जगने जा रही है, जिसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई देगी। भाटापारा के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 14 से 18 जनवरी तक आयोजित होने वाला 'राष्ट्रीय रामायण मेला' केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था का वह महाकुंभ है जहाँ अयोध्या धाम की जीवंत झलक दिखाई देगी। राष्ट्रीय रामायण मेला समिति के तत्वाधान में आयोजित इस पांच दिवसीय समागम में साधु-संतों, मानस मर्मज्ञों और अंतरराष्ट्रीय विद्वानों का ऐसा मेला लगेगा कि भाटापारा की धरती साक्षात 'राममय' हो जाएगी। इस महोत्सव का सबसे मुख्य आकर्षण भारत-नेपाल पशुपतिनाथ अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के ब्रांड एंबेसडर डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' का आगमन है, जो अपनी साहित्यिक आभा से इस आयोजन को वैश्विक पहचान देंगे।
भाटापारा बना 'मिनी अयोध्या': देश-विदेश से जुट रहे दिग्गज
इस भव्य आयोजन की परिकल्पना इतनी विशाल है कि इसमें न केवल भारत के कोने-कोने से, बल्कि श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से भी प्रबुद्धजन पहुँच रहे हैं।
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प्रमुख अतिथि: कार्यक्रम में भाटापारा विधायक इन्द्र साव, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य प्रकाश मोदी, और पृथक छत्तीसगढ़ के प्रणेता डॉ. उदय भान सिंह चौहान जैसे दिग्गज शामिल होंगे।
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साहित्यिक संगम: डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' की उपस्थिति इस मेले को एक नया वैचारिक आयाम प्रदान करेगी। साहित्य के प्रति उनके आत्मिक लगाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान के कारण उन्हें इस आयोजन का गौरव माना जा रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति: कोलंबो (श्रीलंका) से डॉ. अंजलि मिश्रा और असम से मित्रा सेन की मौजूदगी यह दर्शाती है कि रामायण की महिमा सीमाओं में नहीं बंधी है।
भजन, प्रवचन और सांस्कृतिक संध्या: 5 दिनों का पूरा शेड्यूल
पार्श्व गायक डॉ. ललित सिंह ठाकुर ने बताया कि इन पांच दिनों में भक्तों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का अनूठा संगम होगा:
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भजन सभा और मानस प्रवचन: सुबह से ही संतों की वाणी से रामायण के गूढ़ रहस्यों का वाचन होगा।
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सांस्कृतिक संध्या: लोक कलाकारों और पार्श्व गायकों द्वारा भक्तिमय प्रस्तुतियों से शाम को रामलीला मैदान भक्ति के रस में डूबा रहेगा।
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कवि सम्मेलन: देश के विख्यात कवि 'श्रीराम' पर अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जाग्रत करेंगे।
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विशेष सम्मान: समाज और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मूर्धन्य व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा।
राष्ट्रीय रामायण मेला: मुख्य विवरण (Event Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| आयोजन स्थल | रामलीला मैदान, भाटापारा (छत्तीसगढ़) |
| अवधि | 14 जनवरी से 18 जनवरी 2026 |
| प्रमुख आकर्षण | डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' (ब्रांड एंबेसडर) |
| सहभागी शहर | अयोध्या, आगरा, मुंबई, हरिद्वार, कोलंबो, काठमांडू |
| विशेषता | श्रीराम पर आधारित व्याख्यान और सांस्कृतिक समागम |
इतिहास का पन्ना: छत्तीसगढ़ का रामायण कनेक्शन और भाटापारा की विरासत
छत्तीसगढ़ का रामायण से गहरा और भावनात्मक संबंध रहा है। मान्यताओं के अनुसार, छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की जन्मभूमि है, यानी यह भगवान श्रीराम का 'ननिहाल' है। 14वीं और 15वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी इस क्षेत्र का वर्णन 'दक्षिण कोसल' के रूप में मिलता है। इतिहास गवाह है कि वनवास के दौरान प्रभु श्री राम ने अपना काफी समय दंडकारण्य (छत्तीसगढ़ का हिस्सा) में बिताया था। भाटापारा का रामलीला मैदान दशकों से इन परंपराओं का केंद्र रहा है। 1990 के दशक से यहाँ रामायण मेलों की परंपरा ने जोर पकड़ा, लेकिन इस बार का 'राष्ट्रीय रामायण मेला' अपनी भव्यता और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के कारण एक नया 'कीर्तिमान' स्थापित करने जा रहा है। डॉ. 'राधे राधे' ने ठीक ही कहा है कि इस मेले की मूर्त परिकल्पना भाटापारा को सांस्कृतिक मानचित्र पर अमर कर देगी।
डॉ. 'राधे राधे' का संदेश: भगवान राम को समर्पित जीवन
साहित्य जगत के उभरते हस्ताक्षर डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' का मानना है कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।
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साहित्यिक छाप: अपनी लेखनी और समर्पण के बल पर उन्होंने काठमांडू से लेकर भाटापारा तक सनातन संस्कृति का झंडा बुलंद किया है।
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समिति को बधाई: डॉ. 'राधे राधे' ने राष्ट्रीय रामायण मेला समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि भगवान राम के प्रति यह समर्पण भाटापारा में खुशियों का एक नया सवेरा लेकर आया है।
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व्यापक सहभागिता: झांसी, आगरा, जबलपुर, चित्रकूट और गोरखपुर जैसे पवित्र शहरों से आ रहे श्रद्धालुओं के कारण यहाँ एक लघु भारत का दर्शन होगा।
भक्ति का नया अध्याय
भाटापारा में आज से शुरू हो रहा यह मेला न केवल छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं को मंच देगा, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देगा कि श्रीराम का ननिहाल आज भी उनकी स्मृतियों और आदर्शों को अक्षुण्ण रखे हुए है।
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