Telangana Rescue: टनल हादसे में गुमला के मजदूर फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी!
तेलंगाना में टनल हादसे में झारखंड के मजदूर फंस गए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तेलंगाना सरकार से रेस्क्यू तेज करने की अपील की। जानिए पूरी खबर!

हैदराबाद/रांची, 22 फरवरी 2025 – तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में एक निर्माणाधीन टनल हादसे ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। इस टनल का एक हिस्सा गिरने से झारखंड के गुमला जिले समेत अन्य राज्यों के मजदूर फंस गए हैं। जैसे ही इस घटना की जानकारी झारखंड सरकार को मिली, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत तेलंगाना सरकार से संपर्क साधा और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करने की अपील की।
टनल हादसे में फंसे मजदूर, बढ़ी चिंता
22 फरवरी की सुबह तेलंगाना के डोमलपेंटा इलाके में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल टनल का एक हिस्सा अचानक ढह गया। इस दौरान टनल में काम कर रहे 6 से 8 मजदूर अंदर ही फंस गए। इनमें झारखंड के गुमला जिले के चार मजदूर शामिल हैं, जबकि अन्य उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब से ताल्लुक रखते हैं।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया और एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया। फिलहाल बचाव कार्य जारी है, लेकिन टनल के अंदर की स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
हेमंत सोरेन की पहल, तेलंगाना सरकार से सीधा संपर्क
घटना की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री से बात कर मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। झारखंड सरकार के प्रवासी नियंत्रण कक्ष को भी सतर्क कर दिया गया है, जो लगातार तेलंगाना सरकार से संपर्क में है।
हेमंत सोरेन ने कहा:
"हमारी पहली प्राथमिकता मजदूरों की सुरक्षा है। हमने तेलंगाना सरकार से अपील की है कि रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज किया जाए और हमारे मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। मरांग बुरु से मैं प्रार्थना करता हूँ कि सभी सुरक्षित बाहर निकलें।"
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी NDRF, लेकिन राह आसान नहीं!
एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीम मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। हालांकि, टनल के ढहने से अंदर मलबे का बड़ा ढेर जमा हो गया है, जिससे मजदूरों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
रेस्क्यू टीम ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य आधुनिक उपकरणों के सहारे मजदूरों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है। वहीं, मजदूरों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। गुमला जिले में इनके परिजन लगातार सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
टनल का ऐतिहासिक महत्व और निर्माण की चुनौतियां
यह टनल तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले को आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग से जोड़ने के लिए बनाई जा रही थी। श्रीशैलम ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
इस टनल के निर्माण से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच यात्रा सुगम होने की उम्मीद थी, लेकिन अब यह हादसा निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़ा कर रहा है।
परिवारों में दहशत, सरकार से मदद की गुहार
गुमला जिले में मजदूरों के परिवारों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। श्रम विभाग ने इन मजदूरों के परिवारों से संपर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और रविवार तक पूरी जानकारी जुटाई जाएगी।
मजदूर के परिजनों का कहना है:
"हमारे बेटे कब बाहर आएंगे, इसकी कोई खबर नहीं है। हमें बस यह बताया जा रहा है कि रेस्क्यू चल रहा है, लेकिन हमें जल्द से जल्द अपने लोगों को सुरक्षित देखना है।"
क्या सरकार हादसे की जांच करवाएगी?
इस घटना ने देशभर में निर्माणाधीन टनलों और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
झारखंड और तेलंगाना सरकार के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल प्राथमिकता मजदूरों की जान बचाने की है, लेकिन बाद में हादसे के कारणों की जांच भी की जाएगी।
टनल हादसे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। झारखंड सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मजदूरों के परिजनों को भरोसा दिला रही है कि वे जल्द ही सुरक्षित घर लौटेंगे।
इस घटना ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उम्मीद है कि यह हादसा सरकारों और प्रशासन के लिए एक सबक बनेगा और भविष्य में मजदूरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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