Tatanagar Bulldozer: जमशेदपुर में पीला पंजा, टाटानगर स्टेशन के पास 32 दुकानों और मकानों पर चला बुलडोजर, बागबेड़ा-कीताडीह में हड़कंप

टाटानगर रेलवे स्टेशन के री-डेवलपमेंट के लिए रेलवे ने बागबेड़ा और कीताडीह मार्ग पर दशकों पुराने अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस बड़ी कार्रवाई और उजड़ती रोजी-रोटी की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी स्टेशन क्षेत्र में हो रहे इस ऐतिहासिक बदलाव की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।

Jan 16, 2026 - 15:24
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Tatanagar Bulldozer: जमशेदपुर में पीला पंजा, टाटानगर स्टेशन के पास 32 दुकानों और मकानों पर चला बुलडोजर, बागबेड़ा-कीताडीह में हड़कंप
Tatanagar Bulldozer: जमशेदपुर में पीला पंजा, टाटानगर स्टेशन के पास 32 दुकानों और मकानों पर चला बुलडोजर, बागबेड़ा-कीताडीह में हड़कंप

जमशेदपुर, 16 जनवरी 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले टाटानगर रेलवे स्टेशन का नक्शा अब पूरी तरह बदलने वाला है। शुक्रवार सुबह रेलवे ने अपनी महत्वाकांक्षी 'री-डेवलपमेंट योजना' के तहत एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए बागबेड़ा और कीताडीह जाने वाले मार्ग पर स्थित दर्जनों अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया। भारी संख्या में तैनात आरपीएफ (RPF), स्थानीय पुलिस और रेलवे के अधिकारियों की मौजूदगी में चले इस 'पीले पंजे' ने उन दुकानों और मकानों को हटा दिया जो दशकों से रेलवे की भूमि पर काबिज थे। हालांकि झारखंड हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन था, लेकिन स्थगन आदेश (Stay Order) न मिलने के कारण रेलवे ने इस मेगा ड्राइव को अंजाम दिया।

सुबह का सन्नाटा और बुलडोजर की गूँज: 32 निर्माण हुए ध्वस्त

शुक्रवार की सुबह टाटानगर स्टेशन क्षेत्र के लिए काफी गहमागहमी भरी रही। प्रशासन ने बिना किसी देरी के सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी।

  • शांतिपूर्ण कार्रवाई: पहले ही मार्किंग और सीमांकन का काम पूरा होने के कारण प्रशासन को किसी बड़े विरोध का सामना नहीं करना पड़ा।

  • ध्वस्तीकरण का आंकड़ा: इस अभियान में कुल 32 निर्माणों को हटाया गया, जिसमें 27 दुकानें और 5 पक्के मकान शामिल हैं।

  • 3 दिन की मोहलत: मानवीय आधार पर 4 दुकानदारों को अपना कीमती सामान सुरक्षित हटाने के लिए 3 दिनों की अतिरिक्त राहत दी गई है।

शराब दुकान से लेकर घरों तक: कहाँ-कहाँ चला बुलडोजर?

अतिक्रमण हटाओ अभियान का दायरा काफी विस्तृत था।

  1. स्टेशन चौक से कीताडीह मार्ग: इस रास्ते पर सालों से जमी दुकानों को हटाया गया।

  2. बीएसएनएल और बागबेड़ा मार्ग: यहाँ स्थित अवैध शेड और मकानों पर बुलडोजर चला।

  3. गोलपहाड़ी गोलचक्कर: यहाँ स्थित एक पुरानी शराब दुकान समेत अन्य व्यावसायिक निर्माणों को मलबे में तब्दील कर दिया गया।

    जमशेदपुर के अंचलाधिकारी (CO) मनोज कुमार स्वयं मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात रहे ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो।

टाटानगर अतिक्रमण हटाओ अभियान: मुख्य विवरण (Action Snapshot)

विवरण जानकारी (Details)
कुल ध्वस्त निर्माण 32 (27 दुकानें, 5 मकान)
मुख्य क्षेत्र बागबेड़ा, कीताडीह मार्ग, गोलपहाड़ी
वजह रेलवे री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट
प्रशासनिक नेतृत्व मनोज कुमार (अंचलाधिकारी, जमशेदपुर)
राहत अवधि 04 दुकानों को 3 दिन का समय मिला

इतिहास का पन्ना: टाटानगर स्टेशन और 'रेलवे लैंड' का पुराना संघर्ष

टाटानगर रेलवे स्टेशन का इतिहास साल 1907 से शुरू होता है, जब इसे 'कालीमाटी' स्टेशन के नाम से जाना जाता था। 1919 में जमशेदजी टाटा के सम्मान में इसका नाम 'टाटानगर' पड़ा। इतिहास गवाह है कि जैसे-जैसे स्टेशन का विस्तार हुआ, आसपास के बागबेड़ा और कीताडीह इलाकों में आबादी बढ़ती गई। 1970 और 80 के दशक में जब जमशेदपुर में औद्योगिक क्रांति चरम पर थी, तब हजारों लोगों ने रेलवे की खाली पड़ी जमीनों पर अपनी दुकानें और आशियाने बना लिए थे। कई दुकानदार यहाँ 50 वर्षों से काबिज थे और नियमित रूप से (दावे के अनुसार) किराया भी देते आ रहे थे। आज का यह ध्वस्तीकरण केवल ईंट-पत्थर का गिरना नहीं है, बल्कि उस 'अनौपचारिक बस्तियों' के इतिहास का अंत है जो स्टेशन के साथ-साथ विकसित हुई थीं। 2026 की यह कार्रवाई स्टेशन को 'वर्ल्ड क्लास' बनाने की दिशा में एक कड़ा लेकिन जरूरी कदम माना जा रहा है।

उजड़ते रोजगार का दर्द: "अब कहाँ जाएंगे हम?"

बुलडोजर की कार्रवाई के बीच दुकानदारों की आंखें नम थीं। उनका कहना है कि वे यहाँ पिछले 40-50 सालों से कारोबार कर रहे थे।

  • रोजी-रोटी पर संकट: दुकानदारों के अनुसार, इस कार्रवाई से न केवल मालिक, बल्कि उनसे जुड़े 40 से 50 कर्मचारी भी एक झटके में बेरोजगार हो गए हैं।

  • अचानक कार्रवाई का आरोप: भले ही पुलिस ने गुरुवार रात माइक से अनाउंसमेंट की थी, लेकिन दुकानदारों का कहना है कि इतने कम समय में दशकों पुराना जमा-जमाया काम समेटना नामुमकिन था।

  • पुनर्वास की मांग: प्रभावित परिवारों ने सरकार और रेलवे से मांग की है कि उन्हें किसी अन्य स्थान पर दुकान लगाने के लिए जगह दी जाए।

वर्ल्ड क्लास स्टेशन की ओर बढ़ते कदम

टाटानगर रेलवे स्टेशन का कायाकल्प अब अंतिम दौर में है। रेलवे की इस सख्ती से एक ओर जहाँ यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं और चौड़ी सड़कें बनेंगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारियों के लिए यह एक बड़ी आर्थिक चोट है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विकास की राह में आने वाले हर अवरोध को इसी तरह हटाया जाएगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।