Pardih Arrest: गोल्डन लीफ रिसॉर्ट में घेराबंदी कर दबोचा गया खूंखार अपराधी, कारोबारियों में दहशत का अंत
जमशेदपुर के कारोबारियों के लिए सिरदर्द बना कुख्यात अपराधी मनीष सिंह पारडीह के गोल्डन लीफ रिसॉर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है। जुगसलाई थाना प्रभारी के सस्पेंशन और पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है।
जमशेदपुर, 4 मार्च 2026 – लौहनगरी के व्यापारियों और उद्यमियों के लिए पिछले कुछ हफ़्तों से खौफ का दूसरा नाम बन चुका अपराधी मनीष सिंह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। जमशेदपुर पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर पारडीह स्थित गोल्डन लीफ रिसॉर्ट में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया। मनीष सिंह की गिरफ्तारी शहर की कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि उसकी दहशत के कारण हाल ही में जुगसलाई थाना प्रभारी तक को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी।
रिसॉर्ट के कमरे में चल रहा था 'रंगदारी' का खेल
जेल से बाहर आने के बाद मनीष सिंह ने एक बार फिर अपराध की दुनिया में पैर पसारने शुरू कर दिए थे। वह छिपने के लिए सुरक्षित ठिकानों की तलाश में था और पारडीह के एक आलीशान रिसॉर्ट में कमरा लेकर रह रहा था।
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कारोबारियों को धमकी: मनीष पर आरोप है कि जेल से छूटते ही उसने शहर के कई बड़े कारोबारियों को फोन कर मोटी रंगदारी की मांग की थी।
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पुलिस की पैनी नजर: नए थाना प्रभारी गुलाम रब्बानी ने कमान संभालते ही मनीष की लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। बुधवार को सटीक इनपुट मिलते ही पुलिस ने रिसॉर्ट की घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।
सस्पेंशन और नया थानेदार: भारी पड़ा था मनीष का खौफ
मनीष सिंह की गिरफ्तारी जमशेदपुर पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई थी।
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जुगसलाई थाना प्रभारी पर गिरी गाज: मनीष की बढ़ती गतिविधियों और उसे न पकड़ पाने की विफलता के कारण एसएसपी ने जुगसलाई के तत्कालीन थाना प्रभारी बैजनाथ कुमार को सस्पेंड कर दिया था।
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गुलाम रब्बानी का एक्शन: दो दिन पहले ही गुलाम रब्बानी को नया थानेदार बनाया गया और उन्होंने कार्यभार संभालते ही इस चुनौती को स्वीकार किया। यह गिरफ्तारी उनकी पहली और सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
सरेंडर या गिरफ्तारी? चर्चाओं का बाजार गर्म
मनीष सिंह की इस गिरफ्तारी को लेकर शहर में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
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पुलिसिया कार्रवाई: आधिकारिक तौर पर पुलिस इसे एक सफल छापेमारी बता रही है, जहाँ अपराधी को घेराबंदी कर पकड़ा गया।
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सरेंडर की थ्योरी: शहर के कुछ गलियारों में इसे 'सुनियोजित सरेंडर' भी कहा जा रहा है। हालांकि, जानकारों का तर्क है कि अगर मनीष को सरेंडर ही करना होता, तो वह किसी रिसॉर्ट के बजाय सीधे कोर्ट या थाने जाता। एक रिसॉर्ट के बंद कमरे में पुलिस की दबिश सीधे तौर पर गिरफ्तारी की कहानी को पुख्ता करती है।
अपराध की लंबी कुंडली: दर्जनों मामले हैं दर्ज
मनीष सिंह कोई नया अपराधी नहीं है, बल्कि जमशेदपुर पुलिस के रिकॉर्ड में उसका नाम काफी पुराना है। उसके खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में कई गंभीर मामले दर्ज हैं:
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रंगदारी (Extortion): व्यापारियों को डरा-धमकाकर पैसे वसूलना।
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आर्म्स एक्ट: अवैध हथियार रखने और उनकी तस्करी।
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गोली चालन: हत्या के प्रयास और सरेराह गोलीबारी की घटनाएं।
गिरफ्तारी का विवरण: एक नजर में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| नाम | मनीष सिंह (कुख्यात अपराधी) |
| गिरफ्तारी स्थल | गोल्डन लीफ रिसॉर्ट, पारडीह |
| मुख्य अधिकारी | थाना प्रभारी गुलाम रब्बानी |
| मुख्य आरोप | रंगदारी और आर्म्स एक्ट |
कारोबारियों ने ली राहत की सांस
मनीष सिंह के पकड़े जाने के बाद बिस्टुपुर, जुगसलाई और साकची के व्यापारियों ने राहत महसूस की है। पिछले कई दिनों से व्यापारी वर्ग डरा हुआ था। पुलिस अब मनीष से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि यह पता चल सके कि उसे रिसॉर्ट में शरण किसने दी थी और उसके गिरोह में और कौन-कौन से नए सदस्य शामिल हुए हैं।
अपराध के खिलाफ सख्त संदेश
मनीष सिंह की गिरफ्तारी से जमशेदपुर पुलिस ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराधियों के लिए शहर में कोई जगह नहीं है। थाना प्रभारी का सस्पेंशन और फिर नए थानेदार द्वारा त्वरित गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि पुलिस पर ऊपर से भी काफी दबाव था। फिलहाल मनीष पुलिस की रिमांड में है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होंगे।
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