Dumka Horror: मेले से लौटते वक्त खूनी खेल, दुमका में छेड़खानी का विरोध करने पर किशोर की चाकू घोंपकर हत्या, दहशत में इलाका
दुमका के तातलोई मेला से लौट रहे तीन दोस्तों पर बाइक सवार बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया है। छेड़खानी का विरोध करने पर लखींद्र नामक किशोर की चाकूबाजी में मौत और घायलों की चीख-पुकार के बीच रामगढ़ थाना क्षेत्र में फैली सनसनी की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी झारखंड की उपराजधानी में छिपे इस खौफनाक सच को जानने से चूक जाएंगे।
दुमका, 16 जनवरी 2026 – झारखंड की उपराजधानी दुमका में कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए अपराधियों ने एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया है जिससे पूरा जिला दहल उठा है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के पथरिया के पास गुरुवार देर रात मेला देखकर लौट रहे तीन दोस्तों को बदमाशों ने अपना निशाना बनाया। छेड़खानी का विरोध करने पर बदमाशों ने चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिसमें लखींद्र नामक किशोर की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, एक अन्य किशोर डेविड और एक किशोरी गंभीर रूप से घायल हैं। इस घटना ने एक बार फिर मेलों और सुनसान रास्तों पर सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।
तातलोई मेला से लौटते वक्त मौत का तांडव: ओवरटेक कर रोका रास्ता
घटना की शुरुआत गुरुवार की शाम जामा थाना क्षेत्र के प्रसिद्ध तातलोई मेला से हुई।
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सफर बना काल: दो किशोर, डेविड और लखींद्र, एक किशोरी सहेली के साथ बाइक पर सवार होकर घर लौट रहे थे।
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बदमाशों की घेराबंदी: जब वे रामगढ़ थाना क्षेत्र के पथरिया के पास पहुँचे, तभी एक बाइक पर सवार तीन अज्ञात युवकों ने उनका पीछा करना शुरू किया। सुनसान जगह देखकर बदमाशों ने ओवरटेक किया और उनकी बाइक को जबरन रुकवा लिया।
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विरोध की सजा मौत: आरोपियों ने किशोरी के साथ बदतमीजी शुरू कर दी और उसे जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश की। जब लखींद्र और डेविड अपनी सहेली की अस्मत बचाने के लिए बीच में आए, तो बदमाशों ने आव देखा न ताव और अपनी कमर से चाकू निकालकर तीनों पर हमला बोल दिया।
फूलो झानो अस्पताल में मची चीख-पुकार: एक ने दम तोड़ा
चाकूबाजी के बाद अपराधी मौके से फरार हो गए। लहूलुहान हालत में तीनों को रात के अंधेरे में अस्पताल पहुँचाया गया।
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डॉक्टरों ने घोषित किया मृत: दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने लखींद्र की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। उसके शरीर पर गहरे जख्म के निशान थे।
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जिंदगी और मौत की जंग: घायल डेविड और किशोरी का इलाज जारी है। दोनों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। किशोरी इस वक्त गहरे सदमे में है और बार-बार उस खौफनाक मंजर को याद कर कांप उठती है।
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पुलिस की दबिश: सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ विजय कुमार महतो दल-बल के साथ अस्पताल पहुँचे। उन्होंने घायलों से आरोपियों का हुलिया और घटना की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की।
दुमका चाकूबाजी कांड: मुख्य विवरण (Crime Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| मृतक का नाम | लखींद्र (किशोर) |
| घायल | डेविड और एक किशोरी |
| स्थान | पथरिया, रामगढ़ थाना क्षेत्र (दुमका) |
| मुख्य वजह | छेड़खानी का विरोध करना |
| अपराधी | तीन अज्ञात बाइक सवार युवक |
इतिहास का पन्ना: तातलोई मेला और दुमका की 'बदनाम' गलियां
दुमका का तातलोई गर्म पानी के कुंड (Hot Spring) के लिए पूरे झारखंड में प्रसिद्ध है। 19वीं शताब्दी से ही यहाँ मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता रहा है। इतिहास गवाह है कि तातलोई का क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक आस्था का केंद्र रहा है, जहाँ लोग दूर-दूर से शांति की तलाश में आते हैं। लेकिन पिछले एक दशक में दुमका के ग्रामीण इलाकों में मेलों के दौरान असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ने लगा है। साल 2018 और 2022 में भी दुमका के इसी क्षेत्र में मेले से लौटती महिलाओं के साथ बदसलूकी और हत्या की छिटपुट घटनाएं दर्ज हुई थीं। उपराजधानी होने के नाते यहाँ सुरक्षा कड़ी होनी चाहिए, लेकिन तातलोई से रामगढ़ के बीच का यह पथरीला और सुनसान रास्ता अपराधियों के लिए सुरक्षित गलियारा बनता जा रहा है। आज की घटना ने उस पुराने इतिहास को दोहराया है जहाँ रक्षक बनने वाले किशोरों को अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ी।
पुलिस की चुप्पी और ग्रामीणों का गुस्सा
सदर एसडीपीओ विजय कुमार महतो ने फिलहाल आधिकारिक तौर पर बहुत कुछ कहने से परहेज किया है, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया है कि अपराधी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।
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पहचान की कोशिश: पुलिस तातलोई मेले के सीसीटीवी फुटेज और रास्ते में लगे कैमरों की जांच कर रही है ताकि उस बाइक का नंबर ट्रेस किया जा सके।
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ग्रामीणों का आक्रोश: इस घटना के बाद रामगढ़ और जामा क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि अगर सरेआम सड़कों पर हमारे बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो उपराजधानी का क्या मतलब?
कब थमेगा ये खूनी सिलसिला?
लखींद्र ने अपनी जान देकर अपनी सहेली की इज्जत तो बचा ली, लेकिन उसने पीछे अपने माता-पिता के लिए कभी न खत्म होने वाला दर्द छोड़ दिया है। दुमका पुलिस के लिए यह साख का सवाल है कि वे कितनी जल्दी इन कातिलों को पकड़ पाते हैं।
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