Tata Tinplate Bonus : टाटा स्टील ( टिनप्लेट डिवीजन ) ने दिया कर्मचारियों को बंपर बोनस! कितनी राशि मिलेगी?

क्या टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन में काम करने वाले कर्मचारियों को मिल रहा है 75 हजार तक का बोनस?

Aug 29, 2025 - 09:04
Aug 29, 2025 - 09:05
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Tata Tinplate Bonus : टाटा स्टील ( टिनप्लेट डिवीजन ) ने दिया कर्मचारियों को बंपर बोनस! कितनी राशि मिलेगी?
Tata Tinplate bonus : टाटा स्टील ( टिनप्लेट डिवीजन ) ने दिया कर्मचारियों को बंपर बोनस! कितनी राशि मिलेगी?

टाटा स्टील ने अपने टिनप्लेट डिवीजन के कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। ये फैसला गुरुवार को हुआ। अब कंपनी टिनप्लेट डिवीजन के कर्मचारियों को सैलरी के साथ बोनस भी देगी। टाटा स्टील का बोनस और टिनप्लेट का बोनस दोनों मिलकर दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों में खुशी की लहर है। ये बोनस कर्मचारियों के परफॉर्मेंस पर आधारित है।

 कंपनी ने कहा है कि ये बोनस उत्पादन बढ़ाने के लिए है। समझौता गुरुवार को हुआ। इसमें कंपनी और वर्कर्स यूनियन ने साइन किया। न्यूनतम बोनस 30,581 रुपये है। अधिकतम बोनस 75,075 रुपये तक है। कुल मिलाकर टिनप्लेट डिवीजन में 4.02 करोड़ रुपये का बोनस बांटा जाएगा। इससे 844 कर्मचारी लाभान्वित होंगे। बोनस की राशि प्रोडक्शन और परफॉर्मेंस पर निर्भर है।

 कंपनी के चीफ पीपुल ऑफिसर अंतर्राष्ट्रीय संयाल ने कहा कि ये बोनस कर्मचारियों को मोटिवेट करेगा। इंडस्ट्रियल टिनप्लेट उज्ज्वल चकवाती, सीईओ आरओ जुबिना पलिया, ईसीआर अधिकारी राहुल दुबे, सोनम रंजन, आशीष चौधरी ने समझौते में हिस्सा लिया। टाटा टिनप्लेट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पांडे, महामंत्री मनोज सिंह, डिप्टी प्रेसिडेंट परविंदर सिंह, सोहेल जगजीत सिंह, असबी राजू, विकिल खान, संजय कुमार आदि ने हस्ताक्षर किए। बोनस की राशि 16.69 प्रतिशत है। ये बोनस सितंबर महीने में कर्मचारियों के अकाउंट में आएगा। इसे एक ही किस्त में दिया जाएगा।

पिछले साल की तुलना में ये बोनस ज्यादा है। पिछले साल 2 करोड़ 22 लाख रुपये का बोनस बांटा गया था। उस समय 460 कर्मचारियों को बोनस मिला। न्यूनतम 16,500 रुपये और अधिकतम 64,500 रुपये का बोनस था। इस साल बोनस की राशि बढ़ गई है। न्यूनतम 30,581 रुपये और अधिकतम 79,099 रुपये तक पहुंच गया है। टाटा स्टील की ये स्कीम कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है।

कंपनी ने कहा कि इससे उत्पादन बढ़ेगा। कर्मचारी ज्यादा मेहनत करेंगे। टिनप्लेट डिवीजन अब टाटा स्टील का हिस्सा है। पहले ये अलग कंपनी थी। अब दोनों का बोनस साथ मिल रहा है। इससे कर्मचारियों की आय बढ़ेगी। परिवार खुश होंगे। समझौते में सभी पक्ष सहमत हुए। यूनियन ने कर्मचारियों की मांग रखी। कंपनी ने उसे माना। ये औद्योगिक शांति के लिए अच्छा है।

 जमशेदपुर में टाटा स्टील बड़ा एम्प्लॉयर है। हजारों लोग यहां काम करते हैं। ऐसे बोनस से उनका मनोबल बढ़ता है। कंपनी के अधिकारी उज्ज्वल चकवाती ने कहा कि बोनस से प्रोडक्शन बेहतर होगा। जुबिना पलिया ने कर्मचारियों की सराहना की। वे बोलीं कि टीम वर्क से ये संभव हुआ। राहुल दुबे और सोनम रंजन ने डिटेल्स शेयर कीं। आशीष चौधरी ने यूनियन के साथ मीटिंग की। यूनियन लीडर राकेश्वर पांडे ने कहा कि ये कर्मचारियों की जीत है।

मनोज सिंह ने बताया कि लंबी बातचीत के बाद समझौता हुआ। परविंदर सिंह ने बोनस की राशि पर खुशी जताई। सोहेल जगजीत सिंह, असबी राजू, विकिल खान और संजय कुमार ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि इससे वर्कर्स का जीवन बेहतर होगा। ये खबर जमशेदपुर के लिए महत्वपूर्ण है। टाटा स्टील यहां की अर्थव्यवस्था का आधार है। बोनस से लोकल मार्केट में खर्च बढ़ेगा। दुकानदार खुश होंगे। त्योहारों से पहले ये बोनस आएगा। कर्मचारी दिवाली की तैयारी कर सकेंगे। पिछले साल के बोनस से तुलना करें तो ये 50 प्रतिशत से ज्यादा है। पिछले साल कुल 2.22 करोड़ था।

 इस साल 4.02 करोड़ है। कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी है। 460 से 844 हो गई। न्यूनतम बोनस दोगुना हो गया। अधिकतम भी बढ़ा। कंपनी ने कहा कि बोनस कैलकुलेशन फेयर है। ये ग्रेड और परफॉर्मेंस पर आधारित है। कम सैलरी वाले को कम बोनस। ज्यादा सैलरी वाले को ज्यादा। लेकिन प्रतिशत सबके लिए 16.69 है। ये समझौता इंडस्ट्री के लिए उदाहरण है। अन्य कंपनियां भी ऐसा कर सकती हैं। कर्मचारी यूनियन मजबूत हुई। वे अपनी मांग मनवा सके। टाटा स्टील की इमेज अच्छी हुई। वे कर्मचारी फ्रेंडली कंपनी हैं।

जमशेदपुर के लोग इस खबर से उत्साहित हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। कई कर्मचारी अपने दोस्तों को बता रहे हैं। ये बोनस उनके लिए बड़ा सपोर्ट है। महंगाई के समय में अतिरिक्त पैसा मदद करता है। कुल मिलाकर टाटा स्टील का ये कदम सराहनीय है। इससे कंपनी और कर्मचारियों के रिश्ते मजबूत होंगे। भविष्य में और ऐसे समझौते हो सकते हैं। जमशेदपुर की इंडस्ट्री ग्रोथ करेगी।

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Team India मैंने कई कविताएँ और लघु कथाएँ लिखी हैं। मैं पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हूं और अब संपादक की भूमिका सफलतापूर्वक निभा रहा हूं।