Seraikela Strike : सरायकेला में पुल निर्माण कंपनी से लेवी मांगने वाले 7 अपराधी गिरफ्तार, कट्टा-पिस्तौल और बाइक बरामद
सरायकेला पुलिस ने 'जंगल के आदमी' बनकर पुल निर्माण कंपनी से 5 लाख की लेवी मांगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह को दबोचा है। कट्टा, पिस्टल और 7 गिरफ्तारियों की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
सरायकेला/खरसावां, 13 अप्रैल 2026 – झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने और उग्रवादियों के नाम पर दहशत फैलाकर लेवी वसूलने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पुलिस ने खात्मा कर दिया है। जिला पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के 7 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को ‘जंगल के आदमी’ बताकर एक पुल निर्माण कंपनी से 5 लाख रुपये की रंगदारी मांग रहे थे। पुलिस ने इनके पास से न केवल हथियार बरामद किए हैं, बल्कि उस मोबाइल को भी जब्त कर लिया है जिससे मुंशी और साइट इंचार्ज को धमकियां दी जा रही थीं।
दहशत का खेल: "काम बंद करो, लेवी दो"
यह मामला खरसावां थाना अंतर्गत आमदा ओ.पी. के पिताकलाग का है, जहाँ एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य चल रहा है।
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साइट पर धावा: 3 अप्रैल को आधा दर्जन अपराधी अचानक निर्माण स्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद मुंशी और मजदूरों को हथियार दिखाकर धमकाया और तुरंत काम रोकने का आदेश दिया।
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नक्सली खौफ का सहारा: अपराधियों ने साइट इंचार्ज को फोन कर खुद को नक्सली या 'जंगल का आदमी' बताया। उन्होंने साफ कहा कि अगर काम जारी रखना है, तो 5 लाख रुपये की लेवी (रंगदारी) पहुँचानी होगी।
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SIT की कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सरायकेला ने SDPO समीर सवैया के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
छापेमारी और गिरफ्तारी: पुलिस के जाल में फंसे सातों गुर्गे
तकनीकी साक्ष्यों (Mobile Tracking) और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और गिरोह के सभी सदस्यों को अलग-अलग ठिकानों से दबोच लिया।
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गिरफ्तार अभियुक्त: पुलिस ने मो. एहसान अंसारी, शमीर सामड़, मो. मोदासीर अंसारी, रविन्द्र हाईबुरू, चन्द्रमोहन बांकिरा उर्फ पांडु, दुर्गा चरण चाकी उर्फ राजन और असीम बारिक को गिरफ्तार किया है।
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हथियार और वाहन: इनके पास से एक देशी कट्टा, एक देशी पिस्टल, दो जिंदा गोली और तीन मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं।
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पुराना इतिहास: पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों का पुराना रिकॉर्ड रहा है। ये पहले भी हत्या, अपहरण, चोरी और आर्म्स एक्ट के मामलों में जेल की हवा खा चुके हैं।
उग्रवाद की परछाई और पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन'
सरायकेला-खरसावां का इलाका भौगोलिक रूप से पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा है, जिसका अपना एक जटिल सुरक्षा इतिहास रहा है।
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लाल गलियारे का प्रभाव: अतीत में यह क्षेत्र वामपंथी उग्रवाद (LWE) से बुरी तरह प्रभावित रहा है। कुचाई और खरसावां के जंगलों का फायदा उठाकर उग्रवादी संगठन अक्सर विकास योजनाओं से लेवी वसूलते रहे हैं।
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अपराधियों का नया तरीका: जैसे-जैसे नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है, स्थानीय अपराधी गिरोह अब उनके नाम (जंगल के आदमी) का इस्तेमाल कर ठेकेदारों को डराने लगे हैं। 'पिताकलाग' जैसी जगहों पर विकास पहुंचना इन अपराधियों के लिए कमाई का जरिया बन जाता है।
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पुलिस की रणनीति: खरसावां और आमदा ओ.पी. क्षेत्र में पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में 'ह्यूमन इंटेलिजेंस' को मजबूत किया है। एसडीपीओ समीर सवैया के नेतृत्व में पुलिस अब न केवल नक्सलियों, बल्कि उनके नाम पर ठगी करने वाले 'क्रिमिनल गैंग्स' पर भी प्रहार कर रही है।
अगली कार्रवाई: जेल भेजे गए अपराधी, सुरक्षा बढ़ी
इस सफल अभियान में खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार और आमदा ओपी प्रभारी रामरेखा पासवान ने अहम भूमिका निभाई है।
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जब्त मोबाइल का राज: पुलिस ने कुल 9 मोबाइल जब्त किए हैं। इनमें से दो का इस्तेमाल विशेष रूप से लेवी मांगने के लिए किया गया था। इन फोन्स के डेटा से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इन्होंने किसी अन्य कंपनी को भी निशाना बनाया था।
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साइट पर सुरक्षा: पुल निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो गया है। पुलिस ने निर्माण कंपनी को आश्वासन दिया है कि क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाएगी ताकि विकास कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।
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अदालती कार्यवाही: सभी सातों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इनके अन्य संपर्कों और हथियारों की सप्लाई चैन की जांच कर रही है।
सरायकेला पुलिस की यह कार्रवाई यह साबित करती है कि अब 'जंगल के आदमी' के नाम पर डराना आसान नहीं होगा। विकास कार्यों में लेवी मांगना न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि यह राज्य की प्रगति को पीछे धकेलने की कोशिश है। 5 लाख की मांग करने वाले ये 7 अपराधी अब सलाखों के पीछे हैं, लेकिन यह घटना उन निर्माण कंपनियों के लिए चेतावनी है जो डर के मारे पुलिस को सूचना नहीं देते। फिलहाल, पिताकलाग में पुल का काम फिर से रफ्तार पकड़ चुका है।
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